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शीशा तोड़ जहां भी हाथ डाला वहां से निकली लाशें..चश्मदीद बोले-मौत का ऐसा तांडव कभी नहीं देखा

First Published Feb 27, 2020, 3:47 PM IST
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कोटा (राजस्थान). बूंदी बस हादसे में 24 लोगों की मौत से इलाके के लोग अभी भी सदमे में हैं। चश्मीदीदों ने बताया, जैसे ही बस नदी में गिरी वहां चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते बचाने वालों की भीड़ जमा हो गई। जैसे-तैसे हम नदी में छलांग लगाकर बस तक पहंचे। खिड़कियों के कांच तोड़कर लाशों को निकालना शुरू किया। हर तरफ सिर्फ खून और मरे हुए लोगों के शव पड़े थे। हमने और भी ऐसे कई एक्सीडेंट देखे हैं। लेकिन मौत का ऐसा भीषण तांडव हमने पहली बार देखा है। बता दें, 26 फरवरी दिन बुधवार सुबह 10 बजे बूंदी की मेज नदीं में एक बारातियों से भरी बस गिर गई थी। बस में कुल 30 लोग सवार थे। जिसमें 24 की मौके पर मौत हो गई, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में मारे गए मामा पक्ष अपनी भांजी प्रीति की शादी के लिए कोटा से सवाई माधोपुर जा रहा था।
 

हादसे की खबर लगते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बस के पलटने की जानकारी लगते ही मौके पर जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही डॉक्टर भी वहां पहंच चुके थे। जहां डॉक्टर बस में पड़े लोगों को देख बता रहे थे कौ जिंदा है और कौन मर गया। चिकत्सकों ने कहा-शवों की हालत देख हमारे हाथ भी कांप उठे। हमने भी इतना बड़ा हादसा पहली बार ही देखा है।

हादसे की खबर लगते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बस के पलटने की जानकारी लगते ही मौके पर जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही डॉक्टर भी वहां पहंच चुके थे। जहां डॉक्टर बस में पड़े लोगों को देख बता रहे थे कौ जिंदा है और कौन मर गया। चिकत्सकों ने कहा-शवों की हालत देख हमारे हाथ भी कांप उठे। हमने भी इतना बड़ा हादसा पहली बार ही देखा है।

आलम यह था कि  एनडीआरएफ की टीम और गांववाले नदी के किनारे पर शवों का ढेर लगा रहे थे। पास खड़े लोग यही सोच रहे थे कि शाय ये जिंदा होगा। लेकिन 24 में से एक भी नहीं बच पाया।

आलम यह था कि एनडीआरएफ की टीम और गांववाले नदी के किनारे पर शवों का ढेर लगा रहे थे। पास खड़े लोग यही सोच रहे थे कि शाय ये जिंदा होगा। लेकिन 24 में से एक भी नहीं बच पाया।

जिस किसी ने भी मौत का यह भयानक मंजर देखा वह रोता हुआ ही नजर आया। आसपाल के लोगों को देख ऐसा लग रहा था कि मानों इनको कोई अपना दुनिया छोड़ गया हो। सभ ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि ऐसा किसी और के साथ नहीं हो।

जिस किसी ने भी मौत का यह भयानक मंजर देखा वह रोता हुआ ही नजर आया। आसपाल के लोगों को देख ऐसा लग रहा था कि मानों इनको कोई अपना दुनिया छोड़ गया हो। सभ ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि ऐसा किसी और के साथ नहीं हो।

हादसे मारे जानों वालों की खबर जैसे ही उनके परिजनों ने सुनी तो वह नदी की तरफ दौड़ पडे। किसी की मौत हो चुकी थी तो किसी  का पिता और पिता। सब यही कह रहे थे कि अभी कुछ देर पहले तो आप सजधज और नए कपड़े पहनकर शादी के लिए निकले थे। लेकिन विवाह में पहंचने से पहले ही आपकी खून से  सनी लाश मिली।

हादसे मारे जानों वालों की खबर जैसे ही उनके परिजनों ने सुनी तो वह नदी की तरफ दौड़ पडे। किसी की मौत हो चुकी थी तो किसी का पिता और पिता। सब यही कह रहे थे कि अभी कुछ देर पहले तो आप सजधज और नए कपड़े पहनकर शादी के लिए निकले थे। लेकिन विवाह में पहंचने से पहले ही आपकी खून से सनी लाश मिली।

आलम यह था कि  एनडीआरएफ की टीम और गांववाले नदी के किनारे पर शवों का ढेर लगा रहे थे। पास खड़े लोग यही सोच रहे थे कि शाय ये जिंदा होगा। लेकिन 24 में से एक भी नहीं बच पाया।

आलम यह था कि एनडीआरएफ की टीम और गांववाले नदी के किनारे पर शवों का ढेर लगा रहे थे। पास खड़े लोग यही सोच रहे थे कि शाय ये जिंदा होगा। लेकिन 24 में से एक भी नहीं बच पाया।

24 लोगों के शवों को जब कोटा लाया गया तो उनको देखने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा। परजिन दहाड़े मारकर रो रहे थे, हर तरफ उनकी चीखें सुनाई दे रहीं थी। जैसे ही 21 लोगों की अर्थियां एक साथ निकली तो हर कोई इस शव यात्रा में रोता हुआ शामिल हुआ। सबकी जुबान यही बात निकली कि हमने आज तक इतना भयानक मंजर नहीं देखा, ऐसी ह्रदय विदारक घटना फिर कभी न हो। आलम यह था कि एक चिता पर पति-पत्नी तो दूसरी पर उनके बच्चे लेटे हुए थे।

24 लोगों के शवों को जब कोटा लाया गया तो उनको देखने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा। परजिन दहाड़े मारकर रो रहे थे, हर तरफ उनकी चीखें सुनाई दे रहीं थी। जैसे ही 21 लोगों की अर्थियां एक साथ निकली तो हर कोई इस शव यात्रा में रोता हुआ शामिल हुआ। सबकी जुबान यही बात निकली कि हमने आज तक इतना भयानक मंजर नहीं देखा, ऐसी ह्रदय विदारक घटना फिर कभी न हो। आलम यह था कि एक चिता पर पति-पत्नी तो दूसरी पर उनके बच्चे लेटे हुए थे।

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