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कमाल की बहू: 6 गाय के साथ शुरू किया दूध का बिजनेस, अब 1 साल में है 5 करोड़ का टर्नओवर

First Published Jun 1, 2021, 6:29 PM IST
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इंदौर (Madhya Pradesh ) । एक जून को यानि आज विश्व दुग्ध दिवस है। ऐसे में आज आपको एक ऐसी सक्सेज स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़ने के बाद आप भी उससे इप्रेस होंगे। जी, हां, सास की कैंसर से मौत के बाद एक बहू ने समाज को केमिकल फ्री दूध पिलाने की शपथ ली, फिर पति की मदद से 6 गांवों के सहारे डेरी फार्म शुरू किया, जो अब 200 गांवों के साथ डेयरी उद्योग का रूप ले चुकी है। जहां रोजाना 1000 लीटर दूध शहर के कई इलाकों में सप्लाई होता है। इससे 5 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर होता है।

राजस्थान की पल्लवी व्यास की शादी संजय व्यास से हुई। इसके बाद वो इंदौर सेटल हो गई। सब कुछ ठीक-ठाक चल ही रहा था कि अचानक उनकी सास शांतो को कैंसर डिटेक्ट हुआ। एक वर्ष के इलाज के बाद उनकी उपचार के दौरान ही मौत हो गई।
 

राजस्थान की पल्लवी व्यास की शादी संजय व्यास से हुई। इसके बाद वो इंदौर सेटल हो गई। सब कुछ ठीक-ठाक चल ही रहा था कि अचानक उनकी सास शांतो को कैंसर डिटेक्ट हुआ। एक वर्ष के इलाज के बाद उनकी उपचार के दौरान ही मौत हो गई।
 

सास की कैंसर की मौत के बाद जब इस बीमारी के कारणों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि बहुत हद तक कैमिकल और पेस्टीसाइड इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसके बाद उन्होंने और पति संजय व्यास ने निर्णय किया की वह खुद अब ऑर्गेनिक चीजों का ही इस्तेमाल करेंगे। साथ ही डेयरी फार्म खोलने का निर्णय किया। वहीं, 2016 में डेयरी फार्म खोल लिया।

सास की कैंसर की मौत के बाद जब इस बीमारी के कारणों के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि बहुत हद तक कैमिकल और पेस्टीसाइड इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसके बाद उन्होंने और पति संजय व्यास ने निर्णय किया की वह खुद अब ऑर्गेनिक चीजों का ही इस्तेमाल करेंगे। साथ ही डेयरी फार्म खोलने का निर्णय किया। वहीं, 2016 में डेयरी फार्म खोल लिया।

शुरुआत में छह गाय लेकर डेयरी खोली गई थी, इसके बाद धीरे धीरे यह सिलसिला बढ़ता चला गया और उनकी डेयरी में करीब 200 गाय है। खास बात यह रही कि गाय को दिया जाने वाला चारा भी इसी जमीन पर उगाया जाने लगा, ताकि गाय के शरीर में भी कोई रसायन न जा सके।

शुरुआत में छह गाय लेकर डेयरी खोली गई थी, इसके बाद धीरे धीरे यह सिलसिला बढ़ता चला गया और उनकी डेयरी में करीब 200 गाय है। खास बात यह रही कि गाय को दिया जाने वाला चारा भी इसी जमीन पर उगाया जाने लगा, ताकि गाय के शरीर में भी कोई रसायन न जा सके।

पल्लवी व्यास ने अपने डेयरी फार्म का नाम अपनी सास की याद के लिए उन्हीं के नाम पर ‘शांता’ डेयरी फार्म रखा। उन्होंने यहां अत्याधुनिक मशीन भी लगाई। यहां दुग्ध उत्पादन से लेकर बोतल में पैक होने तक की प्रोसेस मानव रहित है। 

पल्लवी व्यास ने अपने डेयरी फार्म का नाम अपनी सास की याद के लिए उन्हीं के नाम पर ‘शांता’ डेयरी फार्म रखा। उन्होंने यहां अत्याधुनिक मशीन भी लगाई। यहां दुग्ध उत्पादन से लेकर बोतल में पैक होने तक की प्रोसेस मानव रहित है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पल्लवी व्यास के डेयरी फार्म पर रोजाना 800 से 1000 लीटर दूध का उत्पादन होता है। इस दूध को कांच को बोतलों में पैक कर इंदौरवासियों को सप्लाई किया जाता है। गिर गायों का शुद्ध ऑर्गेनिक दूध 90 रुपए प्रति लीटर बिकता है। उनके डेयरी का वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से अधिक का है।
 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पल्लवी व्यास के डेयरी फार्म पर रोजाना 800 से 1000 लीटर दूध का उत्पादन होता है। इस दूध को कांच को बोतलों में पैक कर इंदौरवासियों को सप्लाई किया जाता है। गिर गायों का शुद्ध ऑर्गेनिक दूध 90 रुपए प्रति लीटर बिकता है। उनके डेयरी का वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से अधिक का है।
 

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