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कोरोना से मौत और संक्रमण में टॉप पर अमेरिका, 24 घंटे में 18 सौ मौतें, कब्र में एकसाथ दफनाई जा रही लाशें

First Published Apr 12, 2020, 11:05 AM IST
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न्यूयॉर्क. कोरोना वायरस के कहर से दुनिया के 210 देश प्रभावित हैं। कोरोना के संक्रमण से दुनिया भर में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 18 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। चीन, इटली और स्पेन के बाद अब अमेरिका में कोरोना वायरस कहर बनकर टूटा है। जिसके बाद संक्रमण और मौत के मामले में अमेरिका दुनिया का पहला देश बना गया है। जहां 5 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। जबकि 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर कोरोना के कारण भयंकर तबाही के दौर से गुजर रहा है। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका में इतनी ज्यादा मौतें हुई हैं कि लाशों को दफनाने के लिए जगह तक नहीं मिल रही है। वहां लोगों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान कम पड़ रहे हैं। जिसका तस्वीरों में खुलासा हुआ है। 

न्यूयॉर्क सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से एक बन चुका है। हाल ही में कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जो काफी भयावह और खतरनाक नजर आ रहे हैं। न्यूयॉर्क में नए कब्रिस्तान बनाए जा रहे हैं ताकि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की मौत के बाद उन्हें दफनाया जा सके।

न्यूयॉर्क सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से एक बन चुका है। हाल ही में कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जो काफी भयावह और खतरनाक नजर आ रहे हैं। न्यूयॉर्क में नए कब्रिस्तान बनाए जा रहे हैं ताकि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की मौत के बाद उन्हें दफनाया जा सके।

विदेशी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क के हार्ट आइलैंड पर एक सामूहिक कब्र बनाई गई है, जहां लोगों को सामुहिक रूप में दफनाया गया है।

विदेशी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क के हार्ट आइलैंड पर एक सामूहिक कब्र बनाई गई है, जहां लोगों को सामुहिक रूप में दफनाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, यहां उन लोगों को दफनाया जाता था जो लावारिस मिलते हैं या जिनके परिवार उनके फ्यूनरल का खर्च नहीं उठा सकते है। लेकिन कोरोना वायरस से लगातार हो रही मौतों के बाद शवों की संख्या बढ़ती जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, यहां उन लोगों को दफनाया जाता था जो लावारिस मिलते हैं या जिनके परिवार उनके फ्यूनरल का खर्च नहीं उठा सकते है। लेकिन कोरोना वायरस से लगातार हो रही मौतों के बाद शवों की संख्या बढ़ती जा रही है।

विदेशी मीडिया के मुताबिक पहले हफ्ते में एक दिन लाशें दफनाई जाती थीं लेकिन अब 5 दिनों तक लगातार लाशें दफनाई जाती हैं।

विदेशी मीडिया के मुताबिक पहले हफ्ते में एक दिन लाशें दफनाई जाती थीं लेकिन अब 5 दिनों तक लगातार लाशें दफनाई जाती हैं।

ड्रोन कैमरे से मिली फुटेज में देखा जा सकता है कि सभी लाशों को एक साथ दफनाया जा रहा है। ये तस्वीरें खुद कोरोना के कहर को बता रही हैं।

ड्रोन कैमरे से मिली फुटेज में देखा जा सकता है कि सभी लाशों को एक साथ दफनाया जा रहा है। ये तस्वीरें खुद कोरोना के कहर को बता रही हैं।

कोरोना वायरस से जिस प्रकार लगातार लोगों की मौत हो रही है और लाशों को सामुहिक रूप से दफनाए जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। उसके बाद से लोग लगातार डर के साए में जी रहे हैं।

कोरोना वायरस से जिस प्रकार लगातार लोगों की मौत हो रही है और लाशों को सामुहिक रूप से दफनाए जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। उसके बाद से लोग लगातार डर के साए में जी रहे हैं।

शवों को दफनाने के लिए मृतकों को पार्थिव शरीर को थैलियों में लपेटा जाता है और देवदार के ताबूत में रखा जाता है। प्रत्येक ताबूत पर मृतक का नाम बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी मृतक के शरीर को दोबारा ढूंढने में मदद मिले।

शवों को दफनाने के लिए मृतकों को पार्थिव शरीर को थैलियों में लपेटा जाता है और देवदार के ताबूत में रखा जाता है। प्रत्येक ताबूत पर मृतक का नाम बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी मृतक के शरीर को दोबारा ढूंढने में मदद मिले।

कोरोना का कहर ऐसा है कि मृतकों के शवों को दफनाने के लिए मशीनों से कब्रें खोदी गईं हैं। मशीनों से खोदी गई लंबी संकरी खाई में गाड़ियों की मदद से शवों को दफन किया जा रहा है।

कोरोना का कहर ऐसा है कि मृतकों के शवों को दफनाने के लिए मशीनों से कब्रें खोदी गईं हैं। मशीनों से खोदी गई लंबी संकरी खाई में गाड़ियों की मदद से शवों को दफन किया जा रहा है।

तस्वीरों से साफ है कि सेफ सूट पहन श्रमिक मरने वाले लोगों को ताबूतों में दफना रहे हैं। आमतौर पर, कम वेतन वाले रीकर्स आइलैंड पर जेल के कैदी शवों को दफनाने का काम कर रहे थे लेकिन कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद दूसरे श्रमिकों को लगाया गया है।

तस्वीरों से साफ है कि सेफ सूट पहन श्रमिक मरने वाले लोगों को ताबूतों में दफना रहे हैं। आमतौर पर, कम वेतन वाले रीकर्स आइलैंड पर जेल के कैदी शवों को दफनाने का काम कर रहे थे लेकिन कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद दूसरे श्रमिकों को लगाया गया है।

गुरुवार को, अधिकारियों ने बताया कि उनके पास शहर के कब्रिस्तान में COVID-19 से संक्रमित रोगियों के मौत के बाद उन्हें दफनाने के सिवाए कोई रास्ता नहीं बचा है।

गुरुवार को, अधिकारियों ने बताया कि उनके पास शहर के कब्रिस्तान में COVID-19 से संक्रमित रोगियों के मौत के बाद उन्हें दफनाने के सिवाए कोई रास्ता नहीं बचा है।

न्यूयॉर्क सिटी ने हाल ही में पॉलिसी चेंज की है। नई पॉलिसी के तहत, मेडिकल परीक्षक/ मेडिकल एग्जामिनर केवल शव को 14 दिनों के लिए ही स्टोरेज में रख सकते हैं। इसके बाद उन्हें हार्ट आइलैंड में दफना दिया जाएगा। वहीं अस्पतालों में लाशें रखने के लिए भी अब जगह नहीं बची है। उन्हें बाहर रेफ्रिजेरेटेड ट्रकों में रखा जा रहा है।

न्यूयॉर्क सिटी ने हाल ही में पॉलिसी चेंज की है। नई पॉलिसी के तहत, मेडिकल परीक्षक/ मेडिकल एग्जामिनर केवल शव को 14 दिनों के लिए ही स्टोरेज में रख सकते हैं। इसके बाद उन्हें हार्ट आइलैंड में दफना दिया जाएगा। वहीं अस्पतालों में लाशें रखने के लिए भी अब जगह नहीं बची है। उन्हें बाहर रेफ्रिजेरेटेड ट्रकों में रखा जा रहा है।

रीकर्स द्वीप के कैदियों को आमतौर पर हार्ट द्वीप पर कब्र खोदने के लिए लाया जाता है, लेकिन सुधार विभाग ने उन मजदूरों को कोरोना प्रकोप के कारण हटा दिया है।

रीकर्स द्वीप के कैदियों को आमतौर पर हार्ट द्वीप पर कब्र खोदने के लिए लाया जाता है, लेकिन सुधार विभाग ने उन मजदूरों को कोरोना प्रकोप के कारण हटा दिया है।

Department of Corrections  के प्रेस सचिव जेसन कर्स्टन ने एक स्थानीय अंग्रेजी वेबसाइट को बताया, 'सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा कारणों से, हिरासत में लिए गए शहर के लोग महामारी में मारे गए लोगों को दफनाने में मदद नहीं कर रहे हैं। अब कॉन्ट्रैक्ट मजदूर DOC की देखरेख में यह कार्य कर रहे हैं।

Department of Corrections के प्रेस सचिव जेसन कर्स्टन ने एक स्थानीय अंग्रेजी वेबसाइट को बताया, 'सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा कारणों से, हिरासत में लिए गए शहर के लोग महामारी में मारे गए लोगों को दफनाने में मदद नहीं कर रहे हैं। अब कॉन्ट्रैक्ट मजदूर DOC की देखरेख में यह कार्य कर रहे हैं।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 60 प्रतिशत से ज्यादा मौतें न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी शहर में हो रही हैं।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 60 प्रतिशत से ज्यादा मौतें न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी शहर में हो रही हैं।

न्यूयॉर्क में 24 घंटे में 777 लोगों की जान गई है। जबकि पूरे अमेरिका में कोरोना की वजह से एक दिन में 1830 लोगों की जान गई है। जबकि शुक्रवार को 2035 लोगों  की मौत हुई थी।

न्यूयॉर्क में 24 घंटे में 777 लोगों की जान गई है। जबकि पूरे अमेरिका में कोरोना की वजह से एक दिन में 1830 लोगों की जान गई है। जबकि शुक्रवार को 2035 लोगों की मौत हुई थी।

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