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कोरोना से बचने के लिए लोग लगा रहे गोबर, फिर दूध से नहाते..ऐसे खत्म होगा संक्रमण?..डॉक्टर ने दी यह सलाह

First Published May 12, 2021, 4:38 PM IST
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अहमदाबाद (गुजरात). भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने तबाही मचाकर रखी है। लाखों लोग अब तक मौत के मुंह में समा चुके हैं, कई परिवार के परिवार उजड़ गए। शहरों के बाद अब यह महामारी गांवों में पैर पसारने लगी है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग और वैक्सीन के अलावा ऐसी कोई चीज नहीं है जिसकी दम पर इस संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके बाद भी कुछ लोग टोटके के जरिये कोरोना खत्म करना चाहते हैं। डॉक्टर और विशेषज्ञ के मना करने के बाद यह लोग गोबर और गोमूत्र की दम इस वायरस को खत्म करने में लगे हुए हैं। गुजरात से ऐसी ही कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जो दिखाती हैं कि लोग किस कदर अंधविश्वास में डूब चुके हैं। देखिए हैरान कर देने वाली फोटोज...
 


दरअसल, यह हैरान कर देने वाली यह तस्वीरें अहमदाबाद शहर की हैं, जहां लोग इस तरह गोबर और गोमूत्र का लेप लगवाने के लिए गौशालाओं में जा रहे हैं। इन लोगों का मानना है कि गोबर मलने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और हम पर वायरस का अटैक नहीं होगा। अगर संक्रमित होते भी हैं तो कुछ नहीं होगा। 
 


दरअसल, यह हैरान कर देने वाली यह तस्वीरें अहमदाबाद शहर की हैं, जहां लोग इस तरह गोबर और गोमूत्र का लेप लगवाने के लिए गौशालाओं में जा रहे हैं। इन लोगों का मानना है कि गोबर मलने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और हम पर वायरस का अटैक नहीं होगा। अगर संक्रमित होते भी हैं तो कुछ नहीं होगा। 
 


सोमवार के दिन अहमदाबाद के श्री स्वामीनारायण गुरुकुल विश्वविद्या प्रतिष्ठानम की गौशाला में कोरोना से लड़ने की ऐसी थैरपी दी गई। जिसमें काफी संख्या में शहर के लोग शामिल हुए थे। यहां आने वाले लोग अपने शरीर पर गौमूत्र और गोबर का लेप करते हैं और फिर उसके सूखने का इंतजार करते हैं। इसके बाद वह गायों को गले लगाते हैं और योगासन करते हैं।
 


सोमवार के दिन अहमदाबाद के श्री स्वामीनारायण गुरुकुल विश्वविद्या प्रतिष्ठानम की गौशाला में कोरोना से लड़ने की ऐसी थैरपी दी गई। जिसमें काफी संख्या में शहर के लोग शामिल हुए थे। यहां आने वाले लोग अपने शरीर पर गौमूत्र और गोबर का लेप करते हैं और फिर उसके सूखने का इंतजार करते हैं। इसके बाद वह गायों को गले लगाते हैं और योगासन करते हैं।
 


एसजीवीपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि उनकी  गोशालाओं में कई डॉक्टर्स भी आते हैं। जो इस तरह से गोबर का लेप लगाते हैं। उनका भी मानना है कि गायों के गोबर और मूत्र से इम्युनिटी बेहतर होती है और वे इसके बाद वह आराम से कोरोना के मरीजों का इलाज बड़ी आसानी से कर पाते हैं। 
 


एसजीवीपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि उनकी  गोशालाओं में कई डॉक्टर्स भी आते हैं। जो इस तरह से गोबर का लेप लगाते हैं। उनका भी मानना है कि गायों के गोबर और मूत्र से इम्युनिटी बेहतर होती है और वे इसके बाद वह आराम से कोरोना के मरीजों का इलाज बड़ी आसानी से कर पाते हैं। 
 


श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की तरफ से बताया गया कि उनकी इस गौशाला में 200 से ज्यादा गाय हैं। जहां शहर ही नहीं दूसरे शहरों से भी लोग   शरीर पर गाय के गोबर और गोमूत्र का लेप लगवाने आते हैं। जिसको बाद में इसे गाय के दूध से धो दिया जाता है।
 


श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की तरफ से बताया गया कि उनकी इस गौशाला में 200 से ज्यादा गाय हैं। जहां शहर ही नहीं दूसरे शहरों से भी लोग   शरीर पर गाय के गोबर और गोमूत्र का लेप लगवाने आते हैं। जिसको बाद में इसे गाय के दूध से धो दिया जाता है।
 


वहीं दूसरी तरह कई डॉक्टर इन लोगों को चेतावनी दे चुके हैं कि इससे संक्रमण दूर नहीं होगा, बल्कि आप नई बीमारी को बुला रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह से गोबर और गोमूत्र का लेप लगाने से म्यूकोरमाइकोसिस समेत दूसरी तरह के संक्रमण हो सकते हैं। इससे लोगों की जान भी जा सकती है।
 


वहीं दूसरी तरह कई डॉक्टर इन लोगों को चेतावनी दे चुके हैं कि इससे संक्रमण दूर नहीं होगा, बल्कि आप नई बीमारी को बुला रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह से गोबर और गोमूत्र का लेप लगाने से म्यूकोरमाइकोसिस समेत दूसरी तरह के संक्रमण हो सकते हैं। इससे लोगों की जान भी जा सकती है।
 


वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नेशनल प्रेसीडेंट डॉक्टर जेए जयलाल ने बताया कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि गाय के गोबर या गौमूत्र के लेप से इम्युनिटी बढ़ती है। ये पूरी तरह से गलत है, इसलिए ऐसी चीजों से दूर रहिए। यह चीजें सिर्फ आस्था पर आधारित हैं।


वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नेशनल प्रेसीडेंट डॉक्टर जेए जयलाल ने बताया कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि गाय के गोबर या गौमूत्र के लेप से इम्युनिटी बढ़ती है। ये पूरी तरह से गलत है, इसलिए ऐसी चीजों से दूर रहिए। यह चीजें सिर्फ आस्था पर आधारित हैं।

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