138 साल पहले मुंबई में आया था रहस्यमय तूफान, 1 लाख लोग मारे गए लेकिन किसी ने नहीं देखा
हटके डेस्क: साल 2020 में एक के बाद एक कई मुसीबतें बस दुनिया पर टूटती जा रही है। कई लोग अब इस साल से त्रस्त होकर इसके जल्द खत्म होने की राह देख रहे हैं। भारत भी इस साल की मनहूसियत से बच नहीं पाया है। कोरोना ने जहां देश में तेजी से पैर पसारने शुरू कर दिया है वहीं पहले अम्फान और अब मुंबई में निसर्ग तूफान तबाही मचाने वाला है। मुंबई में आया ये तूफ़ान हैरान करने वाला इसलिए भी है कि रिकार्ड्स के मुताबिक, आजतक कभी भी इस शहर ने तूफान नहीं झेला है। ऐसे में अचानक 2020 में आ रही ये तबाही दुनिया को खत्म करने की तरफ ही एक इशारा समझा जा रहा है। हालांकि, मुंबई में रहने वाले लोगों के बीच आज से 138 साल पहले आए एक तूफान की कहानी काफी मशहूर है। लोगों का कहना है कि इस तूफान में एक लाख लोगों की जान गई थी। लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि इस तूफ़ान का कोई सबूत किसी भी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। आइये आपको बताते हैं आज 138 साल पहले आए इस रहस्यमय तूफ़ान के बारे में...

3 जून 2020 को भारत के मुंबई में निसर्ग तूफ़ान का टकराना कई मायनों में अजीब है। आज तक के रिकार्ड्स के मुताबिक, कभी भी मुंबई में तूफ़ान नहीं आया है। ऐसे में इस साल अचानक निसर्ग तूफ़ान का टकराना वाकई हैरान करने वाला है।
मुंबई में रहने वालों की मानें, तो कहानियों में उन्होंने मुंबई में 1882 में आए तूफ़ान के बारे में खूब सुना है। कहा जाता है कि ये भारत के इतिहास का अबतक का सबसे तबाही मचाने वाला तूफ़ान था। इसे ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन के नाम से जाना जाता है।
कहा जाता है कि 6 जून 1882 में आए इस तूफ़ान में एक लाख लोगों की जान गई थी। लेकिन ये तूफ़ान रहस्य में भी दफ़न रह गया। इसका अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। जिस तूफ़ान के बारे में इतनी कहानियां सुनी-सुनाई जाती है, वो आया था भी या नहीं, इसका कोई सबूत नहीं है।
2019 में अमेरिका, मेसाचुसेट्स और पुणे की एक यूनिवर्सिटी ने रिसर्च किया, जिसमें ये कहा गया कि 1882 में कोई तूफान नहीं आया था। इसमें कहा गया कि मौसम विभाग के रिकार्ड्स के मुताबिक, 1877-1970 तक ऐसे किसी तूफ़ान का कोई जिक्र नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर ऐसा कोई तूफ़ान आया होता, जिसमें एक लाख लोगों की जान गई होती, तो अंग्रेजों के पास भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में इस तूफ़ान के दावे खोखले हैं।
लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व डायरेक्टर का कहना 1882 में तूफ़ान आया था। ये कोई धोखा नहीं था। उन्होंने बताया कि उस समय सुचना का प्रसारण ठीक से नहीं हो पाता था। इस कारण इसे रिकॉर्ड नहीं किया जा सका।
उन्होंने दावा किया कि इस तूफ़ान में कई बंदरगाह तबाह हो गए थे। कई इतिहासकारों ने भी इस तूफ़ान की पुष्टि की है।
कई इतिहासकारों का दावा है कि मुंबई में आए उस तूफ़ान के कारण एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। इस कारण एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। तो कुछ इसे अफवाह ही कह रहे हैं।
अब चाहे सच्चाई जो हो, निसर्ग तूफ़ान ऑन रिकॉर्ड मुंबई में आया पहला तूफ़ान ही माना जाएगा। बाकी 1882 के तूफ़ान को लेकर जारी रहेगी तो सिर्फ अफवाहें।
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