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कोई भैया की बॉडी दिखा दे, उसकी कलाई पर आखिरी बार तो राखी बांध लूं...यह कहते हुए रो पड़ी बहन
कानपुर(Uttar Pradesh). कानपुर के बर्रा के रहने वाले लैब टेक्नीशियन संजीत यादव अपहरणकांड में 31 वें दिन खुलासा हुआ है। संजीत की हत्या कर शव को नदी में फेंक दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में संजीत के चार दोस्तों समेत पांच आरोपितों को पकड़ लिया है लेकिन अभी तक शव नहीं मिला है। संजीत की हत्या के खबर आने के बाद उसके परिवार को रो-रो कर बुरा हाल है। संजीत की इकलौती बहन रूचि बदहवास सी हो गई है। शुक्रवार दोपहर वह ये कहते- कहते रो पड़ी कि एक बार मेरे भैया को दिखा दो मैं उनके कलाई पर आख़िरी बार राखी तो बांध दूं। रूचि की ये बातें सुनकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।

कानपुर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की किडनैपिंग के बाद मर्डर का खुलासा पुलिस ने 32वें दिन कर दिया है । एक महीना पहले लैब टेक्निशियन संजीत यादव का अपहरण उसके ही दोस्तों ने किया था। गुरुवार को इस मामले में दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपहरण के चार दिन बाद ही संजीत की हत्या कर दी थी और लाश को पांडू नदी में फेंक दिया था। लैब टेक्नीशियन संजीत के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पुलिस की जानकारी में अपहरणकर्ताओं को तीस लाख की फिरौती दी, लेकिन फिर भी उनका बेटा नहीं बचा। जिसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए IPS अपर्णा गुप्ता समेत 11 लोगों को सस्पेंड कर दिया है।
लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की बहन रूचि लगातार भाई का इन्तजार कर रही थी, दहाड़े मार कर रोते हुए उसने बताया कि उसके भैया जरूर गायब थे, दिल में डर भी लगा रहता था लेकिन ये भरोसा था कि वो रक्षाबन्धन तक जरूर वापस आ जाएंगे। वह पुलिस अधिकारियों से भी बार-बार ये बात पूछती थी कि क्या रक्षाबन्धन तक भैया को छुड़ा लिया जाएगा। लेकिन पुलिस वाले उसे गोलमोल जवाब दे देते थे।
संजीत के परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने घर, जेवर बेचकर और बेटी की शादी के लिए जमा किए पैसे मिलाकर 30 लाख रुपए जुटाए थे। 13 जुलाई को पुलिस के साथ अपहरणकर्ताओं को पैसे देने गए। अपहरणकर्ता पुलिस के सामने से 30 लाख रुपए लेकर चले गए। इसके बाद भी बेटा नहीं मिला तो परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद एसएसपी ने बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत रॉय को सस्पेंड कर दिया था।
मामले में सीएम योगी ने कड़ा एक्शन लिया है। एक महीने तक इस मामले की तह तक न पहुंच पाने और परिवार द्वारा फिरौती देने के आरोपों के बाद कानपुर की एएसपी आईपीएस अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, अपहरण के समय डिप्टी एसपी रहे मनोज गुप्ता, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार समेत 5 और पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। 6 सिपाहियों को भी सस्पेंड किया गया है। चौकी इंचार्ज चरणजीत राय पहले ही सस्पेंड हो चुके हैं।
पुलिस के मुताबिक, संजीत के साथ एक लैब में काम कर चुके उसके 2 दोस्त 22 जून को उससे मिले थे। वे संजीत को पास के ढाबे पर खाना खिलाने ले गए। वहां तीनों ने शराब पी। नशे की हालत में संजीत ने दोस्तों को बताया कि मैं खुद पैथोलॉजी खोलने वाला हूं। सभी तैयारियां कर ली हैं। संजीत की बात सुनने के बाद उसे ढाबे से ही अपहरण कर लिया गया। पनकी में रहने वाले कुलदीप ने पूरी साजिश रची। इसमें कुलदीप की गर्लफ्रेंड और कुलदीप के दोस्त ज्ञानेंद्र, रामजी शुक्ला समेत 3 अन्य लोग भी शामिल थे।
दोस्तों ने संजीत की बाइक रामादेवी में झाड़ियों के बीच छिपाई थी। कुलदीप ने अपनी गर्लफ्रेंड को पत्नी बताकर रतनलाल नगर में किराए का रूम लिया था। संजीत को रतनलाल नगर में रखा था, उसे नींद और नशे का इंजेक्शन देते थे। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती मांगने के लिए सिम कार्ड खरीदे थे। संजीत आरोपियों को पहचानता था, इसलिए पकड़े जाने के डर से उन्होंने 26 जून को उसकी हत्या कर दी थी। एसएसपी दिनेश कुमार के मुताबिक, संजीत का अपहरण करने वालों में उसके 2 खास दोस्त थे।
शासन की ओर से एडीजी बीपी जोगदंड को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है । वह परिवार के उन आरोपों की भी जांच करेंगे, जिसमें परिजनों ने कहा था कि पुलिस के सामने 30 लाख रुपए की फिरौती दी थी। एडीजी को तुरंत कानपुर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
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