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लड़खड़ाते कदम, पसीने से लथपथ, पति को कंधे पर लादकर कानपुर से महाराष्ट्र चल पड़ी ये पत्नी

First Published Jun 3, 2020, 10:03 AM IST
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कानपुर(Uttar Pradesh).  देश में कोरोना संकट के बाद लॉकडाउन जारी है। लॉकडाउन के कारण लोगों का काम धंधा भी बंद पड़ गया है। हांलाकि सरकार ने अनलाक-1 में शर्तों के साथ काफी छूट दी है। जिससे अब जन-जीवन सामान्य हो रहा है। इन सब के बीच यूपी के कानपुर में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली है जिसको देखने के बाद लोगों की आंखें फटी रह गईं। यहां दुर्घटना में घायल हुए पति को उसकी पत्नी कंधों पर लादकर वापस घर ले जा रही है। पति पत्नी के बीच इस प्रेम की जिसने भी देखा वह तारीफ़ किए बगैर नही रह पाया।
 

यूपी के कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मंगलवार को पति-पत्नी के बीच का अटूट प्रेम और श्रद्धा देखने को मिली। तपती धूप में माथे से टपकता पसीना और पीठ पर अपने पति को लादे महिला जब कानपुर सेंट्रल पहुंची तो एक पल के लिए हर कोई उसे देखता रह गया।
 

यूपी के कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मंगलवार को पति-पत्नी के बीच का अटूट प्रेम और श्रद्धा देखने को मिली। तपती धूप में माथे से टपकता पसीना और पीठ पर अपने पति को लादे महिला जब कानपुर सेंट्रल पहुंची तो एक पल के लिए हर कोई उसे देखता रह गया।
 

महाराष्ट्र के जलगांव का रहने वाला दीपक कानपुर केस्को में श्रमिक का काम करता है, वह यहां अपनी पत्नी ज्योति के साथ रहता है। कोरोना महामारी के चलते जब पूरे देश में लॉकडाउन हो गया तो उनका भी कम बंद हो गया। जिसके बाद वे अपने घर जाना चाहते थे।

महाराष्ट्र के जलगांव का रहने वाला दीपक कानपुर केस्को में श्रमिक का काम करता है, वह यहां अपनी पत्नी ज्योति के साथ रहता है। कोरोना महामारी के चलते जब पूरे देश में लॉकडाउन हो गया तो उनका भी कम बंद हो गया। जिसके बाद वे अपने घर जाना चाहते थे।

लेकिन इसी बीच दीपक का गम्भीर रूप से एक्सीडेंट हो गया। इस दुर्घटना में दीपक के दोनों पैर टूट गए। पत्नी ज्योति ने किसी तरह से उसका इलाज शुरू करवाया। धीरे-धीरे पैसे भी खत्म हो गए। दीपक की चोट कुछ ठीक हुई तो उन्होंने अपने घर जाने की सोची।
 

लेकिन इसी बीच दीपक का गम्भीर रूप से एक्सीडेंट हो गया। इस दुर्घटना में दीपक के दोनों पैर टूट गए। पत्नी ज्योति ने किसी तरह से उसका इलाज शुरू करवाया। धीरे-धीरे पैसे भी खत्म हो गए। दीपक की चोट कुछ ठीक हुई तो उन्होंने अपने घर जाने की सोची।
 

लेकिन अभी भी दीपक चल नहीं सकता था। इसके बाद उसकी पत्नी ज्योति ही उसके लिए बैसाखी बनी। ज्योति किसी तरह से दीपक को लेकर कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची। वहां प्लेटफार्म पर जाने के लिए दीपक को उठाकर ले जाना पड़ता ।
 

लेकिन अभी भी दीपक चल नहीं सकता था। इसके बाद उसकी पत्नी ज्योति ही उसके लिए बैसाखी बनी। ज्योति किसी तरह से दीपक को लेकर कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची। वहां प्लेटफार्म पर जाने के लिए दीपक को उठाकर ले जाना पड़ता ।
 

जब ज्योति ने देखा कि उनके मदद के लिए वहां कोई नही है तो उसने पति दीपक को अपने कंधे पर उठा लिया। पसीने से लथपथ और लड़खड़ाते क़दमों से जब ज्योति पति दीपक को कंधे पर लादकर कानपुर सेंट्रल के प्लेटफार्म पर पहुंची तो लोग आश्चर्यचकित रह गए।मंगलवार को वह पुष्पक एक्सप्रेस से अपने पति को लेकर मुंबई रवाना हो गई।
 

जब ज्योति ने देखा कि उनके मदद के लिए वहां कोई नही है तो उसने पति दीपक को अपने कंधे पर उठा लिया। पसीने से लथपथ और लड़खड़ाते क़दमों से जब ज्योति पति दीपक को कंधे पर लादकर कानपुर सेंट्रल के प्लेटफार्म पर पहुंची तो लोग आश्चर्यचकित रह गए।मंगलवार को वह पुष्पक एक्सप्रेस से अपने पति को लेकर मुंबई रवाना हो गई।
 

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