गोवा में मिला 'संजीवनी बूटी' वाला पहाड़, रात के गहरे अंधेरे में दूर से चमकता देता है दिखाई

First Published 13, Sep 2020, 10:04 AM

हटके डेस्क: रामायण में हमने संजीवनी बूटी वाले पहाड़ के बारे में सुना था। कहा जाता है कि इस पहाड़ पर जिंदगी बचाने वाली औषधी थी। साथ ही ये पहाड़ अंधेरे में चमकता था। विश्वास के आधार पर हम इस बात पर विश्वास करते हैं। अब गोवा में एक ऐसे पहाड़ के बारे में पता चला है जो वाकई अंधेरे में चमकता है। हालांकि, इस पहाड़ पर कोई जान बचाने वाली औषधी नहीं है। ये पहाड़ चमकता है एक ख़ास तरफ के मशरूम की वजह से। जी हां, गोवा (Goa) के जंगल में एक ऐसा पहाड़ मिला है, जिसपर लगे मशरूम (Mushrooms) रात के अंधेरे में हरे रंग में चमकते है। साथ ही कभी-कभी ये बैंगनी रंग में भी बदल जाते हैं। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग इसे मॉडर्न जमाने की संजीवनी बूटी बता रहे हैं। 
 

<p>दुनिया में पेड़-पौधों से लेकर जानवरों की दुनिया में कई तरह की प्रजातियां है। आए दिन रिसर्चर्स नई प्रजातियों की &nbsp;खोज करते रहते हैं। हाल ही में एक ऐसा मशरूम मिला है जो चमकता है। जी हां, इस मशरूम से हरे और बैंगनी रंग की लाइट निकलती है।&nbsp;</p>

दुनिया में पेड़-पौधों से लेकर जानवरों की दुनिया में कई तरह की प्रजातियां है। आए दिन रिसर्चर्स नई प्रजातियों की  खोज करते रहते हैं। हाल ही में एक ऐसा मशरूम मिला है जो चमकता है। जी हां, इस मशरूम से हरे और बैंगनी रंग की लाइट निकलती है। 

<p>इस मशरूम का नाम बायो-ल्यूमिनिसेंट है। ये गोवा के जंगलों में मिलता है। इसके अलावा अभी तक मशरूम की प्रजाति के बारे में कहीं और से कोई जानकारी नहीं मिली है।&nbsp;</p>

इस मशरूम का नाम बायो-ल्यूमिनिसेंट है। ये गोवा के जंगलों में मिलता है। इसके अलावा अभी तक मशरूम की प्रजाति के बारे में कहीं और से कोई जानकारी नहीं मिली है। 

<p>मशरूम की इस प्रजाति को अभी गोवा के म्हाडेई वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Mhadei Wildlife Sanctuary) में देखा गया है। चूंकि, ये मशरूम संजीवनी बूटी वाले पहाड़ की तरह ही जगह को जगमग करता है, &nbsp;इसे महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी भी कहते हैं।&nbsp;</p>

मशरूम की इस प्रजाति को अभी गोवा के म्हाडेई वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Mhadei Wildlife Sanctuary) में देखा गया है। चूंकि, ये मशरूम संजीवनी बूटी वाले पहाड़ की तरह ही जगह को जगमग करता है,  इसे महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी भी कहते हैं। 

<p>ये सेंचुरी पश्चिमी घाट के पास है। &nbsp;रिसर्चर्स इस मशरूम के बारे में जानकारी इकक्ठा हर रहे हैं। अभी तक पता चला है कि चमकने वाले ये मशरूम माइसेना जीनस (Mycena Genus) प्रजाति के हैं।&nbsp;</p>

ये सेंचुरी पश्चिमी घाट के पास है।  रिसर्चर्स इस मशरूम के बारे में जानकारी इकक्ठा हर रहे हैं। अभी तक पता चला है कि चमकने वाले ये मशरूम माइसेना जीनस (Mycena Genus) प्रजाति के हैं। 

<p>दिन के समय ये आम मशरूम की तरह नजर आते हैं। लेकिन रात होते ही ये हरे रंग के दिखने लगते हैं। साथ ही बीच-बीच में ये मशरूम बैंगनी रंग में भी बदल जाते हैं।&nbsp;</p>

दिन के समय ये आम मशरूम की तरह नजर आते हैं। लेकिन रात होते ही ये हरे रंग के दिखने लगते हैं। साथ ही बीच-बीच में ये मशरूम बैंगनी रंग में भी बदल जाते हैं। 

<p>ये मशरूम ख़ास वजह से चमकते हैं। दरअसल, ये मशरूम अपनी तादाद बढ़ाने के लिए चमकते हैं। रिसर्चर्स का कहना है कि इस रौशनी की वजह से कीड़े इसपर बैठकर दूसरे जगहों पर जाकर इनके बीज फैलाते हैं।&nbsp;</p>

ये मशरूम ख़ास वजह से चमकते हैं। दरअसल, ये मशरूम अपनी तादाद बढ़ाने के लिए चमकते हैं। रिसर्चर्स का कहना है कि इस रौशनी की वजह से कीड़े इसपर बैठकर दूसरे जगहों पर जाकर इनके बीज फैलाते हैं। 

<p>इन मशरूम को फैलाने में कीड़ों का काफी बड़ा रोल है। ये कीड़े ही इसे जंगल में एक से दूसरे जगह पर फैलाते हैं। ये मशरूम दूसरे पौधों-पेड़ों की छाल, &nbsp;जमीन की नमी में पनपते हैं। &nbsp;</p>

इन मशरूम को फैलाने में कीड़ों का काफी बड़ा रोल है। ये कीड़े ही इसे जंगल में एक से दूसरे जगह पर फैलाते हैं। ये मशरूम दूसरे पौधों-पेड़ों की छाल,  जमीन की नमी में पनपते हैं।  

<p>अभी तक दुनिया में रोशनी वाले करीब 50 मशरूम की प्रजाति के बारे में पता चला है। गोवा में मिली प्रजाति को सिर्फ बारिश के महीने में ही देखा जाता है। इसे ढूंढना मुश्किल नहीं है क्यूंकि ये आसानी से जंगल में रात को दिख जाएंगे।&nbsp;</p>

अभी तक दुनिया में रोशनी वाले करीब 50 मशरूम की प्रजाति के बारे में पता चला है। गोवा में मिली प्रजाति को सिर्फ बारिश के महीने में ही देखा जाता है। इसे ढूंढना मुश्किल नहीं है क्यूंकि ये आसानी से जंगल में रात को दिख जाएंगे। 

<p>इस मशरूम को सबसे पहले गोवा में रहने वाली एक लोकल महिला ने ही देखा था। उसने अँधेरे में चमकती चीज को पास से देखा तो पाया कि वो मशरूम है। उसने इसकी फोटोज ली और उसे रिसर्चर्स को भेज दिया।&nbsp;</p>

इस मशरूम को सबसे पहले गोवा में रहने वाली एक लोकल महिला ने ही देखा था। उसने अँधेरे में चमकती चीज को पास से देखा तो पाया कि वो मशरूम है। उसने इसकी फोटोज ली और उसे रिसर्चर्स को भेज दिया। 

<p>ये मशरूम 21 से 27 डिग्री सेल्सियस में ग्रो करते हैं। साथ ही नमी की काफी जरुरत होती है। बारिश में ये काफी ज्यादा पाए जाते हैं। जिस एरिया में ये बहुत अधिक होते हैं, वहां रात को दूर से पूरा एरिया हरे रंग का नजर आता है।&nbsp;</p>

ये मशरूम 21 से 27 डिग्री सेल्सियस में ग्रो करते हैं। साथ ही नमी की काफी जरुरत होती है। बारिश में ये काफी ज्यादा पाए जाते हैं। जिस एरिया में ये बहुत अधिक होते हैं, वहां रात को दूर से पूरा एरिया हरे रंग का नजर आता है। 

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