शिंजो आबे के लिए क्यों बुरा है शुक्रवार, जानिए 28 अगस्त 2020 को क्या हुआ था उनके साथ
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के लिए शुक्रवार एक बार फिर बुरा साबित हुआ और इस बार ऐसा हुआ कि वे दोबारा अपने जीवन में कभी अगला शुक्रवार नहीं देख पाएंगे। 8 जुलाई, शुक्रवार को उन्हें नारा शहर में 41 साल के एक हमलावर ने गोली मार दी। काफी कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। शिंजो आबे का जन्म 21 सितंबर 1954 को जापान की राजधानी टोक्यो के शिंजुकु शहर में हुआ था। वह पहले से ही घातक बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस से जूझ रहे थे। इस बीमारी की वजह से शुक्रवार, 28 अगस्त 2020 को पद छोड़ना पड़ा था। वह देश के सबसे चर्चित और लोकप्रिय नेताओं में से एक माने जाते थे। काम और व्यवहार दोनों उम्दा था, इसलिए जापान में विपक्षी नेता भी उनका सम्मान करते थे। विदेशों में तमाम बड़े नेताओं संग उनके अच्छे संबंध रहे। भारत ने उन्हें 2021 में उन्हें पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा था। आइए तस्वीरों के जरिए शिंजो आबे के बारे कुछ और रोचक बातें जानते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस नाम की बीमारी से पीड़ित होने के कारण शिंजो आबे को शुक्रवार, 28 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पहले उन्हें 2007 में भी इस बीमारी की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था।
शिंजो आबे को शुक्रवार, 8 जुलाई 2022 को नारा शहर में तब गोली मार दी गई, जब वे चुनाव प्रचार कर रहे थे। कुछ देर बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। शुक्रवार का दिन उनके लिए फिर बुरा साबित हुआ।
शिंजो आबे जापान में बेहद प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके दादा कैना आबे और पिता सिंतारो आबे जापान के लोकप्रिय नेता रहे। शिंजो की मां जापान के पूर्व पीएम नोबोशुके की बेटी थीं।
जिस तरह भारत में प्रधानमंत्री जनता के बीच लोकप्रिय नेता हैं, उसी तरह जापान में शिंजो आबे को भी वहां के लोग काफी पसंद करते थे। सोशल मीडिया पर चर्चा यह भी रहती है- भारत में मोदीनॉमिक्स और जापान में आबेनॉमिक्स।
ऑबे ऐसे जापानी प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने भारत की सबसे अधिक यात्रा की है। भारत के प्रति उनका प्यार अक्सर पद पर रहते हुए सामने आता रहा है।
भारत में उन्हें वर्ष 2021 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिंजो आबे के बेहतर रिश्ते रहे हैं।
शिंजो आबे ने जापान में दक्षिणपंथी नेताओं के साथ मिलकर एक बिल पर प्रस्ताव रखा। इसमें जापानी युवाओं में देश और अपने गृह नगर से कैसे प्यार जगाया जाए, इसके तरीके सुझाए गए थे।
हालांकि, शिंजो आबे के इस आइडिया की विपक्ष ने काफी बुराई की, मगर जनता में इसे बेहद पसंद किया गया और फिर इस बिल का नाम लव फॉर कंट्री रखते हुए पारित कर दिया गया।
जापान के हित में उनके आर्थिक कदमों की अक्सर विपक्षी दल भी चर्चा करते रहे हैं। साथ ही, दुनियाभर के नेता उनके काम करने के तरीके की तारीफ करते रहे हैं।
शिंजो आबे भारत को अपना करीबी मित्र बताते रहे हैं। भारत और भारतीयता दोनों के प्रति उनकी दिलचस्पी अक्सर देखी गई है। बनारस और गुजरात का उन्होंने दौरा भी किया।
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