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जुगाड़ से कमाल: बच्चे जब रूठ गए, तो पिताओं ने कबाड़ से बना दीं ये वंडर कारें
पुणे/हजारीबाग. कबाड़ की जुगाड़ से बहुत कुछ बनाया जा सकता है। इन दो पिताओं ने देसी जुगाड़ से अपने बच्चों के लिए खिलौना कार बना दी। देसी जुगाड़ के इन आविष्कारों ने न सिर्फ 'मेड इन इंडिया' को बढ़ावा दिया, बल्कि चीनी खिलौनों के बहिष्कार को भी बल दिया। एक मामला पुणे से जुड़ा है, जबकि दूसरा झारखंड के हजाीबाग से। बता दें कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने 'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर दिया था। यानी इसमें चीनी खिलौनों के बजाय स्वेदशी खिलौनों तैयार करने की बात छुपी हुई थी। आइए जानते हैं इन पिताओं की कहानी, जिन्होंने बच्चों के लिए जुगाड़ से कारें बना दीं..

पहली तस्वीर पुणे के हसन शेख की बनाई खिलौना कार की है। हसन की 6 साल की बेटी एंजलिना ने कहीं कोई खिलौना कार देखी थी। उसने ऐसी ही कार के लिए जिद पकड़ ली। हसन ने मार्केट में पूछताछ की, तो मालूम चला कि ऐसी खिलौना कारें चीन से आती हैं। चूंकि मोदी स्वदेशी खिलौनों की बात कह चुके थे, इसलिए हसन दुविधा में फंस गए। आगे पढ़ें इसी खिलौना कार के बारे में...
हसन एक कार मैकेनिक हैं। उन्होंने चीनी खिलौना कार खरीदने के बजाय बेटी के लिए खुद कार बनाने का फैसला किया। इस कोशिश उनके पिता भी शामिल हो गए। आगे पढ़ें इसी खिलौना कार के बारे में...
हसन ने गैराज में कबाड़ पड़ा एक स्कूटर का इंजन दुरुस्त किया। फिर कबाड़ सामान की जोड़-तोड़ से लाल रंग की यह खिलौना कार तैयार कर दी। यह कार 40 किमी/लीटर का माइलेज देती है। आगे पढ़ें इसी खिलौना कार के बारे में..
हसन को इस बार के निर्माण में करीब 4 महीने लगे। इस पर करीब 40 हजार रुपए का खर्च आया। चीनी खिलौना कारें 10 से 20 हजार रुपए में मिल जाती हैं, लेकिन वे टिकाऊ नहीं होतीं। वे प्लास्टिक से बनी होती हैं। हसन ने यह खिलौना कार मेटल से बनाई है। आगे पढ़ें इसी खिलौना कार के बारे में..
हसन की यह खिलौना कार 50 किमी की स्पीड से दौड़ सकती है। यह 100 किलोग्राम तक का वजन ढो सकती है। यह कार पाकर उनकी बेटी फूली नहीं समाई। हसन भी खुश हैं कि उन्होंने चीनी खिलौना कार के बजाय स्वदेशी कार बनाई। आगे पढ़ें-मोदी के 'मन की बात' कल्लू मिस्त्री के दिल को छू गई और बेटे के लिए बना दिया गजब खिलौना
हजारीबाग, झारखंड. भारत में चीनी खिलौनों (Chinese toys) का बड़ा मार्केट रहा है। इसे देखते हुए मोदी ने खिलौनों में भी आत्मनिर्भर होने की बात कही थी। हजारीबाग के रहने वाले अलाउद्दीन उर्फ कल्लू मिस्त्री ने इसे दिल से लिया और अपने बच्चे के लिए खुद बैटरी चलित कार ( battery powered car) बना दी। कल्लू बताते हैं कि लॉकडाउन में बच्चे की जिद ने उन्हें यह कार बनाने को प्रेरित किया। देसी जुगाड़ से बनी यह कार आधुनिक तकनीक से निर्मित खिलौना कार से कम नहीं है। इसमें कल्लू ने बैक गीयर भी लगाया है। यह कार बड़ों का भी वजन ढो सकती है। बड़कागांव ब्लॉक के रहने वाले कल्लू ने बताया कि तभी उनके दिमाग में बैटरी चलित कार बनाने का आइडिया आया। वे बताते हैं कि इस कार के निर्माण ने उनके लिए रोजगार के अवसर भी खोले हैं। वे ऐसी ही कारें और खिलौना बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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