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दुर्गम अमरनाथ यात्रा: आंखों से देखा जलजला, डेढ़ दर्जन मौत, 3 दर्जन से अधिक लापता.. फिर भी कम नहीं हो रहे हौसले
नई दिल्ली। अमरनाथ जी की यात्रा बेहद दुर्गम है। प्रलय की एक झलक अगर देखनी हो तो बस वहां अक्सर आने वाले जलजले को देख लें। इसके बाद भी श्रद्धाुलओं के हौसले कम नहीं पड़ते। वे उसी उत्साह से बाबा बर्फानी के दर्शन करने कठिन रास्तों से होकर जाते हैं। हाल ही में वहां एक और जलजला आया, जिससे भारी तबाही मची। इसमें 16 लोगों की अब तक मौत की सूचना है, जबकि 40 श्रद्धालु लापता हैं। फिर भी एक दिन बाद यात्रा शुरू हो गई और श्रद्धालु पूरे उत्साह से बाबा के दर्शन को जा रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि पिछले साल भी ठीक इसी जगह ऐसा ही जलजला आया था। बावजूद इसके वहां पर इस बार कैंप लगाया गया। बहरहाल, आइए तस्वीरों के जरिए देखते हैं जलजले के बाद शुरू हुई अमरनाथ की दुर्गम यात्रा।

प्राकृतिक आपदा में आए जलजले के बाद अमरनाथ यात्रा एक बार फिर शुरू हो चुकी है और श्रद्धालु बाबा के दर्शन को पूरे उत्साह के साथ चल पड़े हैं।
इस बार आए जलजले में 16 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 40 श्रद्धालु अब भी लापता हैं। उनकी तलाश का काम जोरशोर से चल रहा है।
बताया जा रहा है कि जिस जगह जलजला आया, वहां कैंप बनाया गया था, जिसकी वजह से हताहतों की संख्या बढ़ गई।
यही नहीं, पिछले साल भी इस जगह ही करीब-करीब ऐसा ही जलजला आया था, मगर तब वहां कोई नहीं था, क्योंकि कोरोना महामारी की वजह से श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति नहीं थी।
ऐसे में यात्रा प्रशासन को यह समझना चाहिए था कि जिस जगह ऐसे जलजले आ रहे हैं, वहां कैंप नहीं बनाए जाएं। उम्मीद है अगली बार प्रशासन ऐसी गलती से बचेगा।
इस बार आए जलजले से निपटने के लिए और राहत व बचाव कार्य के लिए 6 एजेंसियों को काम पर लगाया गया था। बारिश के दौरान भी काम जारी रहा। ऐसे में हताहतों की संख्या ज्यादा बढ़ नहीं पाई।
वर्ष 2021 में अमरनाथ जी की यात्रा के दौरान 28 जुलाई को जलजला आया था। तब सुरक्षाकर्मियों के कैंप यहां लगे थे, जिसे पानी के सैलाब ने तिनके की तरह उखाड़ दिया था।
इस साल प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए कैंप फ्लड चैनल पर लगाया था। यह क्षेत्र सूखी नदी के तल के तौर पर प्रचलित हैं। यहां लंगर भी आयोजित किए जा रहे थे।
इस इलाके में भारी बारिश होना और पहाड़ों से अचानक तेज बहाव के साथ पानी आना नॉर्मल है। ऐसे में फिर उसी जगह पर कैंप लगाना और लंगर लगाना बुद्धिमानी का काम नहीं था।
जलजले के बाद जो यात्रा शुरू हुई है, वह पंजतरनी से है। अब श्रद्धालुओं का जत्था इसी रास्ते से होकर बाबा बर्फानी की गुफा तक जाएगा और यहीं से वापस लौटेगा।
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