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जानिए कौन है कश्मीर की आयशा, जिसने 16 साल की उम्र में रच दिया इतिहास..पूरा देश कर रहा सैल्यूट

First Published Feb 3, 2021, 11:50 AM IST
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जम्मू. जम्मू कश्मीर का नाम सुनते ही हर किसी के जहन में आंतकवाद का खौफनाक चेहरा याद आ जाता है। लेकिन अब यहां धीरे-धीरे काफी बदल रहा है। कल तक जहां लड़कों को घर से निकलने में डर लगता था। अब यहां की बेटियां नई परिभाषा गढ़ते हुए इतिहास रच रही हैं। ऐसी एक जज्बे और साहस की कहानी सामने आई है इस घाटी की एक बेटी जो आज देश को सबसे कम उम्र की महिला पायलट बन गई है। उसने साल 2011 में महज 16 साल की उम्र में ही स्‍टूडेंट पायलट लाइसेंस हासिल कर लिया था। उसकी हौसले को आज हर कोई सैल्यूट कर रहा है। आइए जानते हैं कामयाबी के झंडे गाड़ने वाले इस कश्मीर के शान के बारे में जो महिलाओं के लिए मिसाल बन गई...


दरअसल, इस होनहार  बेटी का नाम आयशा अजीज है जो मूल रुप से  जम्मू कश्मीर की रहने वाली है। इस सफलता के बाद आयशा ने मीडिया के सामने अपने अनुभव साझा किए हैं। उसने कहा कि इस कामयाब के लिए उसे काफी मेहनत करनी पड़ी है। मुझे बचपन से ही हवाई यात्रा करना और लोगों से मिलना अच्छा लगता था। इस वजह से मैंने पायलट बनने का निर्णय लिया। स्कल के टाइम से ही मैं फ्लाइट के बारे में पढ़ती लिखती रहती थी। उन्होंने बताया कि पायलट बनने के लिए आपका मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है।


दरअसल, इस होनहार  बेटी का नाम आयशा अजीज है जो मूल रुप से  जम्मू कश्मीर की रहने वाली है। इस सफलता के बाद आयशा ने मीडिया के सामने अपने अनुभव साझा किए हैं। उसने कहा कि इस कामयाब के लिए उसे काफी मेहनत करनी पड़ी है। मुझे बचपन से ही हवाई यात्रा करना और लोगों से मिलना अच्छा लगता था। इस वजह से मैंने पायलट बनने का निर्णय लिया। स्कल के टाइम से ही मैं फ्लाइट के बारे में पढ़ती लिखती रहती थी। उन्होंने बताया कि पायलट बनने के लिए आपका मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है।


आयशा ने बताया कि एक अच्छा पायलट बनने के लिए मैंने बॉम्‍बे फ्लाइंग क्‍लब से पायलट की ट्रेनिंग ली। यहीं से मुझे पायलट का लाइसेंस भी मिला। उन्होंन बताया कि ट्रेनिंग के दिनों में आयशा पूरे सप्‍ताह स्‍‍कूल जाती थी और वीकेंड पर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग लिया करती थी। 
 


आयशा ने बताया कि एक अच्छा पायलट बनने के लिए मैंने बॉम्‍बे फ्लाइंग क्‍लब से पायलट की ट्रेनिंग ली। यहीं से मुझे पायलट का लाइसेंस भी मिला। उन्होंन बताया कि ट्रेनिंग के दिनों में आयशा पूरे सप्‍ताह स्‍‍कूल जाती थी और वीकेंड पर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग लिया करती थी। 
 


बता दें कि आयशा को सिंगल इंजन का सेसना 152 और 172 एयरक्राफ्ट उड़ाने का भी अनुभव है। उन्हें 200 घंटे की उड़ान पूरा होने के बाद कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस दिया गया है। आयशा आयशा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। 


बता दें कि आयशा को सिंगल इंजन का सेसना 152 और 172 एयरक्राफ्ट उड़ाने का भी अनुभव है। उन्हें 200 घंटे की उड़ान पूरा होने के बाद कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस दिया गया है। आयशा आयशा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। 


आयशा अजीज ने कहा कि कश्मीरी महिलाएं आज हर फील्ड में अच्छा काम कर रही हैं। खास तौर से यहां की महिलाएं  शिक्षा के क्षेत्र में जाना पसंद करती हैं। यहां की हर दूसरी महिला अपने परास्नातक या डॉक्टरेट कर रही है। 25 वर्षीय आयशा अजीज ने कहा के मुझे भी ऐसी ही नौकरी मिल जाती। लेकिन मुझे शुरू से ही विषम परिस्थितियों और जिंदगी में चुनौतियों का खुशी से सामना अच्छा लगता था।


आयशा अजीज ने कहा कि कश्मीरी महिलाएं आज हर फील्ड में अच्छा काम कर रही हैं। खास तौर से यहां की महिलाएं  शिक्षा के क्षेत्र में जाना पसंद करती हैं। यहां की हर दूसरी महिला अपने परास्नातक या डॉक्टरेट कर रही है। 25 वर्षीय आयशा अजीज ने कहा के मुझे भी ऐसी ही नौकरी मिल जाती। लेकिन मुझे शुरू से ही विषम परिस्थितियों और जिंदगी में चुनौतियों का खुशी से सामना अच्छा लगता था।

आयशा अजीज अपनी लाइफ का असली हीरो भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्‍स हैंं। जिसे वह अपना आदर्श मानती हैं। 

आयशा अजीज अपनी लाइफ का असली हीरो भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्‍स हैंं। जिसे वह अपना आदर्श मानती हैं। 

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