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चीन में मुंहमांगे दाम में बिकता है महिला का गर्भनाल, फिर इससे तैयार किया जाता है मर्दानगी बढ़ाने वाला काढ़ा

First Published Jun 24, 2020, 1:30 PM IST
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फ़ूड डेस्क: दुनिया में इन दिनों चीन सबके निशाने पर है। कोरोना वायरस फैला कर चीन ने दुनिया को मौत का तोहफा दे दिया है। भारी विवाद के बाद चीन ने चमगादड़, सांप जैसे कई जानवरों के खाने पर रोक लगा दी है। चीन में हर साल विवादित डॉग मीट फेस्ट का भी आयोजन किया जाता है। लेकिन इस साल उम्मीद थी कि कोरोना के कारण इस पर रोक लगेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चीन में इस साल भी चोरी-छिपे इस फेस्ट का आयोजन हो ही रहा है। चीन ना सिर्फ कुत्ते-बिल्ली, बल्कि गर्भनाल भी खा जाते हैं। चीन के लोगों के अनुसार इससे बने काढ़े को पीने से मर्दानगी बढ़ती है। साथ ही ये ताकत बढ़ाने का अचूक उपाय है। देखिये हैवान चीन में कैसे धड़ल्ले से बिकता है प्लासेंटा यानी गर्भनाल का सूप। 
 

दुनिया में इंसानों के अलावा लगभग हर मैमल अपने बच्चे को जन्म देने के बाद गर्भनाल को खा जाती है। लेकिन इंसान ऐसा नहीं करते। 
 

दुनिया में इंसानों के अलावा लगभग हर मैमल अपने बच्चे को जन्म देने के बाद गर्भनाल को खा जाती है। लेकिन इंसान ऐसा नहीं करते। 
 

दुनिया में चीन एक ऐसा देश है जहां की पारंपरिक दवाइयों में प्लासेंटा भी शामिल है। पुराने समय से ही यहां प्लासेंटा को खाया जाता है। 

दुनिया में चीन एक ऐसा देश है जहां की पारंपरिक दवाइयों में प्लासेंटा भी शामिल है। पुराने समय से ही यहां प्लासेंटा को खाया जाता है। 

महिलाओं को अपना प्लासेंटा खाने को कहा जाता है। चीन के लोगों के मुताबिक, इसे खाने से महिलाओं में प्रसव के बाद आई कमजोरी दूर हो जाती है। 

महिलाओं को अपना प्लासेंटा खाने को कहा जाता है। चीन के लोगों के मुताबिक, इसे खाने से महिलाओं में प्रसव के बाद आई कमजोरी दूर हो जाती है। 

साथ ही प्लासेंटा खाने से नई मां का ज्यादा दूध बनता है। इससे बच्चे को ब्रेस्टफीड करने में आसानी होती है। 

साथ ही प्लासेंटा खाने से नई मां का ज्यादा दूध बनता है। इससे बच्चे को ब्रेस्टफीड करने में आसानी होती है। 

इसके अलावा कुछ नर्सें महिलाओं की डिलीवरी के बाद उसका प्लासेंटा चुरा लेती हैं। इसके बाद वो इन्हें मार्केट में मुंहमांगे दाम में बेचती हैं। 
 

इसके अलावा कुछ नर्सें महिलाओं की डिलीवरी के बाद उसका प्लासेंटा चुरा लेती हैं। इसके बाद वो इन्हें मार्केट में मुंहमांगे दाम में बेचती हैं। 
 

चीन में प्लासेंटा से कैप्सूल्स भी बनते हैं। ये मार्केट में 14 हजार रूपये में बेची जाती है। साथ ही इसे फलों में मिलाकर इसकी स्मूथी भी बेची जाती है। उसकी कीमत करीब 23 सौ है। 

चीन में प्लासेंटा से कैप्सूल्स भी बनते हैं। ये मार्केट में 14 हजार रूपये में बेची जाती है। साथ ही इसे फलों में मिलाकर इसकी स्मूथी भी बेची जाती है। उसकी कीमत करीब 23 सौ है। 

चीन के लोगों के मुताबिक, प्लासेंटा से बना काढ़ा पीने से कमजोरी नहीं होती। साथ ही यहां पुरुष भी इससे बना काढ़ा चाव से पीते हैं। कहा जाता है कि इसे मर्दानगी बढ़ाई जाती है। 
 

चीन के लोगों के मुताबिक, प्लासेंटा से बना काढ़ा पीने से कमजोरी नहीं होती। साथ ही यहां पुरुष भी इससे बना काढ़ा चाव से पीते हैं। कहा जाता है कि इसे मर्दानगी बढ़ाई जाती है। 
 

हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कई डॉक्टर्स ने इसे खतरनाक बताया। उनका कहना है कि इससे इन्फेक्शन के चान्सेस ज्यादा है। 
 

हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कई डॉक्टर्स ने इसे खतरनाक बताया। उनका कहना है कि इससे इन्फेक्शन के चान्सेस ज्यादा है। 
 

चीन के कारण इन दिनों दुनिया में कोरोना का प्रकोप फैला है। चीन का कहना है कि चमगादड़ का मांस खाने की वजह से कोरोना फैला है। इसके बावजूद यहां अभी भी धड़ल्ले से कुत्ते-बिल्ली सहित चमगादड़ का भी मांस बेचा जा रहा है। 
 

चीन के कारण इन दिनों दुनिया में कोरोना का प्रकोप फैला है। चीन का कहना है कि चमगादड़ का मांस खाने की वजह से कोरोना फैला है। इसके बावजूद यहां अभी भी धड़ल्ले से कुत्ते-बिल्ली सहित चमगादड़ का भी मांस बेचा जा रहा है। 
 

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