वर्ल्ड रिकॉर्ड: 5 घंटे में 650 किलो वजनी कढ़ाई में पकाई गई 25000 लोगों के लिए 1995 किलो खिचड़ी

First Published 14, Jan 2020, 5:58 PM IST

मंडी, हिमाचल. मकर संक्रांति पर तत्तापानी में 14 जनवरी को आयोजित भव्य मेले में 1995 किलो खिचड़ी बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड रचा गया। मकर संक्रांति पर इस मेले का विशेष महत्व होता है। तत्तापानी को ऋषि जमदगनी की तपोस्थली माना जाता है। यहां हजारों की संख्या में लोगों ने गर्म पानी के चश्मों में डुबकी लगाई। मकर संक्रांति पर यहां तीन दिनों तक धार्मिक आयोजन होते हैं। यहां सिर्फ हिमाचल नहीं, दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। माना जाता है कि मकर संक्रांति पर यहां नहाने से तमाम तरह के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। वहीं, श्रद्धालु अपने ग्रहों के दोष दूर करने तुलादान भी करते हैं। यहां सतलुज नदी बहती है। यह आयोजन हिमाचल पर्यटन विभाग कराता है। इस बार  4 फीट ऊंचे और 6 फीट चौड़े पतीले में खिचड़ी बनाई गई। यह बर्तन हरियाणा से लाया गया था। खिचड़ी बनाने में करीब 5 घंटे का समय लगा। चूल्हे से बर्तन को उतारने क्रेन की मदद ली गई। यह खिचड़ी करीब 25000 लोगों में बांटी गई।
 

इस मौके पर हिमाचल पर्यटन विकास निगम के निदेशक युनूस खान ने बताया कि सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी को विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखकर खिचड़ी बनाने का आयोजन रखा गया था।

इस मौके पर हिमाचल पर्यटन विकास निगम के निदेशक युनूस खान ने बताया कि सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी को विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखकर खिचड़ी बनाने का आयोजन रखा गया था।

खिचड़ी बनाने का रिकॉर्ड देखने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकर्ड की टीम मौजूद थी। वर्ल्ड रिकार्ड का सर्टिफ‍िकेट मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर को दिया गया। इस मौके पर मंडी के सांसद रामस्‍वरूप शर्मा भी मौजूद थे।

खिचड़ी बनाने का रिकॉर्ड देखने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकर्ड की टीम मौजूद थी। वर्ल्ड रिकार्ड का सर्टिफ‍िकेट मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर को दिया गया। इस मौके पर मंडी के सांसद रामस्‍वरूप शर्मा भी मौजूद थे।

इस मौके पर हिमाचल पर्यटन विकास निगम के निदेशक युनूस खान ने बताया कि सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी को विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखकर खिचड़ी बनाने का आयोजन रखा गया था।

इस मौके पर हिमाचल पर्यटन विकास निगम के निदेशक युनूस खान ने बताया कि सतलुज नदी के किनारे स्थित तत्तापानी को विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखकर खिचड़ी बनाने का आयोजन रखा गया था।

खिचड़ी पकाने के लिए 800 किलो मटीरियल इस्तेमाल किया गया। इसमें 405 किलोग्राम चावल, 195 किलोग्राम दाल, 90 किलो घी, 55 किलो मसाले का इस्तेमाल किया गया। वहीं 1100 लीटर पानी डाला गया। 65 किलो मटर भी इस्तेमाल की गई।  2 वर्ष पहले 918 किलोग्राम खिचड़ी बनाई गई थी। खिचड़ी होटल हॉलीडे होम के नंदलाल शर्मा डीजीएम की देखरेख में 25 शेफ ने तैयार की।

खिचड़ी पकाने के लिए 800 किलो मटीरियल इस्तेमाल किया गया। इसमें 405 किलोग्राम चावल, 195 किलोग्राम दाल, 90 किलो घी, 55 किलो मसाले का इस्तेमाल किया गया। वहीं 1100 लीटर पानी डाला गया। 65 किलो मटर भी इस्तेमाल की गई। 2 वर्ष पहले 918 किलोग्राम खिचड़ी बनाई गई थी। खिचड़ी होटल हॉलीडे होम के नंदलाल शर्मा डीजीएम की देखरेख में 25 शेफ ने तैयार की।

तत्तापानी में पहले बड़ी संख्या में गर्म पानी के चश्मे(गड्ढे) हुआ करते थे। इनमें स्नान करने से चर्म रोग दूर होते थे। हालांकि अब गर्म चश्मे नहीं बचे हैं, लेकिन मान्यता बरकरार है। श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने कृत्रिम तौर पर चश्मे बनवाए हैं।

तत्तापानी में पहले बड़ी संख्या में गर्म पानी के चश्मे(गड्ढे) हुआ करते थे। इनमें स्नान करने से चर्म रोग दूर होते थे। हालांकि अब गर्म चश्मे नहीं बचे हैं, लेकिन मान्यता बरकरार है। श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने कृत्रिम तौर पर चश्मे बनवाए हैं।

तत्तापानी सतलुज नदी के किनारे स्थित है। कहा जाता है कि यहां सप्त ऋषियों में शामिल जमदगनी ने कई सालों तक घोर तपस्या की थी। इसी पर उन्हें भगवान ने वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति यहां के गर्म चश्मे में स्नान करेगा, उसके चर्म रोग दूर हो जाएंगे। शनि भी उन्हें परेशान नहीं करेगा।

तत्तापानी सतलुज नदी के किनारे स्थित है। कहा जाता है कि यहां सप्त ऋषियों में शामिल जमदगनी ने कई सालों तक घोर तपस्या की थी। इसी पर उन्हें भगवान ने वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति यहां के गर्म चश्मे में स्नान करेगा, उसके चर्म रोग दूर हो जाएंगे। शनि भी उन्हें परेशान नहीं करेगा।

यह खिचड़ी करीब 25000 लोगों में बांटी गई।

यह खिचड़ी करीब 25000 लोगों में बांटी गई।

खिचड़ी बनाने के लिए हरियाणा से स्पेशल बर्तन मंगाया गया था।

खिचड़ी बनाने के लिए हरियाणा से स्पेशल बर्तन मंगाया गया था।

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