सलाम! एक-एक जान बचाने में जुटीं अफगान की कोरोना वॉरियर बेटियां;कार के मोटर बाइक के चेन से बनाया वेंटिलेटर

First Published 21, May 2020, 8:53 AM

काबुल. दुनिया में बढ़ रहे कोरोना के संक्रमण के बीच अफगानिस्तान आतंकी हमले और कोरोना वायरस की दोहरी मार से जूझ रहा है। एक ओर जहां संक्रमण के मामले में बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यहां के अस्पताल अव्यवस्थाओं से दो-दो हाथ कर रहे हैं। इन सब के बीच यहां बेटियांसंक्रमित मरीजों के लिए भगवान बनकर सामने आई है। अफगानी बेटियां मरीजों को नई जिंदगी दे रही हैं। वे कोरोना पीड़ितों के लिए वेंटिलेटर बना रही हैं, वो भी अपने ही अंदाज में। कार के पुर्जों से वेंटिलेटर तैयार करने वाली लड़कियों को रोबोटिक्स गर्ल्स गैंग कहा जा रहा है।

<p style="text-align: justify;">अफगानिस्तान की आबादी 3 करोड़ 90 लाख है। जबकि यहां अस्पतालों में वेंटीलेटर की संख्या मात्र 400 ही है। जिससे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी है। जिसके बाद यह बेटियां जो वेंटीलेटर बना रही हैं उसे कम कीमत में हर किसी को उपलब्ध कराया जा सकता है। लड़कियों द्वारा बनाए जा रहे वेंटिलेटर का ट्रायल भी हो चुका है।</p>

अफगानिस्तान की आबादी 3 करोड़ 90 लाख है। जबकि यहां अस्पतालों में वेंटीलेटर की संख्या मात्र 400 ही है। जिससे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी है। जिसके बाद यह बेटियां जो वेंटीलेटर बना रही हैं उसे कम कीमत में हर किसी को उपलब्ध कराया जा सकता है। लड़कियों द्वारा बनाए जा रहे वेंटिलेटर का ट्रायल भी हो चुका है।

<p style="text-align: justify;"><strong>'अफगान ड्रीमर्स' के नाम से हैं फेमस</strong><br />
अफगानिस्तान की लड़कियों के इस समूह को 'अफगान ड्रीमर्स' कहा जाता है, 2017 में अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में विशेष पुरस्कार से नवाजा था। इनका लक्ष्य मई के अंत तक बाजार से काफी कम मूल्य पर अधिक से अधिक वेंटिलेंटर उपलब्ध कराना है। 17 वर्षीय टीम की एक सदस्य नाहिदी रहीमी का कहना है कि इस समय हमारे लिए एक-एक जिंदगी बचाना बड़ी बात है।</p>

'अफगान ड्रीमर्स' के नाम से हैं फेमस
अफगानिस्तान की लड़कियों के इस समूह को 'अफगान ड्रीमर्स' कहा जाता है, 2017 में अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में विशेष पुरस्कार से नवाजा था। इनका लक्ष्य मई के अंत तक बाजार से काफी कम मूल्य पर अधिक से अधिक वेंटिलेंटर उपलब्ध कराना है। 17 वर्षीय टीम की एक सदस्य नाहिदी रहीमी का कहना है कि इस समय हमारे लिए एक-एक जिंदगी बचाना बड़ी बात है।

<p style="text-align: justify;"><strong>कार का&nbsp;मोटर&nbsp;और बाइक का&nbsp;चेन ड्राइव बना हथियार&nbsp;</strong><br />
समूह में शामिल बच्चियों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है। इन्होंने टोयोटा कोरोला ब्रांड की कार का मोटर और होन्डा मोटारसाइकिल की चेन ड्राइव का प्रयोग अपने वेंटिलेटर में किया है। इनका कहना है कि स्टैंडर्ड वेंटिलेंटर उपलब्ध न होने पर हमारा बनाया वेंटिलेटर इमरजेंसी में सांस की तकलीफ से जूझ रहे मरीजों को तुरंत राहत देगा।&nbsp;</p>

कार का मोटर और बाइक का चेन ड्राइव बना हथियार 
समूह में शामिल बच्चियों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है। इन्होंने टोयोटा कोरोला ब्रांड की कार का मोटर और होन्डा मोटारसाइकिल की चेन ड्राइव का प्रयोग अपने वेंटिलेटर में किया है। इनका कहना है कि स्टैंडर्ड वेंटिलेंटर उपलब्ध न होने पर हमारा बनाया वेंटिलेटर इमरजेंसी में सांस की तकलीफ से जूझ रहे मरीजों को तुरंत राहत देगा। 

<p style="text-align: justify;"><strong>45 हजार रुपए में उपलब्ध होगा वेंटीलेटर</strong><br />
45 हजार रु. से भी कम कीमत में वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की कोशिश&nbsp;गर्ल गैंग की कैप्टन सोमाया फारुकी के मुताबिक, इस टीम की सदस्य होने के नाते मुझे गर्व है। हम जो काम कर रहे हैं वो हमारे हीरोज डॉक्टर और नर्स की मदद कर रहा है। इन दिनों मार्केट में वेंटिलेटर की कीमत 22 लाख से 37 लाख रुपए के बीच में हैं, जिसे ज्यादातर गरीब देश नहीं खरीद पा रहे हैं।</p>

45 हजार रुपए में उपलब्ध होगा वेंटीलेटर
45 हजार रु. से भी कम कीमत में वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की कोशिश गर्ल गैंग की कैप्टन सोमाया फारुकी के मुताबिक, इस टीम की सदस्य होने के नाते मुझे गर्व है। हम जो काम कर रहे हैं वो हमारे हीरोज डॉक्टर और नर्स की मदद कर रहा है। इन दिनों मार्केट में वेंटिलेटर की कीमत 22 लाख से 37 लाख रुपए के बीच में हैं, जिसे ज्यादातर गरीब देश नहीं खरीद पा रहे हैं।

<p style="text-align: justify;"><strong>70 फीसदी काम पूरा, दूसरे चरण का जारी है काम&nbsp;</strong><br />
गर्ल गैंग की फाउंडर रोया महबूब खुद भी एक आंत्रप्रेन्योर हैं और टाइम मैग्जीन की 100 प्रेरित करने वाले लोगों की लिस्ट में जगह बना चुकी हैं। रोया का कहना है कि मई के अंत तक लोगों की मदद के लिए पहुंचा दिए जाएंगे। अभी ये 70 फीसदी तैयार हैं। इनमें एयर सेंसर लगना बाकी है। रोया के मुताबिक, निर्माण का पहला चरण पूरा हो चुका है। कुछ दिन पहले ही हॉस्पिटल में टेस्टिंग हुई थी। दूसरे चरण का काम जारी है।</p>

70 फीसदी काम पूरा, दूसरे चरण का जारी है काम 
गर्ल गैंग की फाउंडर रोया महबूब खुद भी एक आंत्रप्रेन्योर हैं और टाइम मैग्जीन की 100 प्रेरित करने वाले लोगों की लिस्ट में जगह बना चुकी हैं। रोया का कहना है कि मई के अंत तक लोगों की मदद के लिए पहुंचा दिए जाएंगे। अभी ये 70 फीसदी तैयार हैं। इनमें एयर सेंसर लगना बाकी है। रोया के मुताबिक, निर्माण का पहला चरण पूरा हो चुका है। कुछ दिन पहले ही हॉस्पिटल में टेस्टिंग हुई थी। दूसरे चरण का काम जारी है।

<p style="text-align: justify;"><strong>'प्रेसिडेंट गनी ने किया मदद का भरोसा'</strong><br />
गर्ल गैंग की इस पहल को अफगान सरकार ने काफी सराहा है। फाउंडर रोया महबूब कहती हैं, राष्ट्रपति अशरफ गनी को इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकार बेहद खुशी हुई है और उन्होंने अधिकारियों से हमें हर संभव मदद देने के लिए कहा है।&nbsp;</p>

'प्रेसिडेंट गनी ने किया मदद का भरोसा'
गर्ल गैंग की इस पहल को अफगान सरकार ने काफी सराहा है। फाउंडर रोया महबूब कहती हैं, राष्ट्रपति अशरफ गनी को इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकार बेहद खुशी हुई है और उन्होंने अधिकारियों से हमें हर संभव मदद देने के लिए कहा है। 

<p style="text-align: justify;"><strong>चिकित्सा व्यवस्था लचर, बिगड़े हालात&nbsp;</strong><br />
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब तक कोरोना के 7,650 केस मिले हैं। इसमें से 178 लोगों की मौत हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि चिकित्सा व्यवस्था खराब होने की वजह से यहां ऐसे हालात उत्पन्न हुए हैं। इसके साथ ही यह देश ईरान से बेहद करीब है, जो खुद महामारी का केंद्र है।&nbsp;<br />
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चिकित्सा व्यवस्था लचर, बिगड़े हालात 
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब तक कोरोना के 7,650 केस मिले हैं। इसमें से 178 लोगों की मौत हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि चिकित्सा व्यवस्था खराब होने की वजह से यहां ऐसे हालात उत्पन्न हुए हैं। इसके साथ ही यह देश ईरान से बेहद करीब है, जो खुद महामारी का केंद्र है। 
 

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