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कितना दर्द हुआ होगा 2 साल के सुजीत को, हे भगवान! किसी और बच्चे को ऐसे ना तड़पने देना
त्रिची. दिल दहलाने वाली यह कहानी 2 साल के सुजीत विल्सन की है। जो बोरवेल में 25 फीट नीचे फंसकर तड़पता रहा। इस मासूम बच्चे पर क्या बीती होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं कर सकता। काश! लोग पहले भी हुई इस तरह की घटनाओं से सबक लेते और बोरवेल खुला न छोड़ते, तो इस बच्चे को यूं तड़प-तड़पके नहीं मरना पड़ता। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के त्रिची शहर के नाडुकाटुपत्ती गांव का रहने वाला सुजीत 25 अक्टूबर को शायद खेलते वक्त बोरवेल में गिर गया था। मासूम करीब 80 घंटे तक मौत के कुएं में फंसा रहा। वो असहाय था। न हिल सकता था, न कुछ देख सकता था। उसकी आवाजें भी धीरे-धीरे दम तोड़ती गईं। रेस्क्यू करके जब उसे बाहर निकाला गया, तब तक वो अपनी जिंदगी हार चुका था। मासूम विल्सन की मौत ने समूचे तमिलनाडु को हिलाकर रख दिया है। बुधवार को त्रिची में स्कूली बच्चों ने मुखौटा पहनकर सुजीत को श्रद्धांजलि दी। मुखौटा, इसलिए ताकि लोगों के मुखौटे उतरें और वे अपनी लापरवाही से किसी की मौत का कारण न बनें। सुजीत की मौत ने लोगों को गहरा सदमा दिया है। उसे श्रद्धांजलि देते वक्त लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे।
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सुजीत की मौत की खबर ने लोगों को बेहद भावुक कर दिया है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। मासूम को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। जब सुजीत का बचाने रेस्क्यू किया जा रहा था, तब पूरे देश में उसकी सलामती के लिए दुआएं की जा रही थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सुजीत की जिंदगी के लिए प्रार्थना की थी। अफसोस, बच्चे को नहीं बचाया जा सका।
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बुधवार को सुजीत को स्कूली बच्चों ने मुखौटा पहनकर श्रद्धांजलि दी। इस मकसद था कि बोरवेल खुला छोड़ने वाले लापरवाह लोग अपना मुखौटा उतारें। इन बच्चों के मुखाटों के पीछे के दर्द को समझें। गौरतलब है कि सुजीत का रेस्क्यू ऑपरेशन बहुत कठिन था। दरअसल, बोरवेल के आसपास चट्टानें थीं। उन्हें तोड़ने में मुश्किलें आईं। सुजीत 6 इंच चौड़े बोरवेल में फंसा था। रेस्क्यू का काम करीब 280-500 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जारी था। मगर सफलता नहीं मिली।
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80 घंटे बाद जब सुजीत को बाहर निकाला गया, तब वो मर चुका था। एएनआई ने एक सरकारी अधिकारी जे राधाकृष्णन के हवाले से बताया था कि बच्चे का शरीर डिकंपोज्ड होने लगा था। बोरवेल से दुर्गंध आने लगी थी। दुर्भाग्य रहा कि NDRF के अलावा SDRF की फोर्स लगातार काम करती रही, पर सुजीत बोरवेल से जिंदा नहीं निकल सका।
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14 साल के ग्रैंडमास्टर आर प्रागनानंदा सुजीत को श्रद्धांजलि देते हुए। प्रागनानंद ने हाल में वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप मे जीता अपना मेडल सुजीत को समर्पित किया।
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अपने परिवार के साथ मासूम सुजीत। अपने बच्चे को खोने का दर्द मां-बाप जिंदगीभर नहीं भूल सकेंगे। अब वे यही कामना करते हैं कि ऐसा किसी दूसरे बच्चे के साथ न हो।
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