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कोरोना के कहर में 3 दिन से पड़ीं लाशें सड़ चुकी, विचलित करने वाली तस्वीरें देखकर अब तो अलर्ट हो जाइए!

First Published Apr 19, 2021, 4:26 PM IST
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वलसाड (गुजरात). कोरोना वायरस ऐसे दिन दिखा रहा है जो शायद किसी ने अपनी जिंदगी में कभी देखे होंगे। महामारी थमने की बजाय क्रूर होती जा रही है। सबसे बुरे हालात गुजरात के हैं, जहां लोगों की मौत के बाद श्मशान तक नसीब नहीं हो पा रहा है। शव जानवरों की तरह पड़े हैं कोई उनकी देखरेख तक करने वाला नहीं है। लोगों को चिता जलाने के लिए मिन्नतें करनी पड़ रही हैं। ऐसी एक दिल दहला देने वाली तस्वीर राज्य के वलसाड से सामने आई है, जहां अस्पतालों के कमरे में बिखरी लाशें पड़ी हैं। आलम यह हो गया है कि शवों से दुर्गंध आने लगी है। निगम के कर्मचारी बदवू नहीं आए इसलिए उनपर परफ्यूम छिड़क रहे हैं। देखिए तस्वीरें जो सिखाती हैं सभंलना..


दरअसल, यह डरावनी तस्वीर वलसाड के जिला सिविल अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड की है। जहां पिछले तीन से शव इस तरह से  पोस्टमार्टम रूम में बिखरे पड़े हुए हैं। श्मशान फुल होने की वजह से उनका नंबर नहीं आ पा रहा है। यकीन मानिए ये तस्‍वीर ये बताने के लिए काफी हैं कि देश में कोरोना की दूसरी लहर कितनी खतरनाक है। लेकिन इस भयानक मंजर से निकला जा सकता है, अगर आप सावधान रहें, कोरोना गाइडलाइन का पालन करें तो कोरोना आपका कुछ नहीं बिगड़ पाएगा।
 


दरअसल, यह डरावनी तस्वीर वलसाड के जिला सिविल अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड की है। जहां पिछले तीन से शव इस तरह से  पोस्टमार्टम रूम में बिखरे पड़े हुए हैं। श्मशान फुल होने की वजह से उनका नंबर नहीं आ पा रहा है। यकीन मानिए ये तस्‍वीर ये बताने के लिए काफी हैं कि देश में कोरोना की दूसरी लहर कितनी खतरनाक है। लेकिन इस भयानक मंजर से निकला जा सकता है, अगर आप सावधान रहें, कोरोना गाइडलाइन का पालन करें तो कोरोना आपका कुछ नहीं बिगड़ पाएगा।
 


सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट अमित शाह ने बताया कि यहां कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, मृतकों का डेथ सर्टिफिकेट जुरूरी है। इसलिए शव घटों इस तरह पड़े रहते हैं।


सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट अमित शाह ने बताया कि यहां कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, मृतकों का डेथ सर्टिफिकेट जुरूरी है। इसलिए शव घटों इस तरह पड़े रहते हैं।


वलसाड सिविल अस्पताल के बाहर मृतकों के परिजन शव लेने और अपनों का आखिरी बार चेहरा देखने के लिए घंटों खड़े रहते हैं। लेकिन उनको बस यही जवाब मिलता है रुकिए। आखिरी दर्शन के लिए 24 से 36 घंटे बाद हो पाते हैं।


वलसाड सिविल अस्पताल के बाहर मृतकों के परिजन शव लेने और अपनों का आखिरी बार चेहरा देखने के लिए घंटों खड़े रहते हैं। लेकिन उनको बस यही जवाब मिलता है रुकिए। आखिरी दर्शन के लिए 24 से 36 घंटे बाद हो पाते हैं।

जलती चिता की यह तस्वीर मध्य प्रदेश की राजधनी भोपाल की है, जहां रविवार के दिन 112 लाशें कोरोना के कहर के बाद जलाई गईं। सभी शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। शहर में कोरोना बेकाबू होता जा रहा है। इसके बाद भी लोग अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं। मास्क और दूरी नहीं बना रहे।

जलती चिता की यह तस्वीर मध्य प्रदेश की राजधनी भोपाल की है, जहां रविवार के दिन 112 लाशें कोरोना के कहर के बाद जलाई गईं। सभी शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। शहर में कोरोना बेकाबू होता जा रहा है। इसके बाद भी लोग अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं। मास्क और दूरी नहीं बना रहे।

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