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कोयंबटूर के जिस मंदिर में CM योगी ने टेका माथा, वह एशिया का सबसे अनोखा देव स्थान..हर मन्नत होती पूरी

First Published Mar 31, 2021, 5:48 PM IST
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लखनूऊ (उत्तर प्रदेश). सख्त छवि और चिनौती पूर्ण फैसलों के लिए चर्चित चेहरा बन चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भाजपा अक्सर चुनावों में स्टार प्रचारक बनाती है। बतौर स्टार प्रचारक उनकी मांग पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सर्वाधिक है। 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों में उन्हें पार्टी वोटरों को रिझाने के लिए मैदान में उतार दिया है। इसी सिलसिले में वह बुधवार को तमिलनाडु पहुंचे हैं, जहां योगी सबसे पहले कोयंबटूर के मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने काफी देर तक पूजा-प्रार्थना की। आइए जानते हैं सीएम ने जिस मंदिर में पूजा कि है वह आखिर एशिया के सभी मदिंरों से कितना अलग है।


दरअसल, यह अनोखा मंदिर कोयंबटूर से 4 किमी की दूरी पुलियाकुलम में मौजूद है। जहां पर श्री मुंथी विनायक महागणपति और मुंथी विनायक गणपति आरोग्यलाभ के देवता विराजमान हैं। जहां रोज हजारों की संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इस भव्य प्रतिमा की विशेषता देखने से ही झलकती है। जिसकी वजह से श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है। 


दरअसल, यह अनोखा मंदिर कोयंबटूर से 4 किमी की दूरी पुलियाकुलम में मौजूद है। जहां पर श्री मुंथी विनायक महागणपति और मुंथी विनायक गणपति आरोग्यलाभ के देवता विराजमान हैं। जहां रोज हजारों की संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इस भव्य प्रतिमा की विशेषता देखने से ही झलकती है। जिसकी वजह से श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है। 


मुंथी विनायक मंदिर में विराजमान गणेश प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सबसे ज्यादा वजनी है। जिसका वजन 140 क्विंटल है, जिसीक ऊंचाई 20 फीट और चौड़ाई 11 फीट है। पूरे एशिया में इतनी वजनी कोई दूसरी गणेश प्रतिमा नहीं है। पूरी प्रतिमा एक ही ग्रेनाइट पत्थर पर बनाई गई है
 


मुंथी विनायक मंदिर में विराजमान गणेश प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सबसे ज्यादा वजनी है। जिसका वजन 140 क्विंटल है, जिसीक ऊंचाई 20 फीट और चौड़ाई 11 फीट है। पूरे एशिया में इतनी वजनी कोई दूसरी गणेश प्रतिमा नहीं है। पूरी प्रतिमा एक ही ग्रेनाइट पत्थर पर बनाई गई है
 


यहां के लोग इन भगवान को आरोग्य देवता भी कहते हैं। कहा जाता है कि जो भी यहां किसी भी रोग को हरने की सच्चे मने से प्रार्थना लेकर आता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यहां कालसर्प दोष और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा की जाती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालू यहां आते हैं।


यहां के लोग इन भगवान को आरोग्य देवता भी कहते हैं। कहा जाता है कि जो भी यहां किसी भी रोग को हरने की सच्चे मने से प्रार्थना लेकर आता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यहां कालसर्प दोष और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा की जाती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालू यहां आते हैं।


 साल 1982 में यह मंदिर बनना शुरू हुआ था। 6 साल बाद बप्पा का पूरा मंदिर बनकर तैयार हुआ। बप्पा की इस प्रतिमा के एक हाथ में अमृत का कलश भी है। इस प्रतिमा की कमर में कमरबंद के तौर पर वासुकी नाग विराजित हैं। दरअसल यह प्रतिमा कमल के फूल पर विराजित गणपति की है।


 साल 1982 में यह मंदिर बनना शुरू हुआ था। 6 साल बाद बप्पा का पूरा मंदिर बनकर तैयार हुआ। बप्पा की इस प्रतिमा के एक हाथ में अमृत का कलश भी है। इस प्रतिमा की कमर में कमरबंद के तौर पर वासुकी नाग विराजित हैं। दरअसल यह प्रतिमा कमल के फूल पर विराजित गणपति की है।


पुलियाकुलम क्षेत्र की कोयंबटूर में बहुत मान्यता है, इसलिए इस क्षेत्र को पवित्र भूमि माना जाता है। जब कभी कोई भी यहां चुनाव होता है तो हर पार्टी के सभी बड़े नेता यहां पर माथा टेकने के लिए आते हैं।


पुलियाकुलम क्षेत्र की कोयंबटूर में बहुत मान्यता है, इसलिए इस क्षेत्र को पवित्र भूमि माना जाता है। जब कभी कोई भी यहां चुनाव होता है तो हर पार्टी के सभी बड़े नेता यहां पर माथा टेकने के लिए आते हैं।

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