भारत में नौकरी की सुरक्षा घट रही है। बेंगलुरु के एक युवक को प्रोबेशन खत्म होने से पहले निकाल दिया गया। उसकी टीम को हटाने की योजना 10 महीने से थी, जिसे उसने कंपनियों का 'नैतिक दिवालियापन' कहा।

दियों पहले दुनिया भर में हुए मजदूर आंदोलनों से ही नौकरी की सुरक्षा का विचार एक जरूरत के रूप में सामने आया। इसके बाद, ज्यादातर देशों ने आम मजदूरों की नौकरी बचाने के लिए खास कानून बनाए। लेकिन, कोविड के बाद कई देशों ने इन कानूनों को नजरअंदाज कर दिया। इससे कंपनी मालिकों के लिए ज्यादा मुनाफा कमाने के रास्ते खुल गए। इसका नतीजा यह हुआ कि कई कंपनियों में सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को भी मामूली वजहें बताकर एक ही दिन में बेरोजगार कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत जैसे देश में यह चलन हाल ही में बढ़ा है।

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नैतिक दिवालियापन

बेंगलुरु के रहने वाले जीवन नाम के एक युवक ने जब सोशल मीडिया पर अपने साथ हुआ ऐसा ही एक अनुभव शेयर किया, तो वह वायरल हो गया। उन्होंने शिकायत की कि तीन महीने का प्रोबेशन खत्म होने से कुछ दिन पहले ही उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। अपने वीडियो में वह बेंगलुरु के जॉब सेक्टर में नैतिक दिवालियापन के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि जब उन्हें कंपनी के मालिक से पता चला कि उनकी टीम को खत्म करने का फैसला लगभग 10 महीने से विचाराधीन था, तो वह हैरान रह गए, जबकि उन्होंने इस नौकरी के लिए अपना खून-पसीना एक कर दिया था। जीवन यह भी पूछते हैं कि जब स्टार्टअप ने पहले से ही पदों को खत्म करने की योजना बना ली थी, तो वह बार-बार नए कर्मचारियों को क्यों रख रहा था।

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पहले से फैसला, फिर भी...

युवक अपने वीडियो में शिकायत करते हुए कहता है कि उसे 3 महीने का प्रोबेशन पूरा होने से कुछ दिन पहले ही कंपनी से निकाल दिया गया। उसने कहा, "मैंने इस नौकरी के लिए अपना खून-पसीना एक कर दिया। मैंने हफ्ते के सातों दिन, दिन में दस घंटे काम किया। फिर भी, कल (30 जनवरी को) कंपनी के मालिक ने बताया कि मेरी टीम को निकालने की चर्चा 10 महीने से चल रही थी।" युवक पूछता है कि अगर मैनेजमेंट को यह पहले से पता था, तो फिर नए लोगों को काम पर क्यों रखा गया। उसने आगे कहा कि यह कोई बिजनेस का फैसला नहीं है, बल्कि नैतिक दिवालियापन है। जीवन कहता है, "आप लोगों को एक डूबते जहाज पर ले आए, उनसे कुछ महीनों की मेहनत निचोड़ ली, और आखिर में उन्हें बैलेंस शीट की संपत्ति की तरह छोड़ दिया।"

नौकरी की सुरक्षा एक सपना

मुझे डेढ़ महीने का सेवरेंस पैकेज ऑफर किया गया और कहा गया कि मुझे इसके लिए शुक्रगुजार होना चाहिए। लेकिन मेरे करियर में आए इस गैप का और मेरे मानसिक तनाव का कौन जवाब देगा? जीवन पूछता है। जीवन याद दिलाता है कि आज के समय में नौकरी की सुरक्षा एक सपना हो सकती है, लेकिन बुनियादी पेशेवर ईमानदारी ऐसी नहीं होनी चाहिए। वह आगे कहता है कि अगर हम छंटनी की योजनाओं के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तो कुछ भी नहीं बदलेगा। उसने स्टार्टअप संस्थापकों के लिए एक नोट के साथ अपना वीडियो खत्म किया। 'आपने अपने नंबरों को फेल नहीं किया। लेकिन, आप अपने लोगों को फेल कर गए।' जीवन ने अपने नोट में लिखा। जीवन के इस नोट को सोशल मीडिया पर खूब सपोर्ट मिला।