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मरे हुए बच्चे में सारी रात सांस फूंकती रही मां, सुबह डॉक्टर ने कहा, जाओ दफना दो इसे
कोटा. राजस्थान में नवजात बच्चों की मौत की बढ़ती संख्या से पूरे देश में कोहराम मचा हुआ है। जेके लोन अस्पताल में 36 दिन के अंदर बच्चों की मौत का आंकड़ा आज 110 हो गया। लगातार बच्चे पैदा होने के बाद ही दम तोड़ रहे हैं। बच्चों की मौत पर सरकार और प्रशासन खामोश है। मरीजों ने अस्पताल के स्टॉफ पर गैर जिम्मेदार रवैये और बदसलूकी के आरोप भी लगाए हैं पर अभी तक राज्य सरकार ने कोई सुध नहीं ली है। वहीं बच्चों का इलाज करवाने आए गरीब एक-एक करके अपने नौनिहालों को खोने की दर्दनाक कहानियां सुना रहे हैं। एक महिला ने बताया कि कैसे वो मरे हुए बच्चे को सांस देने के लिए सारी रात पंप दबाती रही।
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कोटा की किशोर सागर कॉलोनी में रहने वाली तुलसी बाई ने 7 साल बाद हुए अपने पोते को खो दिया। उनका पोता मन्नतों से पैदा हुआ था। जब तुलसी बाई पोते को लेकर अस्पताल में थीं तो उनके पास में एक और बच्चा भी एडमिट था।
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तुलसी बाई ने कहा कि मेरे पोते के साथ वार्ड में दूसरा लड़का भी था, डॉक्टरों ने जिसे मशीन में रखा था, वो जिंदा भी है लेकिन मुझे पंप दे दिया, मैं पूरी रात बच्चे को सांस दिलाने के लिए पंप दबाती रही।
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मेरे हाथ में दर्द हो रहा था लेकिन मरते हुए बच्चों को देख दिल बैठा जा रहा था तो मैं बच्चे में सांसे फूंकती रही। सुबह जब हमने ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने बच्चे को जांच कर कहा कि इसे ले जाओ, ये तो खत्म हो गया, जाओ दफना दो।
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डॉक्टर के कहते ही उस बच्चे की मां दहाड़े मारकर रोने लगी थी। हमने उसे संभाला था। हमने भी अपने पोते को खोया है और बच्चे भी दम तोड़ रहे हैं।
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तुलसी बाई के पति दीनदयाल ने सरकार मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा- मेरा पोता तो गया लेकिन दूसरे बच्चों को बचा लो, मशीनें खराब पड़ी हैं, उन्हें सही कराएं।
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कोटा के जेके लोन अस्पताल में मरीजों ने स्टॉफ पर गैर जिम्मेदार रवैये और बदतमीजी के भी आरोप लगाए हैं। कुछ लोगों ने कहा कि, यहां का स्टॉफ, कर्मचारी बच्चे को ड्रिप लगाकर चाय पीने चले जाते थे। वहां बैठकर हंसी-मजाक करते रहे थे। कुछ भी पूछने पर सीधे कहते हैं तुम्हारा बच्चा अभी मर नहीं रहा।
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