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लॉकडाउन में छलका सेक्स वर्कर्स का दर्द: कोई जिस्म छूने को तैयार नहीं, HIV से भी बुरा है कोरोना

First Published Apr 20, 2020, 5:36 PM IST
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हटके डेस्क: दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है। कई देशों को इस जानलेवा वायरस के कारण लॉकडाउन कर दिया गया  है। इस वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है। कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन ने बेरोजगारी बढ़ा दी है। इस वायरस से बचने के लिए लोग घरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं। इस बीच एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट में रहने वाली सेक्स वर्कर्स की लाइफ काफी बुरी हो चुकी है। हम बात कर रहे हैं कोलकाता के सोनागाछी की। कोरोना के कारण अब यहां कोई भी ग्राहक नहीं आ रहा। सेक्स वर्कर्स की कमाई नहीं हो रही और उनके सामने भूख से मरने की नौबत आ गई है। 

कोलकाता से 10 किलोमीटर दूर सोनागाछी की गलियां कभी लोगों से भरी रहती थी।  इन गलियों में सेक्स वर्कर्स का धंधा दिन-रात चलता था। 
 

कोलकाता से 10 किलोमीटर दूर सोनागाछी की गलियां कभी लोगों से भरी रहती थी।  इन गलियों में सेक्स वर्कर्स का धंधा दिन-रात चलता था। 
 

लेकिन अब इन गलियों में सन्नाटा पसरा है। वजह है, कोरोना वायरस। कोरोना के कारण अब कोई भी इन गलियों में नहीं आता। 
 

लेकिन अब इन गलियों में सन्नाटा पसरा है। वजह है, कोरोना वायरस। कोरोना के कारण अब कोई भी इन गलियों में नहीं आता। 
 

सेक्स वर्कर्स की रोटी जिस्म बेचकर आती थी। लेकिन वायरस के डर से अब कोई इनके नजदीक भी नहीं आता। 

सेक्स वर्कर्स की रोटी जिस्म बेचकर आती थी। लेकिन वायरस के डर से अब कोई इनके नजदीक भी नहीं आता। 

कोलकाता में कोरोना के कई मामले सामने आए हैं। इनमें से एक शख्स की मौत हो गई, जो लंदन से लौटे एक व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस की चपेट में आया था।  

कोलकाता में कोरोना के कई मामले सामने आए हैं। इनमें से एक शख्स की मौत हो गई, जो लंदन से लौटे एक व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस की चपेट में आया था।  

सोनागाछी में रहने वाली 8 हजार महिलाओं का परिवार धंधे से चलता था। लेकिन अब इनके सामने एक वक्त की रोटी के लाले पड़ गए हैं। 

सोनागाछी में रहने वाली 8 हजार महिलाओं का परिवार धंधे से चलता था। लेकिन अब इनके सामने एक वक्त की रोटी के लाले पड़ गए हैं। 

सोनागाछी में रात के साथ लोगों की भीड़ बढ़ती थी। हर दिन यहां 15 से 20 हजार लोग आते थे। लेकिन अब यहां सन्नाटा है। 

सोनागाछी में रात के साथ लोगों की भीड़ बढ़ती थी। हर दिन यहां 15 से 20 हजार लोग आते थे। लेकिन अब यहां सन्नाटा है। 

बताया जा रहा है कि इतिहास में पहली बार यहां इतनी वीरान गलियां देखने को मिल रही है। यहां रहने वाली महिलाएं भारत के अलावा बांग्लादेश से भी आई हुई हैं।  

बताया जा रहा है कि इतिहास में पहली बार यहां इतनी वीरान गलियां देखने को मिल रही है। यहां रहने वाली महिलाएं भारत के अलावा बांग्लादेश से भी आई हुई हैं।  

कई महिलाओं का पूरा परिवार इसी से चलता था। उनके बच्चे आज भूख से बिलबिला रहे हैं। 

कई महिलाओं का पूरा परिवार इसी से चलता था। उनके बच्चे आज भूख से बिलबिला रहे हैं। 

मौत की कगार पर पहुँच चुकी इन महिलाओं के लिए सरकार ने कोई ख़ास प्रबंध नहीं किया है। जिस वजह से इनके सामने काफी परेशानियां आ गई हैं।  
 

मौत की कगार पर पहुँच चुकी इन महिलाओं के लिए सरकार ने कोई ख़ास प्रबंध नहीं किया है। जिस वजह से इनके सामने काफी परेशानियां आ गई हैं।  
 

हालांकि, कुछ एनजीओ ने इन महिलाओं के बीच राशन और खाने-पीने की चीजें बांटी है। लेकिन इन्होने सरकार से मदद मांगी है। 

हालांकि, कुछ एनजीओ ने इन महिलाओं के बीच राशन और खाने-पीने की चीजें बांटी है। लेकिन इन्होने सरकार से मदद मांगी है। 

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