...तो मच्छरों के बैक्टीरिया से मरेगा कोरोना वायरस, चीन-अमेरिका के वैज्ञानिकों ने की यह नई खोज

First Published 27, May 2020, 9:19 AM

बीजिंग. दुनिया में जारी कोरोना के कहर से बचने के लिए दुनिया के कई देश जद्दोजहद के कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की फौज वैक्सीन और दवा बनाने में जुटी हुई है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगातार रिसर्च भी किया जा रहा है। इन सब के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है, चीनी और अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मिलकर दो ऐसे बैक्टीरिया खोजे हैं जो खास तरह का प्रोटीन बनाते हैं। ये प्रोटीन कोरोना वायरस के अलावा डेंगू और एचआईवी वायरस को भी निष्क्रिय कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रोटीन का इस्तेमाल एंटीवायरल ड्रग में बनाने में किया जाएगा। क्लीनिकल ट्रायल के बोझ को कम किया जा सकेगा। 

<p style="text-align: justify;"><strong>मच्छर के अंदर मिला बैक्टीरिया </strong><br />
bioRxiv जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, ये बैक्टीरिया शोधकर्ताओं को एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छर के अंदर मिले हैं। बैक्टीरिया के जीनोम सिक्वेंस का विश्लेषण करने के बाद उसमें से निकलने वाले प्रोटीन को पहचाना गया। शोधकर्ताओं ने दावा किया कि यह प्रोटीन कई तरह के वायरस को निष्क्रिय करने में सक्षम है। </p>

मच्छर के अंदर मिला बैक्टीरिया 
bioRxiv जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, ये बैक्टीरिया शोधकर्ताओं को एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छर के अंदर मिले हैं। बैक्टीरिया के जीनोम सिक्वेंस का विश्लेषण करने के बाद उसमें से निकलने वाले प्रोटीन को पहचाना गया। शोधकर्ताओं ने दावा किया कि यह प्रोटीन कई तरह के वायरस को निष्क्रिय करने में सक्षम है। 

<p style="text-align: justify;"><strong>वायरस को निष्क्रिय करने की रखता है क्षमता </strong><br />
बैक्टीरिया का प्रोटीन, लाइपेज से लैस है। लाइपेज एक तरह का एंजाइम है जो प्रोटीन वायरस को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। 2010 में हुए एक शोध में पाया गया था कि लिपोप्रोटीन लाइपेज नाम का रसायन हेपेटाइटिस-सी वायरस को निष्क्रिय करता है। </p>

वायरस को निष्क्रिय करने की रखता है क्षमता 
बैक्टीरिया का प्रोटीन, लाइपेज से लैस है। लाइपेज एक तरह का एंजाइम है जो प्रोटीन वायरस को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। 2010 में हुए एक शोध में पाया गया था कि लिपोप्रोटीन लाइपेज नाम का रसायन हेपेटाइटिस-सी वायरस को निष्क्रिय करता है। 

<p style="text-align: justify;">2017 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, नाजा मोसाम्बिका नाम के सांप के जहर में फॉस्फो लाइपेज प्रोटीन मिला, यह हेपेटाइटिस-सी, डेंगू और जापानी इन्सेफेलाइटिस को निष्क्रिय करता है। </p>

2017 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, नाजा मोसाम्बिका नाम के सांप के जहर में फॉस्फो लाइपेज प्रोटीन मिला, यह हेपेटाइटिस-सी, डेंगू और जापानी इन्सेफेलाइटिस को निष्क्रिय करता है। 

<p style="text-align: justify;"><strong>ठीक होने के 70 दिन बाद भी मिल रहे पॉजिटिव </strong><br />
चीनी शोधकर्ताओं के नए शोध के मुताबिक, कोरोना के इलाज के बाद वायरस फेफड़ों में लम्बे समय तक छिपा रह सकता है। उनके मुताबिक, चीन में ऐसे मामले भी सामने आए जब हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के 70 दिन बाद मरीज पॉजिटिव मिला। साउथ कोरिया में इलाज के बाद 160 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। ऐसे ही मामले चीन, मकाऊ, ताइवान, वियतनाम में भी सामने आ चुके हैं। </p>

ठीक होने के 70 दिन बाद भी मिल रहे पॉजिटिव 
चीनी शोधकर्ताओं के नए शोध के मुताबिक, कोरोना के इलाज के बाद वायरस फेफड़ों में लम्बे समय तक छिपा रह सकता है। उनके मुताबिक, चीन में ऐसे मामले भी सामने आए जब हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के 70 दिन बाद मरीज पॉजिटिव मिला। साउथ कोरिया में इलाज के बाद 160 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। ऐसे ही मामले चीन, मकाऊ, ताइवान, वियतनाम में भी सामने आ चुके हैं। 

<p style="text-align: justify;"><strong>फेफड़े में अंदर रह सकता है कोरोना का वायरस </strong><br />
कोरिया सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर जियॉन्ग यूं-कियॉन्ग का कहना है, कोरोना वायरस दोबारा मरीज को संक्रमित करने की बजाय री-एक्टिवेट हो सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस फेफड़े में अंदर गहराई में रह सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि यह जांच रिपोर्ट में पकड़ में न आए।</p>

फेफड़े में अंदर रह सकता है कोरोना का वायरस 
कोरिया सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर जियॉन्ग यूं-कियॉन्ग का कहना है, कोरोना वायरस दोबारा मरीज को संक्रमित करने की बजाय री-एक्टिवेट हो सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस फेफड़े में अंदर गहराई में रह सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि यह जांच रिपोर्ट में पकड़ में न आए।

<p style="text-align: justify;"><strong>ये शोधकर्ता रहे शामिल</strong><br />
रिसर्च में बीजिंग की शिंघुआ यूनिवर्सिटी, एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंस और शेंजेन डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल सेंटर के शोधकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका की कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक भी रिसर्च में शामिल रहे हैं। </p>

ये शोधकर्ता रहे शामिल
रिसर्च में बीजिंग की शिंघुआ यूनिवर्सिटी, एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंस और शेंजेन डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल सेंटर के शोधकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका की कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक भी रिसर्च में शामिल रहे हैं। 

<p style="text-align: justify;"><strong>दुनिया में कोरोना का हाल</strong><br />
दुनिया में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 56 लाख 84 हजार 802 लोग कोरोना के शिकार हो चुके हैं। जबकि 3 लाख 52 हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि राहत की बात है कि अब तक 24 लाख 30 हजार 593 लोग ठीक हो चुके हैं। इन सब के बीच कोरोना महामारी के असर से सबसे ज्यादा अमेरिका प्रभावित है। यहां 1 लाख 572 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 17 लाख 25 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।</p>

दुनिया में कोरोना का हाल
दुनिया में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 56 लाख 84 हजार 802 लोग कोरोना के शिकार हो चुके हैं। जबकि 3 लाख 52 हजार से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि राहत की बात है कि अब तक 24 लाख 30 हजार 593 लोग ठीक हो चुके हैं। इन सब के बीच कोरोना महामारी के असर से सबसे ज्यादा अमेरिका प्रभावित है। यहां 1 लाख 572 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 17 लाख 25 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।

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