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बिना पूरा राशन मिले माइनस टेम्परेचर में देश की रखवाली करते जवान, जूतों कपड़ों की भी कमी; रिपोर्ट

First Published Feb 5, 2020, 5:40 PM IST
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नई दिल्ली। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की एक रिपोर्ट पर राजनीति तेज हो गई है। सोमवार को कैग ने सियाचीन और लद्दाख में तैनात जवानों को लेकर लोकसभा में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें बताया गया है कि कैसे सेना के जवान तमाम कमियों के सतह देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

लोकसभा में कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। शून्यकाल में कैग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सियाचिन में जवानों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। आइए बताते हैं कि कैग ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें क्या है।

लोकसभा में कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। शून्यकाल में कैग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सियाचिन में जवानों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। आइए बताते हैं कि कैग ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें क्या है।

रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन और लद्दाख में तैनात सैनिकों को ज्यादा ऊंचाई पर इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़ों, चश्मों और जूतों की कमी का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जरूरी चीजों की कमी की वजह से जवानों को इनका रिसाइकल्ड वर्जन इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ा। जवानों को खास राशन की जरूरी मात्रा भी नहीं मिली। यहां तैनात जवानों को 82 फीसदी कैलोरी मिली।

रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन और लद्दाख में तैनात सैनिकों को ज्यादा ऊंचाई पर इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़ों, चश्मों और जूतों की कमी का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जरूरी चीजों की कमी की वजह से जवानों को इनका रिसाइकल्ड वर्जन इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ा। जवानों को खास राशन की जरूरी मात्रा भी नहीं मिली। यहां तैनात जवानों को 82 फीसदी कैलोरी मिली।

रिपोर्ट में बताया गया कि बजट कम होने की वजह से ज्यादा ऊंचाई पर इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की खरीदारी कम रही। इतना ही नहीं ऊंचाई वाले इलाकों में जवानों के रहने वाली जगह को बेहतर बनाने के लिए चलाया गया पायलट प्रोजेक्ट भी सक्सेस नहीं रहा। इसमें एक साल से ज्यादा की देरी भी हुई।

रिपोर्ट में बताया गया कि बजट कम होने की वजह से ज्यादा ऊंचाई पर इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की खरीदारी कम रही। इतना ही नहीं ऊंचाई वाले इलाकों में जवानों के रहने वाली जगह को बेहतर बनाने के लिए चलाया गया पायलट प्रोजेक्ट भी सक्सेस नहीं रहा। इसमें एक साल से ज्यादा की देरी भी हुई।

ऑडिट के मुताबिक नॉर्दन कमांड का आर्मी हेडक्वार्टर रिजर्व जिन डिपो में एक्सट्रीम कोल्ड क्लोदिंग एंड इक्विपमेंट (ईसीसीएंडई) रखता है, वहां उनकी काफी कमी रही। बताते चलें कि ईसीसीएंडई में जूते, कोट, चश्मे और स्लीपिंग बैग आदि आते हैं। ईस्टर्न कमांड में 9000 फीट और दूसरे कमांड में 6000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर इन्हें यूज किया जाता है।

ऑडिट के मुताबिक नॉर्दन कमांड का आर्मी हेडक्वार्टर रिजर्व जिन डिपो में एक्सट्रीम कोल्ड क्लोदिंग एंड इक्विपमेंट (ईसीसीएंडई) रखता है, वहां उनकी काफी कमी रही। बताते चलें कि ईसीसीएंडई में जूते, कोट, चश्मे और स्लीपिंग बैग आदि आते हैं। ईस्टर्न कमांड में 9000 फीट और दूसरे कमांड में 6000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर इन्हें यूज किया जाता है।

रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल कैग को बताया था कि बजट की मजबूरी के चलते खरीदारी कम रखनी पड़ी थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ एशियानेट हिंदी न्यूज डेस्क

रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल कैग को बताया था कि बजट की मजबूरी के चलते खरीदारी कम रखनी पड़ी थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ एशियानेट हिंदी न्यूज डेस्क

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