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स्मृति ईरानी को देखते ही लिपटकर रोने लगीं MLA पत्नी, विधायक के निधन पर अचानक घर पहुंची केंद्रीय मंत्री

First Published May 8, 2021, 6:30 PM IST
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अमेठी (उत्तर प्रदेश). कोरोना वायरस की दूसरी लहर में हर कोई इसकी चपेट में आ रहा है। एक दिन पहले रायबरेली के सलोन से भाजपा के विधायक रहे दल बहादुर कोरी की मौत हो गई थी। विधायक के निधन की खबर मिलते ही शनिवार को  केंद्रीय मंत्री व अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने उनके घर बिना सूचना दिए पहुंच गईं। जहां उन्होंने शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।
 

दरअसल,  स्मृति ईरानी का रायबरेली आने का यह कार्यक्रम इतना गोपनीय था कि यहां की पुलिस को भी इसकी जानकारी नहीं थी। वह सीधे दिवगंत विधायक के घर पहुंची और फोटो के सामने जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद कोरी की राजकुमारी उनके गले से लिपटकर रोने लगीं। जहां सांसद ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा में हमेशा आप लोगों के साथ खड़ी हूं। 

दरअसल,  स्मृति ईरानी का रायबरेली आने का यह कार्यक्रम इतना गोपनीय था कि यहां की पुलिस को भी इसकी जानकारी नहीं थी। वह सीधे दिवगंत विधायक के घर पहुंची और फोटो के सामने जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद कोरी की राजकुमारी उनके गले से लिपटकर रोने लगीं। जहां सांसद ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा में हमेशा आप लोगों के साथ खड़ी हूं। 


बता दें कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी  करीब 20 मिनट तक विधायक के घर पर रुकी हुई थीं। जहां उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों से मुलाकात कर बातचीत की और उन्होंने शोकाकुल परिवार को विश्वास जाताया कि वह हमेशा आपके साथ हैं। इसके बाद सांसद लखनऊ होते हुए दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
 


बता दें कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी  करीब 20 मिनट तक विधायक के घर पर रुकी हुई थीं। जहां उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों से मुलाकात कर बातचीत की और उन्होंने शोकाकुल परिवार को विश्वास जाताया कि वह हमेशा आपके साथ हैं। इसके बाद सांसद लखनऊ होते हुए दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
 

विधायक दल बहादुर कोरी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अमेठी में स्मृति ईरानी को जीताने में बड़ी भूमिका अदा की थी। यही कारण है कि स्मृति ईरानी के बेहद करीबी लोगों में दल बहादुर भी शामिल थे।
 

विधायक दल बहादुर कोरी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अमेठी में स्मृति ईरानी को जीताने में बड़ी भूमिका अदा की थी। यही कारण है कि स्मृति ईरानी के बेहद करीबी लोगों में दल बहादुर भी शामिल थे।
 


दल बहादुर कोरी पहली बार 1993 में विधायक बने थे। इसके बाद 1996 में दूसरी बार जीत हासिल करके वह राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में राज्य मंत्री बने। 2004 में दल बहादुर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि 2014 में वह फिर भारतीय जनता पार्टी  में शामिल हो गए थे। 2017 विधानसभा चुनाव में उन्होंने शानदार जीत हासिल की। 
 


दल बहादुर कोरी पहली बार 1993 में विधायक बने थे। इसके बाद 1996 में दूसरी बार जीत हासिल करके वह राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में राज्य मंत्री बने। 2004 में दल बहादुर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि 2014 में वह फिर भारतीय जनता पार्टी  में शामिल हो गए थे। 2017 विधानसभा चुनाव में उन्होंने शानदार जीत हासिल की। 
 


विधायक दल बहादुर कोरी का लखनऊ के निजी अस्पताल में 1 महीने से इलाज चल रहा था। उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी, लेकिन दोबारा वह पॉजिटिव हो गए और अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनका निधन हो गया।


विधायक दल बहादुर कोरी का लखनऊ के निजी अस्पताल में 1 महीने से इलाज चल रहा था। उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी, लेकिन दोबारा वह पॉजिटिव हो गए और अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनका निधन हो गया।

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