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कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की जरूरत कब पड़ती है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही जरूरी सवालों के जवाब

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर लोग इनकी मांग करते नजर आ रहे हैं। कई ग्रुप भी हैं जो मदद कर रहे हैं। लेकिन इससे एक खतरा भी पैदा हुआ है। डॉक्टर के सुझाव के बिना ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल से मरीजों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।   

6 Min read
Author : Vikas Kumar
| Updated : Jun 02 2021, 01:07 AM IST
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ऐसे में Asianet News Hindi ने गोल्ड मेडलिस्ट न्यूरोसर्जन डॉक्टर अनूप कुमार सिंह (Dr. Anoop kumar Singh) से बात की। Dr. Anoop kumar Singh ने कोरोना से जुड़े उन सभी जरूरी सवालों के जवाब दिए जो इस महामारी का मुकाबला करने और खुद की सुरक्षा करने में मददगार साबित हो सकते हैं। 

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सवाल- साधारण सर्दी-खांसी-बुखार और कोरोना के सर्दी-खांसी-बुखार में क्या फर्क है?
जवाब- इस वक्त सर्दी-खांसी-जुकाम-बुखार का सिर्फ एक कारण कोरोना है। कोरोना के दो फेज होते हैं। पहले फेज में मरीज को बुखार, सर्दी और खांसी होती है। ये फेज दो से तीन दिन का होता है। इसमें मरीज इलाज कराए या न कराए। अगले चार से पांच दिन तक ठीक रहता है। इसी में उसका पहला हफ्ता गुजर जाता है। उसे लगता है कि वह ठीक हो गया। फिर Pulmonary यानी सेकंड फेज शुरू होता है, जिसमें मरीज के चेस्ट में तमाम निमोनिया जैसे पैचेज बनने शुरू होते हैं। ये खतरनाक फेज होता है। ऐसे में जो लोग पहले सोचते हैं कि मुझे तो सामान्य सर्दी-जुकाम-बुखार है। ऐसे लोग जब हफ्ते भर बाद डॉक्टर के पास आते हैं तो स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है।
 

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सवाल- कोरोना महामारी में साधारण सर्दी-खांसी-बुखार होने की संभावना कम और कोरोना सक्रमित होने की संभावना ज्यादा क्यों है?
जवाब- इसे आसान भाषा में समझ सकते हैं। जब एक वायरस फैलता है तो बाकी सारे वायरस उसके सामने हथियार डालकर हट जाते हैं। मसलन, पोलियो वायरस को खत्म करने का तरीका क्या था हमारे पास। पोलियो में दो तरीके के स्ट्रेन थे। एक था वाइल्ड स्ट्रेन, जिससे लकवा मार जाता था। दूसरा हमारा बनाया हुआ स्ट्रेन, जिसे पल्स पोलियो अभियान में दो बूंद जिंदगी की कह कर बच्चों को पिलाते थे। यानी हमने लाखों बच्चों को पोलियों की ड्रॉप पिला दी। यानी हमने अपने बनाया हुआ वायरस बच्चों को पिलाया। अब ये वायरस पूरे कम्युनिटी में फैल गया। ये वायरस इतना ज्यादा फैला कि वाइल्ड वायरस को खत्म कर दिया। यानी हमने अपना क्रिएट किया हुआ गुलाम वायरस फैला दिया जिससे दूसरे वायरस का प्रभाव खत्म हो गया। यही कोरोना वायरस और सर्दी जुकाम के वायरस के साथ भी है। 

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सवाल- साधारण सर्दी-खांसी और बुखार होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब- अगर साधारण सर्दी-खांसी और बुखार है तो तुरन्त टेस्ट कराएं और डॉक्टर से ट्रीटमेंट लें। RT-PCR की रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। ऐसे में ट्रीटमेंट शुरू कर लेना चाहिए। 
 

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सवाल- व्यक्ति को किस स्थिति में हॉस्पिटल में भर्ती हो जाना चाहिए?
जवाब- इस वक्त किसी भी सर्दी-जुकाम-बुखार को सामान्य वायरल न माने। कोरोना ही मानकर इसका इलाज करें, क्योंकि 7 से 8 दिन बाद आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो काफी वक्त निकल चुका होता है। ऐसे में शुरुआती एक हफ्ता आपकी जान बचाने में मदद कर सकता है। 
 

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सवाल- कोरोना में कुछ मरीजों की स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर क्यों हो जा रही है? 
जवाब- कोरोना के इलाज को लेकर लोगों में काफी गलतफहमियां हैं। हम लोग हर दिन नए सिरे से सोचने की कोशिश करते हैं कि इसके इलाज को और बेहतर कैसे बनाया जाए। अभी तक सरकार का प्रोटोकॉल था कि माइल्ड डिजीज में स्‍टेरॉयड्स मत दीजिए। लेकिन अब माइल्ड डिजीज में ही स्‍टेरॉयड्स शुरू करते हैं । गांव कस्बों में आज भी लोग इसे मलेरिया और टाइफाइड समझ रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। लोग अपने ट्रेडिशनल प्रेक्टिस से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। यानी इलाज तो दे रहे हैं लेकिन जो इलाज शुरू से देना चाहिए वो नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में मरीज की तबीयत बिगड़ जा रही है। लोग इलाज लें, लेकिन  कोविड एक्सपर्ट से।

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सवाल- कोरोना के मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत कब पड़ती है?
जवाब- रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर प्रोटोकॉल जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है कि इसकी जरूरत सबको नहीं है। जिसका सीटी स्कोर 12 से ज्यादा है और कोरोना के लक्षण बढ़ते जा रहे हैं उसे रेमडेसिविर की जरूरत है। अभी हो ये रहा है कि जिनको थोड़ा सा भी कोरोना का प्रभाव है वो दुकानों से लेकर इंजेक्शन लगवा रहे हैं। जिसका सिटी स्कोर 12 से कम है उसे प्रोटोकॉल के हिसाब से रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत नहीं है। 
 

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सवाल- कोरोना मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत कब पड़ती है?
जवाब- जिसका ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से ज्यादा है उसे ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं है। जिसका ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 से कम है उसे इसकी जरूरत है। इसके बाद मरीज को कोविड एक्सपर्ट से इलाज करवाना चाहिए। अभी क्या हो रहा है कि जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 से कम हो रहा है वह कहीं न कहीं से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घर पर लगाकर बैठ जा रहा है। लेकिन ये गलत है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की मॉनीटरिंग और इलाज की जरूरत है। लोगों को लग रहा है कि मैंने ऑक्सीजन लगा लिया अब मैं बच जाऊंगा। जबकि ऑक्सीजन एक सपोर्ट है। ट्रीटमेंट नहीं है।
 

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सवाल- कोरोना मरीज को किस स्थिति तक होम आइसोलेशन में रहना चाहिए? 
जवाब- होम आइसोलेशन का मतलब है कि मरीज कोरोना संक्रमित है और वह घर पर दवा ले रहा है। उसका सेचुरेशन प्वॉइंट 95 प्रतिशत से ज्यादा है। दिन में ऑक्सीजन लेवल तीन से चार बार चेक करता रहे। लेकिन अगर सेचुरेशन प्वॉइंट 95 से नीचे आता है तो तुरन्त मरीज को चेस्ट का सीटी स्कैन कराना चाहिए। सीटी स्कैन में माइनर फाइंडिंग है और सांस लेने में कोई खास दिक्कत नहीं है। 

अगर ऑक्सीजन लेवल 90 से 95 के बीच है तो अपने डॉक्टर की सलाह के साथ ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ घर पर रह सकता है। लेकिन उसके सीटी स्कैन में मेजर फाइंडिंग हैं तो मरीज को घर पर नहीं रहना चाहिए। चाहे उसका सेचुरेशन 97 प्रतिशत हो। अगर उसका सीटी स्कोर 9 से ज्यादा आ रहा है तो ऐसे में खतरा बढ़ने की आशंका है। मरीज और ज्यादा बीमार हो सकता है। ऐसे मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होना चाहिए। ऐसे मरीज की कंडीशन 24 से 48 घंटे के अंदर ही बिगड़ने लगती है।
 

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सवाल- अगर कोरोना टेस्ट नहीं हो पा रहा है तो क्या करें? यानी घर पर रहकर क्या-क्या कर सकते हैं?
जवाब- अगर सर्दी-खांसी-जुकाम-बुखार है तो ये कोविड हो सकता है। जबतक कि ये निगेटिव प्रूफ न हो जाए तब तक इसे कोरोना मानकर चलिए। आपको इलाज तो पहले दिन से ही शुरू कर देना है। अगर ऑक्सीजन लेवल ठीक है, दिक्कत बढ़ नहीं रही है तो बहुत अच्छी बात है। ऐसे में घर पर रहिए और अपनी जांच करा लीजिए। 
 

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सवाल- ऑक्सीजन सिलेंडर की जगह नेबुलाइजर मशीन का इस्तेमाल करना ठीक है या नहीं? 
जवाब- नेबुलाइजर भाप लेने वाली मशीन है। वह ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं है। नेबुलाइजर के अंदर दवा डालकर फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। ये ऑक्सीजन का रिप्लेसमेंट कभी नहीं हो सकता है।

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सवाल- महिलाएं पीरियड्स के वक्त वैक्सीन लगवा सकती हैं? 
जवाब- बिल्कुल ले सकती हैं। पीरियड्स का इससे कोई लेना देना नहीं है। सिर्फ एक स्थिति है जिसमें वैक्सीन नहीं लेनी है और वह है कि जब आपको एक्टिव जुकाम-खांसी-बुखार हुआ हो। इसका मतलब है कि आप कोरोना के शिकार पहले से हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में ठीक होने तक या दो हफ्ते तक वैक्सीन नहीं लेनी है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला सहित किसी भी स्थिती में भी आप वैक्सीन ले सकते हैं।
 

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Vikas Kumar
 
2nd TEST • SA vs AUS
Stumps
SASA
(12.2 ov)20/2
AUSAUS
-
Day 1
Schedule ›
5th T20 • IND vs WI
abandoned
INDIND
118/5
WIWI
-
Match abandoned
Schedule ›
4th T20 • IND vs WI
Result
INDIND
223
WIWI
247/3
WI beat IND by 24 runs
Schedule ›
3rd T20 • PAK vs SL
Result
PAKPAK
168/8
SLSL
172/2
SL beat PAK by 8 wickets
Schedule ›
3rd T20 • IND vs WI
Result
INDIND
223
WIWI
209/7
IND beat WI by 14 runs
Schedule ›
2nd T20 • PAK vs SL
Result
PAKPAK
215/3
SLSL
133/7
PAK beat SL by 82 runs
Schedule ›
2nd T20 • IND vs WI
Result
INDIND
249/5
WIWI
252/4
WI beat IND by 6 wickets
Schedule ›
1st T20 • PAK vs SL
Result
PAKPAK
187/6
SLSL
182/8
PAK Won by 4 wickets
Schedule ›
1st TEST • SA vs AUS
Result
SASA
284 & 206
AUSAUS
390 & 314/6
AUS beat SA by 214 runs
Schedule ›
3rd TEST • SA vs AUS
SASA
Tue, 27 Oct, 2026
AUSAUS
01:30 pm
Match yet to begin.
Schedule ›

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