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सोनिया गांधी और राजीव गांधी की लव स्टोरी  लंदन के कैंबिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से शुरू हुई थी। राजीव गांधी 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कोर्स करने वहां गए थे। हालांकि दोनों का कैंपस अलग-अलग थे। दोनों की मुलाकात एक रेस्त्रां में हुई। दरअसल सोनिया जिस रेस्त्रां में जाती थी वहीं राजीव भी जाते थे। वो सोनिया को देखकर मन ही मन पसंद करने लगे थे। सोनिया से बात करने के लिए राजीव गांधी को रेस्त्रां के मालिक को दोगुने पैसे देने पड़े थे। दरअसल वो सोनिया के बगल में बैठना चाहते थे, इसलिए वो रेस्त्रा के मालिक को बोले।एक ग्रीक कारोबारी होने के कारण चार्ल्स ने पैसा कमाने का मौका नहीं छोड़ा और उन्होंने राजीव से डील की। 

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कई किताबों में और फिल्मों में उनके प्यार का जिक्र किया गया है। मशहूर पत्रकार रशीद किदवई ने सोनिया गांधी की जीवनी में लिखा है कि रेस्त्रां में सोनिया की भी नजर राजीव पर पड़ी थी। दोनों के बीच बराबर का आकर्षण था। लेकिन दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे। एक दिन राजीव गांधी ने अपनी दिल की बात बताने के लिए टिश्यू पेपर का सहारा लिया। उन्होंने टिश्यू पेपर पर एक कविता लिखी और वेटर के जरिए सोनिया गांधी तक पहुंचाई।

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कविता पढ़ने का बाद सोनिया गांधी थोड़ी असहज हुई थी। लेकिन एक जर्मन दोस्त की वजह से दोनों मिलने लगे और फिर इनके बीच प्यार बढ़ता गया। इनकी लव स्टोरी के इतने किस्से हैं जिसका जिक्र करना यहां संभव नहीं है। काफी वक्त तक सोनिया को नहीं पता था कि वो जिससे प्यार करती हैं वो कितना महत्वपूर्ण इंसान है। एक दिन जब इंदिरा गांधी की तस्वीर अखबार में छपी तब राजीव ने सोनिया को बताया कि ये मेरी मां है।

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राजीव के मोहब्बत में जब सोनिया गांधी जब इंडिया पहुंची तो पूरी तरह भारतीय लिबास में थी।  सफेद चिकन का चूड़ीदार कुरता और पायजामा पहना रखा था। इसके ऊपर से रंगीन दुपट्टा ली हुई थी। वो बेहद ही खूबसूरत लग रही थी। एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि भारत आने पर क्या उन्हें डर लगा था। तब सोनिया गांधी का जो जवाब था उसे सुनकर समझ सकते हैं कि वो राजीव गांधी से कितनी मोहब्बत करती थी। उन्होंने कहा कि जब आप किसी के प्यार में होते हैं तो वह प्यार अजीब ताकत आपको देता है।जिसे आप प्यार करती हैं बस वहीं चाहिए होता है। मुझे राजीव चाहिए थे और उनके लिए मैं दुनिया के किसी भी कोने में जा सकती थी। राजीव ही मेरी सबसे बड़ी सिक्यॉरिटी थे। उनके अलावा मैं कुछ और नहीं सोचती थी।

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भारत आने के बाद सोनिया गांधी अपने सुसराल में नहीं ठहरी थी। बल्कि हरिवंश राय बच्चन के घर वो रुकी थी। इसे लेकर इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कहा था कि मुझे राजीव के घर रुकना शादी से पहले ठीक नहीं लगा। इंदिरा गांधी ने मुझे यहां की संस्कृति और रीति रिवाज को समझने के लिए तेजी बच्चन के घर ठहराया था। वहां मैंने काफी कुछ सीखा। तेजी बच्चन मेरी तीसरी मां थी। एक मां मेरी इटली में थी। दूसरी मां मेरी सास थी और तीसरी मां तेजी बच्चन थी। उन्होंने ने मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने दी। हरिवंश राय बच्चन ने सोनिया गांधी का कन्यादान दिया था।

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इंदिरा गांधी के साथ सोनिया गांधी के रिश्ते काफी गहरे थे। जब उनकी पहली मुलाकात लंदन में हुई थी तब इंदिरा गांधी ने उन्हें दोस्त की तरह बर्ताव किया था। लेकिन जब इंडिया आई तो सोनिया बताती हैं यहां पर मैं उनकी बहू थी। सास की छवि जो पूरी दुनिया में बनी हुई हैं मुझे उसका एहसास उनके साथ नहीं हुआ। मेरे कई दोस्त हैं जो अपनी सास से परेशान रहती थी। लेकिन मैं हमेशा उनके लिए एक बेटी जैसी ही रहीं।