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छुट्टियों में बच्चों के घर तक मिड-डे मील का राशन पहुंचाएगी योगी सरकार, कन्वर्जन के लिए भी मिलेंगे पैसे

First Published Jun 3, 2020, 3:21 PM IST
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लखनऊ(Uttar Pradesh).  बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी मिल डे मीड का राशनऔर कन्वर्जेंस कॉस्ट दी देने का फैसला लिया गया है। ये कन्वर्जेंस कॉस्ट बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में डाली जाएगी। सरकार ने ये फैसला किया है कि बच्चों के मिड-डे मील का राशन छुट्टियों में भी उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। ये जिम्मेदारी कोटेदारों को दी जा रही है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने मीडिया को ये जानकारी दी है।
 

यूपी की योगी सरकार ने प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ये फैसला किया है कि लॉकडाउन की अवधि और गर्मी की छुट्टियों के मिड डे मील का अनाज और कन्वर्जन कॉस्ट बच्चों के घर तक पहुंचाया जाएगा। प्राइमरी स्कूल के एक बच्चे को 76 दिन के लिए 374.29 रुपये और जूनियर में हर छात्र को 561.03 रुपये की कन्वर्जेंस कॉस्ट दी जाएगी। 

यूपी की योगी सरकार ने प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ये फैसला किया है कि लॉकडाउन की अवधि और गर्मी की छुट्टियों के मिड डे मील का अनाज और कन्वर्जन कॉस्ट बच्चों के घर तक पहुंचाया जाएगा। प्राइमरी स्कूल के एक बच्चे को 76 दिन के लिए 374.29 रुपये और जूनियर में हर छात्र को 561.03 रुपये की कन्वर्जेंस कॉस्ट दी जाएगी। 

 प्रदेश के बेसिक स्कूलों में लगभग 1 करोड़ 80 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इस हिसाब से बच्चों के अभिभावकों के खाते में करीब 780 करोड़ रुपये डाले जाएंगे। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने ये शासनादेश जारी किया है। इसके मुताबिक प्राइमरी के बच्चे को 7.60 किलोग्राम और जूनियर में प्रति छात्र 11.40 किलोग्राम राशन दिया जाएगा। ये राशन कोटेदारों के जरिये उन तक पहुंचाया जाएगा।
 

 प्रदेश के बेसिक स्कूलों में लगभग 1 करोड़ 80 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इस हिसाब से बच्चों के अभिभावकों के खाते में करीब 780 करोड़ रुपये डाले जाएंगे। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने ये शासनादेश जारी किया है। इसके मुताबिक प्राइमरी के बच्चे को 7.60 किलोग्राम और जूनियर में प्रति छात्र 11.40 किलोग्राम राशन दिया जाएगा। ये राशन कोटेदारों के जरिये उन तक पहुंचाया जाएगा।
 

इसके लिए स्कूल के प्रधानाचार्य प्राधिकार पत्र जारी करेंगे। प्राधिकार पत्र में स्कूल, बच्चे का नाम, पंजीयन संख्या, कक्षा और खाद्यान्न की मात्रा अंकित होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए एक वक्त में 2-3 अभिभावकों को स्कूल बुलाकर इसे वितरित किया जाएगा।

इसके लिए स्कूल के प्रधानाचार्य प्राधिकार पत्र जारी करेंगे। प्राधिकार पत्र में स्कूल, बच्चे का नाम, पंजीयन संख्या, कक्षा और खाद्यान्न की मात्रा अंकित होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए एक वक्त में 2-3 अभिभावकों को स्कूल बुलाकर इसे वितरित किया जाएगा।

मिड डे मील में खाद्यान्न में गेहूं और चावल मिलता है, जबकि वहीं कन्वर्जेंस कॉस्ट दाल, सब्जी, मसाला, तेल, खाना पकाने के ईंधन आदि में खर्च होती है। मेन्यू में चार दिन चावल और दो दिन गेहूं से बने व्यंजन दिए जाते हैं ।

मिड डे मील में खाद्यान्न में गेहूं और चावल मिलता है, जबकि वहीं कन्वर्जेंस कॉस्ट दाल, सब्जी, मसाला, तेल, खाना पकाने के ईंधन आदि में खर्च होती है। मेन्यू में चार दिन चावल और दो दिन गेहूं से बने व्यंजन दिए जाते हैं ।

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए 24 मार्च से ही बेसिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है। तब से स्कूल 30 जून तक बंद रहने वाले हैं। गर्मी की छुट्टियों और लॉकडाउन के चलते जितने भी दिन स्कूल बंद रहे, उसका राशन और कन्वर्जेंस कॉस्ट सरकार बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए दे रही है। 30 जून तक हर बच्चे के घर तक राशन और कन्वर्जेंस कॉस्ट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए 24 मार्च से ही बेसिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है। तब से स्कूल 30 जून तक बंद रहने वाले हैं। गर्मी की छुट्टियों और लॉकडाउन के चलते जितने भी दिन स्कूल बंद रहे, उसका राशन और कन्वर्जेंस कॉस्ट सरकार बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए दे रही है। 30 जून तक हर बच्चे के घर तक राशन और कन्वर्जेंस कॉस्ट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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