भारत-पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के अन्य देशों में कोरोना जानलेवा क्यों नहीं हो पाया?
नई दिल्ली. कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। दुनिया भर में अब तक 3.34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 51 लाख लोग संक्रमित हुए हैं। कोरोना का सबसे ज्यादा कहर अमेरिका, स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और ब्राजील में है। इन्हीं देशों में महामारी से मौतें भी अधिक हुई हैं। इन देशों की तुलना में दक्षिण एशिया यानी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसों देशों में कोरोना अब तक जानलेवा साबित नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट इस पर रिसर्च कर रहे हैं कि ज्यादा जनसंख्या और खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के बावजूद इन देशों में कोरोना असरदार क्यों नहीं रहा।

लैसेंट जर्नल में छपे लेख के मुताबिक, कोरोना वायरस से मई की शुरुआत तक कुल मौतों में 90% से अधिक मौतें अमीर देशों में हुईं। वहीं, अमेरिका, इटली, स्पेन, ब्रिटेन और जर्मनी में ब्राजील, चीन और ईरान के आंकड़े जोड़ने पर यह संख्या 96% हो जाती है।
वहीं, जहां अमेरिका और यूरोप में कोरोना से हाहाकार मचा है। वहीं, दक्षिण एशिया के देशों में आंकड़े इसके उलट हैं। कोरोना वायरस पर लगातार नजर रखने वाली जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशों में मृत्यु दर कम है।
यूरोप में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। फ्रांस में 15.2%, ब्रिटेन में 14.4, इटली में 14%, स्पेन में 11.9% मृत्यु दर हैं। अमेरिका में यह दर 6% है।
दक्षिण एशिया के देशों में देखें तो भारत में मृत्यु दर 3.3% पाकिस्तान में 2.2%, और बांग्लादेश में 1.5%, श्रीलंका में 1% है।
वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके पीछे की वजह जनसांख्यिक, वायरस से संपर्क और मृत्यु दर का सही डेटा ना मिलना शामिल है।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस का पहला मामला 26 फरवरी को सामने आया था। इसके बाद यहां संक्रमण तेजी से फैला। यहां हर 10 हजार की आबादी पर सिर्फ 6 बेड हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान मौत के मामले में 26वें नंबर है।
विशेषज्ञों ने आंकड़ों पर सवाल खड़े किए
विशेषज्ञों ने पाकिस्तान और अन्य देशों से मिले आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये आंकड़े गलत तो नहीं। वहीं, वैज्ञानिकों ने भारत के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है क भारत में कोरोना से मरने वालों का सही पंजीकरण नहीं किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां 78% मामले दर्ज ही नहीं किए जा रहे हैं।
इसी तरह से विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में भी यही हो रहा है। यहां डॉक्टरों का कहना है कि मरीज कोरोना को कलंक मान रहे हैं। इसलिए वे मरीज को लेकर अस्पताल तक नहीं आ रहे हैं।
इसके अलावा डॉक्टरों ने बताया कि पाकिस्तान में मरीजों के मरने के बाद शवों को उनके परिवार को देने की उचित व्यवस्था नहीं है। इसलिए लोग अस्पतालों में मरीजों को लाने से डर रहे हैं।
वहीं, ऐसा भी माना जा रहा है कि कम मौतों की और भी वजह हो सकती हैं। पाकिस्तान के डॉक्टर अदनान खान का कहना है कि इन देशों में युवा आबादी भी एक बड़ी वजह है। वहीं, पाकिस्तान में छोटी जनसांख्यिकी भी एक वजह हो सकती है।
ब्रिटेन, अमेरिका और इटली में ज्यादातर मौतें बुजुर्गों की हुई है। इसके विपरीत भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में युवा आबादी के चलते मौतें कम हुई हैं।
इम्यूनिटी भी बढ़ी वजह
पाकिस्तान के डॉक्टर महमूद के मुताबिक, दक्षिण एशिया में कम मौतों की वजह इम्यूनिटी भी हो सकती है। इसके अलावा दक्षिण एशियाई देशों में पर्यावरण भी कोरोना के कम संक्रमण की वजह हो सकती है यहां ज्यादा तापमान, प्रकाश के स्तर और अल्ट्राववायलेट रेडिएशन की वजह से भी कम मृत्यु का कारण हो सकती है।
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