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गुजरात में कोरोना का खतरनाक रूप: 24 घंटे जल रहीं चिताएं, एडवांस में खुद रहीं कब्र..कम पड़ने लगे कफन
सूरत. गुजरात में कोरोना की भयावह स्थिति है। महामारी की दूसरी लहर ने खतरनाक रूप ले लिया है। अहमदाबाद से लेकर गांधीनगर और राजकोट से लेकर बड़ोदरा के सभी बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड फुल हो चुके हैं। वहीं सूरत में तो कोरोना इस कदर कहर बरपा रही है कि यहां रोजाना 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। श्मशान घाटों में दिन-रात 24 घंटे अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके बाद भी कई लोगों को अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। आलम यह हो गया है कि चिताओं की गर्मी से भट्ठियों की चिमनियां तक पिघलने लगी हैं। इतना ही नहीं जिस दिन शव ज्यादा आ जाते हैं तो आसपास के शहरों में शव भेज दिए जाते हैं। पुराने विश्रामघाटों को भी फिर से चालू कर दिया गया है।

यह तस्वीर मोरा भागल के कब्रिस्तान की है, जहां कोरोना के प्रकोप को देखते हुए 25 से 30 कब्र पहले से ही खोद दी गई हैं। ताकि उनको सही से जमीन के अंदर दफन किया जा सके। सूरत में तीन कब्रिस्तान हैं, जहां औसतन सामान्य दिनों में दो से तीन शव आते थे, लेकिन अब रोजाना 10 से 12 शव आ रहे हैं। आलम यह हो गया है कि अब कफन भी कम पड़ने लगे हैं। क्योंकि शहर में लॉकडाउन की वजह से दुकाने पहले से ही बंद है।
दरअसल, सबसे ज्यादा बुरी हालत शहर के अश्विनी कुमार और रामनाथ घेला श्मशान घाट की है। जहां दर्जनों शव घंटों से कतार में हैं। परिजन इंतजार करते हैं कि कब उनका नंबर आए और वह अंतिम संस्कार कर सकें। यहां के विश्रामघाट प्रमुख हरीशभाई उमरीगर का कहना है कि रोजाना 100 से ज्यादा लाशें जलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मैंने अपने पूरे जीवनकाल में इतना भयानक मंजर कभी नहीं देखा। जिन श्मशान घाटों में दिन में 10 से 12 लोगों का अंतिम संस्कार होता था अब वहां पर लाशें ही लाशें दिख रही हैं। परिजनों को मरने वाले का चेहरा देखने का नसीब भी नहीं मिल पा रहा है। वह दूर से ही चिता चलते देख प्रणाम कर लेते हैं।
सूरत में महामारी का इतना ज्यादा प्रकोप बढ़ गया है कि शवों को लाने वाली मुर्दाघर की गाड़ियों की कमी आने लगी है। एक वाहन में कई शव ढोए जा रहे हैं। शव वाहन एक साथ कई शवों को लेकर निकलते हैं और उन्हें अलग-अलग श्मशाट घाट पर उतारते हुए चलते बनते हैं। सूरत में रहने वाले लोगों का कहना है कि इतना बुरा वक्त हमने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा।
बता दें कि पिछले हफ्ते सूरत में मरने वालों का सिलसिला इतना ज्यादा था कि एक मुक्तिधाम में दो घंटे के भीत 40 शव पहुंचो हुए थे।। यानि हर 15 मिनट में ही 3 एंबुलेंस में 9 शव लाए गए। वहीं दसूरी एंबुलेंस 6 शव रखाकर आए। इन शवों की चिता जलाने के लिए जगह कम पड़ गई।
कई ऐसे शव भी श्मशान आ रहे हैं जिनका कोई पता तक नहीं चल पा रहा है। मृतकों के परिजनों का कोई पता है। वहीं कुछ ऐसे भी शव आ रहे हैं जहां परिजनों यह पता ही नहीं चल रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है।
यह तस्वीर सूरत शहर के अश्विनी कुमार और रामनाथ घेला श्मशान घाट की है, जहां चिताओं की गर्मी से भट्ठियों की चिमनियां तक पिघल गई हैं। इनकी हालत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रोज कितने लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
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