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कबाड़ से कमाल: देसी जुगाड़ के कुछ ऐसे आविष्कार, जिन्हें देखकर इंजीनियर भी सोच में पड़ जाते हैं

First Published Sep 14, 2020, 5:17 PM IST
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भोपाल, मध्य प्रदेश. देश-दुनिया में रोज कुछ न कुछ आविष्कार होते रहते हैं। छोटे और बड़े स्तर पर। अगर बात मशीनरी या ऐसी ही किसी चीज से जुड़ी इंजीनियरिंग की है, तो लोग आधुनिक तकनीक से लैस चीजों को तरजीह देते हैं। लेकिन जब कभी उनके सामने देसी जुगाड़(Desi Jugaad Science) से निर्मित सस्ती और कमाल की उपयोग चीजें सामने आती हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं। यहां हम आपको ऐसे लोगों से मिलवा रहे हैं, जिनके पास किसी भी तरह की इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं है। लेकिन उन्होंने ऐसे-ऐसे आविष्कार किए, जो मिसाल बनकर सामने आए। इंजीनियर डे-15 सितंबर( Engineer Day) के मद्देनजर हम आपको खेती-किसानी से जुड़ीं कुछ देसी जुगाड़ से बनीं मशीनों या चीजों के बारे में बता रहे हैं। चूंकि हमारा देश कृषि प्रधान है, इसलिए ये चीजें बहुत उपयोगी हैं।

यह मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर का है। निंबोला क्षेत्र के एक किसान के तीन बेटों ने बेकार पड़े पाइपों के जरिये धमाका बंदूक बना दी। दरअसल, किसान खेतों में सूअर और अन्य जानवरों के घुसने से परेशान था।  हर साल उसकी लाखों की फसल खराब हो जाती थी। पटाखे आदि काम नहीं करते थे। इस बंदूक से ऐसा धमाका होता है कि जानवर डरके भाग जाते हैं। बता दें कि यह बंदूक बनाने वाले मनोज जाधव 8वीं, पवन जाधव 7वीं  तक पढ़े हैं। सिर्फ जितेंद्र पवार ग्रेजुएट हैं। इसकी आवाज 2 किमी तक सुनाई पड़ती है।
 

यह मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर का है। निंबोला क्षेत्र के एक किसान के तीन बेटों ने बेकार पड़े पाइपों के जरिये धमाका बंदूक बना दी। दरअसल, किसान खेतों में सूअर और अन्य जानवरों के घुसने से परेशान था।  हर साल उसकी लाखों की फसल खराब हो जाती थी। पटाखे आदि काम नहीं करते थे। इस बंदूक से ऐसा धमाका होता है कि जानवर डरके भाग जाते हैं। बता दें कि यह बंदूक बनाने वाले मनोज जाधव 8वीं, पवन जाधव 7वीं  तक पढ़े हैं। सिर्फ जितेंद्र पवार ग्रेजुएट हैं। इसकी आवाज 2 किमी तक सुनाई पड़ती है।
 

यह मामला यूपी के चित्रकूट में रहने वाले दो भाइयों सुरेश चंद्र(49) और रमेश चंद्र मौर्य(45) से जुड़ा है। मऊ तहसील के ग्राम उसरीमाफी के रहने वाले इन भाइयों ने ट्रैक्टर का काम करने वाली सस्ती मशीन बनाई है। इसे 'किसान पॉवर-2020' नाम दिया है। ये दोनों भाई मूर्तियां और गमले बनाते थे। फिर किसानों की समस्या देखकर मशीन बनाने का आइडिया आया। जो गरीब किसान ट्रैक्टर नहीं खरीद सकते...उनके लिए यह मशीन फायदेमेंद है।

यह मामला यूपी के चित्रकूट में रहने वाले दो भाइयों सुरेश चंद्र(49) और रमेश चंद्र मौर्य(45) से जुड़ा है। मऊ तहसील के ग्राम उसरीमाफी के रहने वाले इन भाइयों ने ट्रैक्टर का काम करने वाली सस्ती मशीन बनाई है। इसे 'किसान पॉवर-2020' नाम दिया है। ये दोनों भाई मूर्तियां और गमले बनाते थे। फिर किसानों की समस्या देखकर मशीन बनाने का आइडिया आया। जो गरीब किसान ट्रैक्टर नहीं खरीद सकते...उनके लिए यह मशीन फायदेमेंद है।

पंजाब के कपूरथला के नानो मल्लियां गांव के किसान जगतार सिंह जग्गा ने देसी जुगाड़ से यह मशीन बनाई है। यह एक दिन में 100 एकड़ में बगैर मजदूरों के धान बो सकती है। यह मशीन ट्रैक्टर के साथ चलाई जाती है।  आगे पढ़ें एक ऐसे किसान की कहानी..जिसकी देसी इंजीनियरिंग का लोग लोहा मानने लगे हैं...

पंजाब के कपूरथला के नानो मल्लियां गांव के किसान जगतार सिंह जग्गा ने देसी जुगाड़ से यह मशीन बनाई है। यह एक दिन में 100 एकड़ में बगैर मजदूरों के धान बो सकती है। यह मशीन ट्रैक्टर के साथ चलाई जाती है।  आगे पढ़ें एक ऐसे किसान की कहानी..जिसकी देसी इंजीनियरिंग का लोग लोहा मानने लगे हैं...

चित्तौड़गढ़, राजस्थान. दिमाग शॉर्प हो, तो कबाड़े का भी सदुपयोग किया जा सकता है। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं। नारायण ने एक मीडिया को बताया था कि जब वे 12 साल के थे, तब से खेतों पर जाने लगे थे। 12वीं की पढ़ाई के बाद वे खेती-किसानी के लिए उपकरण बनाने लगे। नील गायें किसानों के लिए बड़ी समस्या होती हैं। उन्हें मारकर भगाने का दिल नहीं करता। इसे ध्यान में रखकर नारायण ने यह उपकरण बनाया।  आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

चित्तौड़गढ़, राजस्थान. दिमाग शॉर्प हो, तो कबाड़े का भी सदुपयोग किया जा सकता है। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं। नारायण ने एक मीडिया को बताया था कि जब वे 12 साल के थे, तब से खेतों पर जाने लगे थे। 12वीं की पढ़ाई के बाद वे खेती-किसानी के लिए उपकरण बनाने लगे। नील गायें किसानों के लिए बड़ी समस्या होती हैं। उन्हें मारकर भगाने का दिल नहीं करता। इसे ध्यान में रखकर नारायण ने यह उपकरण बनाया।  आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

देसी जुगाड़ से बनाया गया यह उपकरण ऐसी आवाज करता है कि नील गायें खेतों से भाग खड़ी होती हैं। नारायण का यह उपकरण काफी सुर्खियों में है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

देसी जुगाड़ से बनाया गया यह उपकरण ऐसी आवाज करता है कि नील गायें खेतों से भाग खड़ी होती हैं। नारायण का यह उपकरण काफी सुर्खियों में है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

नारायण के देसी जुगाड़ की यह छोटी सी चीज खरपतवार उखाड़ने के काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

नारायण के देसी जुगाड़ की यह छोटी सी चीज खरपतवार उखाड़ने के काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

फसल को साफ करने वाली यह छलनी नारायण ने घर पर ही घी के कनस्तर को काटकर तैयार कर ली।

आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

फसल को साफ करने वाली यह छलनी नारायण ने घर पर ही घी के कनस्तर को काटकर तैयार कर ली।

आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

कपास की फसल को उखाड़ना कठिन होता है। नारायण का यह उपकरण पौधे को पकड़कर आसानी से जमीन से उखाड़ देता है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

कपास की फसल को उखाड़ना कठिन होता है। नारायण का यह उपकरण पौधे को पकड़कर आसानी से जमीन से उखाड़ देता है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

नारायण की देसी जुगाड़ से बनी यह मशीन भारी वजन उठाकर ले जाने में काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

नारायण की देसी जुगाड़ से बनी यह मशीन भारी वजन उठाकर ले जाने में काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

कीड़े-मकोड़े भगाने के लिए नारायण ने लैंपनुमा यह मशीन तैयार की है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

कीड़े-मकोड़े भगाने के लिए नारायण ने लैंपनुमा यह मशीन तैयार की है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

छोटी-मोटी निंदाई-गुड़ाई के लिए यह छोटी की गाड़ी बड़े काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

छोटी-मोटी निंदाई-गुड़ाई के लिए यह छोटी की गाड़ी बड़े काम आती है। आगे देखिए इसी युवा के आविष्कार..

नारायण के पिता का इनके जन्म से पहले ही हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इनकी परवरिश मां सीतादेवी ने अकेले की। इनकी दो जुड़वां बहने हैं।

नारायण के पिता का इनके जन्म से पहले ही हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इनकी परवरिश मां सीतादेवी ने अकेले की। इनकी दो जुड़वां बहने हैं।

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