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'नरक' से कम नहीं थी इनकी जिंदगी, कोरोना ने रुलाकर रख दिया, पढ़िये रेड लाइट एरिया की दास्तां

First Published Jun 11, 2020, 11:38 AM IST
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कोलकाता/मुंबई. कोरोना संक्रमण का असर दुनिया के हर वर्ग पर पड़ा है। संक्रमण को रोकने सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर दिया गया। इसका पालन करना सेक्स वर्कर्स के लिए जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। यह और बात है कि वे माली हालत खराब होने के बावजूद इसका पालन कर रही हैं। इनकी आर्थिक हालत बिगड़ते देखकर कोलकाता में दुर्बार महिला समन्वय कमेटी ने केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की है। दुर्बार कमेटी के अंतर्गत आने वाली सोनागाछी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल डॉ. स्मरजीत जाना ने मीडिया को बताया कि सेक्स वर्कर्स दो महीने से बेकार बैठी हैं। वे क्लाइंट को मना कर रही हैं। बता दें कि यह कमेटी  सेक्स वर्कर्स के हितों के लिए काम करती है। लॉकडाउन के दौरान ऐसी सेक्स वर्कर्स की मदद की जा रही है, जो बेहद गरीब हैं। उनके पास खाने-पीने तक का इंतजाम नहीं है। इस सबसे बीच एक अच्छी पहल भी हुई है। कई सेक्स वर्कर्स ने रोजगार के वैकल्पिक स्त्रोत अपना लिए हैं। ये अब मास्क, सैनिटाइजर और सैनिटरी नैपकिन बना रही हैं। कमेटी ने कहा  कि इन लोगों की हालत को देखते हुए सरकार को इनके खातों में सीधे पैसे डालना चाहिए। बता दें कि कोलकाता और मुंबई के रेड लाइट एरिया में सैकड़ों सेक्स वर्कर्स रहती हैं। आइए देखिए सेक्स वर्कर्स की लाइफ..

डॉ. स्मरजीत जाना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि ज्यादातर सेक्स वर्कर्स के पास राशन कार्ड नहीं है। इसलिए उन्हें नि: शुल्क राशन की व्यवस्था की जाए। जो किराये से रह रही हैं, उनका तीन महीने का किराया माफ कराया जाए। किसी नरक से कम नहीं है इनकी जिंदगी..देखिए तस्वीरें..
 

डॉ. स्मरजीत जाना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि ज्यादातर सेक्स वर्कर्स के पास राशन कार्ड नहीं है। इसलिए उन्हें नि: शुल्क राशन की व्यवस्था की जाए। जो किराये से रह रही हैं, उनका तीन महीने का किराया माफ कराया जाए। किसी नरक से कम नहीं है इनकी जिंदगी..देखिए तस्वीरें..
 

इन लड़कियों के लिए लॉकडाउन घर चलाने में दिक्कत पैदा कर रही है।

इन लड़कियों के लिए लॉकडाउन घर चलाने में दिक्कत पैदा कर रही है।

रेड लाइट एरिया में कई लड़कियां ऐसी हैं, जिन्हें यहां बेचा गया है।

रेड लाइट एरिया में कई लड़कियां ऐसी हैं, जिन्हें यहां बेचा गया है।

यह तस्वीर सेक्स वर्कर्स की कैद जिंदगी को दिखाती है।

यह तस्वीर सेक्स वर्कर्स की कैद जिंदगी को दिखाती है।

सेक्स वर्कर्स की हालत सुधारने सरकारीस्तर पर लगातार प्रयास हो रहे हैं।

सेक्स वर्कर्स की हालत सुधारने सरकारीस्तर पर लगातार प्रयास हो रहे हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग के चलते ये सेक्स वर्कर्स अभी क्लाइंट नहीं ले रही हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग के चलते ये सेक्स वर्कर्स अभी क्लाइंट नहीं ले रही हैं।

कोई भी लड़की स्वेच्छा से सेक्स वर्कर नहीं बनती। मजबूरी उसे इन कोठों पर ले आती है।

कोई भी लड़की स्वेच्छा से सेक्स वर्कर नहीं बनती। मजबूरी उसे इन कोठों पर ले आती है।

सेक्स वर्कर्स की जिंदगी किसी नरक से कम नहीं है।

सेक्स वर्कर्स की जिंदगी किसी नरक से कम नहीं है।

यह तस्वीर मुंबई के रेड लाइट एरिया की है।

यह तस्वीर मुंबई के रेड लाइट एरिया की है।

इन दिनों वे दूसरों की मदद से घर खर्च चला पा रही हैं।

इन दिनों वे दूसरों की मदद से घर खर्च चला पा रही हैं।

कोरोना संक्रमण के चलते अब उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।

कोरोना संक्रमण के चलते अब उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।

ज्यादातर सेक्स वर्कर्स बेहद खराब हालत में रहती हैं।

ज्यादातर सेक्स वर्कर्स बेहद खराब हालत में रहती हैं।

सेक्स वर्कर्स की जिंदगी को बेहतर करने सरकार के अलावा कई सामाजिक संगठन काम कर रहे हैं।

सेक्स वर्कर्स की जिंदगी को बेहतर करने सरकार के अलावा कई सामाजिक संगठन काम कर रहे हैं।

ये वो महिलाएं हैं, जो किन्हीं बुरे हालात में सेक्स वर्कर बनीं।

ये वो महिलाएं हैं, जो किन्हीं बुरे हालात में सेक्स वर्कर बनीं।

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