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गुजरात में कोरोना प्रकोप चरम पर: हर 20 मिनट में मौत, अस्पताल में हो रहे यज्ञ..ऐंबुलेंस में थम रहीं सांसे

First Published Apr 14, 2021, 12:26 PM IST
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सूरत. गुजरात में कोरोना वायरस इतनी तेजी से पैर पसार रहा है कि हालात संभाले नहीं संभल रहे हैं। राज्य सरकार के सारे प्रयासों को कोई सफलाता नहीं मिल रही है। महामारी यहां पर चरम पर पहुंच चुकी है। रोज मौतों और संक्रमित मरीजों का नया रिकॉर्ड बना रहा है। अब तो आलम यह हो गया है कि हर 20 मिनट में एक की जान जा रही है, यानि एक घंटे में तीन लोगों की सांसे उखड़ रही हैं। वहीं हर एक मिनट में चार लोग महामारी की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं। ऐंबुलेंस में ही इलाज किया जाने लगा है। श्मशान घाटों में दिन-रात 24 घंटे अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके बाद भी लाशों का ढेर लगा हुआ है।

सबसे ज्यादा बुरी हालत गुजरात के सूरत शहर की है, जहां पर कोरोना इस कदर कहर बरपा रहा है कि यहां रोजाना 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। यहां पर एक सरकारी अस्पताल में कोरोना से बचने के लिए यज्ञ का किया गया। आर्य समाज के लोगों ने अस्पताल में ही यह हवन किया उनका कहना है कि  उन्हें अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यज्ञ करने के लिए कहा गया था। डॉक्टरों ने कहा कि अब तो भगवान ही हमें बचा सकता है।

सबसे ज्यादा बुरी हालत गुजरात के सूरत शहर की है, जहां पर कोरोना इस कदर कहर बरपा रहा है कि यहां रोजाना 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। यहां पर एक सरकारी अस्पताल में कोरोना से बचने के लिए यज्ञ का किया गया। आर्य समाज के लोगों ने अस्पताल में ही यह हवन किया उनका कहना है कि  उन्हें अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यज्ञ करने के लिए कहा गया था। डॉक्टरों ने कहा कि अब तो भगवान ही हमें बचा सकता है।

अहमदाबाद में इस रफ्तार से मामले सामने आ रहे हैं कि यहां के सबसे बड़े 1200 बेड वाले अस्पताल में जगह नहीं बची है। बाहर एंबुलेंस की लंबी लाइन लगी हुई हैं, जिनमें मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं। डॉक्टर और नर्स यहीं पर उनका इलाज करने में जुटे हुए हैं।
 

अहमदाबाद में इस रफ्तार से मामले सामने आ रहे हैं कि यहां के सबसे बड़े 1200 बेड वाले अस्पताल में जगह नहीं बची है। बाहर एंबुलेंस की लंबी लाइन लगी हुई हैं, जिनमें मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं। डॉक्टर और नर्स यहीं पर उनका इलाज करने में जुटे हुए हैं।
 


कई ऐसे शव भी श्मशान आ रहे हैं जिनका कोई पता तक नहीं चल पा रहा है। मृतकों के परिजनों का कोई पता है। वहीं कुछ ऐसे भी शव आ रहे हैं जहां परिजनों यह पता ही नहीं चल रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है।


कई ऐसे शव भी श्मशान आ रहे हैं जिनका कोई पता तक नहीं चल पा रहा है। मृतकों के परिजनों का कोई पता है। वहीं कुछ ऐसे भी शव आ रहे हैं जहां परिजनों यह पता ही नहीं चल रहा था कि उनके रिश्तेदार का शव कौन सा है।


सूरत में महामारी का इतना ज्यादा प्रकोप बढ़ गया है कि शवों को लाने वाली मुर्दाघर की गाड़ियों की कमी आने लगी है। एक वाहन में कई शव ढोए जा रहे हैं। शव वाहन एक साथ कई शवों को लेकर निकलते हैं और उन्हें अलग-अलग श्मशाट घाट पर उतारते हुए चलते बनते हैं। सूरत में रहने वाले लोगों का कहना है कि इतना बुरा वक्त हमने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा।
 


सूरत में महामारी का इतना ज्यादा प्रकोप बढ़ गया है कि शवों को लाने वाली मुर्दाघर की गाड़ियों की कमी आने लगी है। एक वाहन में कई शव ढोए जा रहे हैं। शव वाहन एक साथ कई शवों को लेकर निकलते हैं और उन्हें अलग-अलग श्मशाट घाट पर उतारते हुए चलते बनते हैं। सूरत में रहने वाले लोगों का कहना है कि इतना बुरा वक्त हमने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा।
 

बता दें कि पिछले हफ्ते सूरत में मरने वालों का सिलसिला इतना ज्यादा था कि एक मुक्तिधाम में दो घंटे के भीत 40 शव पहुंचो हुए थे।। यानि हर 15 मिनट में ही 3 एंबुलेंस में 9 शव लाए गए। वहीं दसूरी एंबुलेंस 6 शव रखाकर आए। इन शवों की चिता जलाने के लिए जगह कम पड़ गई।

बता दें कि पिछले हफ्ते सूरत में मरने वालों का सिलसिला इतना ज्यादा था कि एक मुक्तिधाम में दो घंटे के भीत 40 शव पहुंचो हुए थे।। यानि हर 15 मिनट में ही 3 एंबुलेंस में 9 शव लाए गए। वहीं दसूरी एंबुलेंस 6 शव रखाकर आए। इन शवों की चिता जलाने के लिए जगह कम पड़ गई।

यह तस्वीर मोरा भागल के कब्रिस्तान की है, जहां कोरोना के प्रकोप को देखते हुए 25 से 30 कब्र पहले से ही खोद दी गई हैं। ताकि उनको सही से जमीन के अंदर दफन किया जा सके। सूरत में तीन कब्रिस्तान हैं, जहां औसतन सामान्य दिनों में दो से तीन शव आते थे, लेकिन अब रोजाना 10 से 12 शव आ रहे हैं। आलम यह हो गया है कि अब कफन भी कम पड़ने लगे हैं। क्योंकि शहर में लॉकडाउन की वजह से दुकाने पहले से ही बंद है।

यह तस्वीर मोरा भागल के कब्रिस्तान की है, जहां कोरोना के प्रकोप को देखते हुए 25 से 30 कब्र पहले से ही खोद दी गई हैं। ताकि उनको सही से जमीन के अंदर दफन किया जा सके। सूरत में तीन कब्रिस्तान हैं, जहां औसतन सामान्य दिनों में दो से तीन शव आते थे, लेकिन अब रोजाना 10 से 12 शव आ रहे हैं। आलम यह हो गया है कि अब कफन भी कम पड़ने लगे हैं। क्योंकि शहर में लॉकडाउन की वजह से दुकाने पहले से ही बंद है।

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