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इंटेल इनपुट-नक्सली कमांडर हिडमा का पता...सबकुछ था फिर कैसे शहीद हुए 23 जवान, ऐसे रची गई पूरी साजिश
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया और 23 जवान शहीद हो गए। घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई मीटिंग में निर्देश दिए गए हैं कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार में किसी भी तरीके की कमी नहीं आएगी। नक्सलियों को घुसकर मारने के लिए ऑपरेशन चलाया जाएगा।

नक्सलियों की PLGA बटालियन करती है गुरिल्ला वार
नक्सलियों ने सालों पहले दंडकारण्य स्पेशल जोन कमेटी क्षेत्र के तहत PLGA बटालियन बनाया था, जो गुरिल्ला वार करने में माहिर है। 3 अप्रैल को सुरक्षा बलों को बीजापुर और सुकमा जिलों के आस-पास जंगलों में पीएलजीए -1 के होने की खबर मिली। नक्सल ऑपरेशन के लिए DRG, STF, कोबरा और CRPF के जवानों को मिलाकर एक टास्क फोर्स बनाकर भेजा गया।
नक्सलियों ने जोनागुंडम और तेकुलगुडम के बीच जंगल में दोपहर करीब 12 बजे सुरक्षा बलों पर हमला किया। टास्क फोर्स और PLGA -1 के बीच 3 अप्रैल को करीब 4 से 5 घंटों तक मुठभेड़ चली।
एसटीएफ ने 6, कोबरा ने 7 जवानों सहित 23 जवान शहीद
अधिकारियों ने 23 जवानों के शहीद होने की पुष्टि की। एक जवान के लापता होने की सूचना थी। लापता जवानों के लिए सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। डीआरजी ने आठ जवानों को खो दिया। एसटीएफ ने 6, कोबरा ने 7 जवानों को खो दिया।
15 नक्सली मारे गए, शवों को ट्रक में लादकर भागे नक्सली
सुरक्षा बलों ने 15 नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 20 से अधिक नक्सली घायल हो गए। नक्सलियों ने मारे गए अपने साथियों के शवों को ट्रक में लादकर भागे। सुरक्षा बलों को एक महिला माओवादी का शव मिला, जिसकी पहचान कमांडर मांडवी वणोजा के रूप में की गई। उसके शव के पास इंसास राइफल मिली।
खुफिया एजेंसी NTRO की मदद से चलाया जाएगा ऑपरेशन
केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया विंग के प्रमुख, सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी और गृह मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक में उपस्थित थे। अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार में कोई चूक नहीं होगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अधीन काम करती है NTRO
ऑपरेशन चलाने के लिए NTRO की मदद लेने की बात भी सामने आई है। NTRO राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अधीन एक खुफिया एजेंसी है। इसे 2004 में स्थापित किया गया था। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिप्टोलॉजी रिसर्च एंड डेवलपमेंट भी शामिल है। सूत्रों ने यह भी कहा है कि मामले को एनआईए को सौंपा जा सकता है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को नक्सली घात के पीछे एक साजिश का शक है।
इंटेल इनपुट मिले थे, तब कहां गलती हुई?
ऐसे खुफिया इनपुट थे कि नक्सल कमांडर हिडमा (25 लाख रुपए का ईनाम) और उसके कुछ साथी छत्तीसगढ़ के बीजापुर में डेरा डाले हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया था कि ये नक्सली सुरक्षा बलों और गश्त करने वाली पार्टियों को निशाना बना सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नक्सल कमांडर हिडमा के नेतृत्व में सुकमा और बीजापुर के जंगलों में 150-160 नक्सली गुट कैंप कर रहे थे। ये सुरक्षा बलों को निशाना बना सकते थे। खबर यह भी थी कि सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने के लिए 50-60 नक्सलियों का एक और समूह तैयार था।
इसी तरह की जानकारी पीएलजीए -1 के बारे में थी, जिसके सदस्यों को सुरक्षा बलों के डर से बीजापुर और सुकमा में छिपने की बात कही गई थी। आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) ने हिडमा के नए पते का पता लगाया था, जिसे 24 मार्च को सुकमा के जगरगुंडा में देखा गया था। उसे 15-180 नक्सल गुर्गों के साथ देखा गया था। आईबी और सीआरपीएफ की स्पेशल टीम कुछ समय के लिए हिडमा के एकदम सटीक जगह का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।
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