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CRPF जवान को छुड़ाने के लिए CM ने 92 साल के इस व्यक्ति से कहा, तब हुई रिहाई, कौन हैं बस्तर के गांधी?

First Published Apr 9, 2021, 10:00 AM IST
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नक्सलियों ने 8 अप्रैल की शाम CRPF जवान राकेश्वर सिंह को रिहा कर दिया। वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 3 अप्रैल को हुए नक्सली हमले के बाद लापता थे। 7 अप्रैल को नक्सलियों ने फोटो जारी कर बताया था कि वे उनके कब्जे में हैं। सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह की रिहाई में पद्मश्री धर्मपाल सैनी की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इन्हें बस्त के ताऊजी और बस्तर के गांधी के नाम से भी जाना जाता है। 

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि राकेश्वर सिंह की रिहाई के लिए सामाजिक संगठन और पत्रकारों ने बहुत मदद की। उन्होंने धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समन्वय समिति अध्यक्ष तेलम बोरैया, पत्रकार गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्राकर और शंकर का नाम लिया। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये पद्मश्री धर्मपाल सैनी कौन हैं?
 

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि राकेश्वर सिंह की रिहाई के लिए सामाजिक संगठन और पत्रकारों ने बहुत मदद की। उन्होंने धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समन्वय समिति अध्यक्ष तेलम बोरैया, पत्रकार गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्राकर और शंकर का नाम लिया। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये पद्मश्री धर्मपाल सैनी कौन हैं?
 

बस्तर में गांधी के नाम से मशहूर धर्मपाल सैनी ने इस इलाके में बालिका शिक्षा के लिए काफी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवान को सुरक्षित रिहा कराने के लिए सीएम भूपेश बघेल ने उनसे अनुरोध किया था।  
 

बस्तर में गांधी के नाम से मशहूर धर्मपाल सैनी ने इस इलाके में बालिका शिक्षा के लिए काफी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जवान को सुरक्षित रिहा कराने के लिए सीएम भूपेश बघेल ने उनसे अनुरोध किया था।  
 

92 साल के धर्मपाल सैनी को बालिक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। साल 2012 में द वीक ने उन्हें मैन ऑफ द ईयर चुना था। 
 

92 साल के धर्मपाल सैनी को बालिक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। साल 2012 में द वीक ने उन्हें मैन ऑफ द ईयर चुना था। 
 

करीब 45 साल पहले धर्मपाल सैनी पहली बार बस्तर आए थे। उसके बाद वहीं रहने लगे। धर्मपाल सैनी के आने के बाद बस्तर में साक्षरता अनुपात 10 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो चुका है। उन्होंने अब तक 2 हजार से ज्यादा एथलीट तैयार किए हैं। उनके आश्रम में पढ़ने वाली लड़कियां डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बन चुकी हैं। 
 

करीब 45 साल पहले धर्मपाल सैनी पहली बार बस्तर आए थे। उसके बाद वहीं रहने लगे। धर्मपाल सैनी के आने के बाद बस्तर में साक्षरता अनुपात 10 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो चुका है। उन्होंने अब तक 2 हजार से ज्यादा एथलीट तैयार किए हैं। उनके आश्रम में पढ़ने वाली लड़कियां डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बन चुकी हैं। 
 

एमपी के धार जिले के रहने वाले सैनी बस्तर क्यों आए? इसके पीछे भी मजेदार कहानी है। दरअसल, सैनी भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे के शिष्य थे। उन्होंने बस्तर में लड़कियों से जुड़ी हुई एक खबर पढ़ी, जिसमें लिखा था कि मेले से लौटने के दौरान कुछ लड़कों ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की। लड़कियों ने उन लड़कों के हाथ पैर काट कर उनकी हत्या कर दी। सैनी इस खबर से इतने प्रभावित हुए कि बस्तर में लड़कियों के लिए कुछ करने का फैसला किया। 
 

एमपी के धार जिले के रहने वाले सैनी बस्तर क्यों आए? इसके पीछे भी मजेदार कहानी है। दरअसल, सैनी भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे के शिष्य थे। उन्होंने बस्तर में लड़कियों से जुड़ी हुई एक खबर पढ़ी, जिसमें लिखा था कि मेले से लौटने के दौरान कुछ लड़कों ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की। लड़कियों ने उन लड़कों के हाथ पैर काट कर उनकी हत्या कर दी। सैनी इस खबर से इतने प्रभावित हुए कि बस्तर में लड़कियों के लिए कुछ करने का फैसला किया। 
 

पद्मश्री धर्मपाल सैनी खुद भी एथलीट रहे हैं। उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया है। जानकारी के मुताबिक, सैनी बीते कई महीनों से सरकार और नक्सलियों के बीच शांति वार्ता के लिए कोशिश कर रहे हैं। 
 

पद्मश्री धर्मपाल सैनी खुद भी एथलीट रहे हैं। उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया है। जानकारी के मुताबिक, सैनी बीते कई महीनों से सरकार और नक्सलियों के बीच शांति वार्ता के लिए कोशिश कर रहे हैं। 
 

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