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फर्जी अनामिका ने एक साथ 25 नौकरी की-करोड़ों रु. सैलरी भी ली...बेचारी असली अनामिका का दर्द तो सुनिए

First Published Jun 10, 2020, 4:08 PM IST
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गोंडा(Uttar Pradesh).  उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अनामिका शुक्ला नाम से करीब 25 जगह फर्जी तरीके से नौकरी करने और साल भर में करीब एक करोड़ रुपए तनख्वाह के रूप में जारी होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले में अब असली अनामिका शुक्ला सामने आई हैं। जिसे अभी तक 1 करोड़ की सैलरी लेने वाली फ्राड बताया जा रहा था अब उस नाम की असली अनामिका शुक्ला का दर्द सामने आया है। अनामिका ने अपनी सच्चाई और दर्द भरी दास्तान मीडिया के सामने शेयर किया । अनामिका का कहना है कि उनके दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर ये घोटाला किया गया है। अब असली अनामिका न्याय की गुहार लगा रही है ।
 

गोंडा के कमरावा में भुलईडीह गांव की रहने वाली अनामिका शुक्ला ने एक टीवी चैनल को दिए आगे इंटरव्यू में कहा कि 2017 में उन्होंने कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में साइंस टीचर के लिए आवेदन किया था।
 

गोंडा के कमरावा में भुलईडीह गांव की रहने वाली अनामिका शुक्ला ने एक टीवी चैनल को दिए आगे इंटरव्यू में कहा कि 2017 में उन्होंने कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में साइंस टीचर के लिए आवेदन किया था।
 

अनामिका शुक्ला का कहना है कि वहीं से उनके दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ की और ये पूरा फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने कहा कि कई दिन से नाम सुन रहे थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये उन्हीं की बारे में है। जब उन्होंने न्यूजपेपर में देखा तो मेरी तस्वीर दिखी, जहां से मैने बीएड किया था। इसके बाद मुझे लगा कि हां, शायद ये मेरे बारे में ही कहा जा रहा है। अनामिका ने बताया कि इस बारे में उन्होंने अपने पति और ससुर से बात की और कहा कि तुरंत इस संबंध में विभाग से संपर्क करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने बीएसए कार्यालय जाकर संपर्क किया। 

अनामिका शुक्ला का कहना है कि वहीं से उनके दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ की और ये पूरा फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने कहा कि कई दिन से नाम सुन रहे थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये उन्हीं की बारे में है। जब उन्होंने न्यूजपेपर में देखा तो मेरी तस्वीर दिखी, जहां से मैने बीएड किया था। इसके बाद मुझे लगा कि हां, शायद ये मेरे बारे में ही कहा जा रहा है। अनामिका ने बताया कि इस बारे में उन्होंने अपने पति और ससुर से बात की और कहा कि तुरंत इस संबंध में विभाग से संपर्क करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने बीएसए कार्यालय जाकर संपर्क किया। 

अनामिका ने बताया कि जुलाई 2017 में उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में साइंस टीचर के लिए सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर और लखनऊ में आवेदन किया था। लेकिन वह गर्भवती थीं और काउंसिलिंग से पहले उनकी बड़ी बेटी ऑपरेशन से हुई, जिस वजह से वह काउंसिलिंग में जा नहीं सकीं। 

अनामिका ने बताया कि जुलाई 2017 में उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में साइंस टीचर के लिए सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर और लखनऊ में आवेदन किया था। लेकिन वह गर्भवती थीं और काउंसिलिंग से पहले उनकी बड़ी बेटी ऑपरेशन से हुई, जिस वजह से वह काउंसिलिंग में जा नहीं सकीं। 

ये बताते हुए अनामिका की आँखों में आंसू आ गए । अनामिका ने कहा कि ये गलत हो रहा है मेरे साथ। उन्होंने कहा कि इसमें शिक्षा विभाग के लोग ही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हर इंसान अपने मां-पिता का नाम रोशन करने के लिए पढ़ता है। सरकार से निवेदन है कि वो मेरे दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को चिन्हित करे उनके खिलाफ कारवाई करे ।
 

ये बताते हुए अनामिका की आँखों में आंसू आ गए । अनामिका ने कहा कि ये गलत हो रहा है मेरे साथ। उन्होंने कहा कि इसमें शिक्षा विभाग के लोग ही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हर इंसान अपने मां-पिता का नाम रोशन करने के लिए पढ़ता है। सरकार से निवेदन है कि वो मेरे दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को चिन्हित करे उनके खिलाफ कारवाई करे ।
 

असली अनामिका का चयन किसी भी कस्तूरबा स्कूल में तय था क्योंकि वह खुद कस्तूरबा से ही पढ़ी थी और उनकी मेरिट बहुत अच्छी थी । अनामिका को हाईस्कूल में 77 परसेंट नंबर मिले थे. गोंडा के कस्तूरबा स्कूल से पढ़ते हुए 2007 में हाईस्कूल में उन्हें 600 में से 461 नंबर मिले. 5 सब्जेक्ट में उन्हें डिस्टिंक्शन मिला था। 2009 में इंटर में 79 परसेंट मार्क्स मिले थे। कुल 500 में से 393. फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में उन्हें डिकटेंशन मिला।
 

असली अनामिका का चयन किसी भी कस्तूरबा स्कूल में तय था क्योंकि वह खुद कस्तूरबा से ही पढ़ी थी और उनकी मेरिट बहुत अच्छी थी । अनामिका को हाईस्कूल में 77 परसेंट नंबर मिले थे. गोंडा के कस्तूरबा स्कूल से पढ़ते हुए 2007 में हाईस्कूल में उन्हें 600 में से 461 नंबर मिले. 5 सब्जेक्ट में उन्हें डिस्टिंक्शन मिला था। 2009 में इंटर में 79 परसेंट मार्क्स मिले थे। कुल 500 में से 393. फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में उन्हें डिकटेंशन मिला।
 

बीएससी में जरूर उन्हें 60 फीसदी से कम अंक मिले थे लेकिन बीएड में फिर उन्हें 60 फीसदी से ज्यादा नंबर मिले हैं। टीईटी में उन्हें 150 में से 91 नंबर मिले। इतनी मेरिट पर कस्तूरबा के लिए उनके चयन की गारंटी थी। इसी लिए जालसाजों ने उनके दस्तावेजों के साथ फ्राड करने के लिए चिन्हित किया ।
 

बीएससी में जरूर उन्हें 60 फीसदी से कम अंक मिले थे लेकिन बीएड में फिर उन्हें 60 फीसदी से ज्यादा नंबर मिले हैं। टीईटी में उन्हें 150 में से 91 नंबर मिले। इतनी मेरिट पर कस्तूरबा के लिए उनके चयन की गारंटी थी। इसी लिए जालसाजों ने उनके दस्तावेजों के साथ फ्राड करने के लिए चिन्हित किया ।
 

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