जुलाई में हो सकती है कोरोना की छुट्टी, फाइनल टेस्टिंग में पहुंची ये वैक्सीन, जगी उम्मीदें

First Published 13, Jun 2020, 8:48 AM

नई दिल्ली. कोरोना से जंग में कई देश जी जान से जुटे हैं। इन देशों में वैक्सीन बनाने का काम भी काफी तेजी से हो रहा है। इसी क्रम में अमेरिका की मशहूर बायोटेक कंपनी मॉडर्ना अपनी वैक्सीन का फाइनल ट्रायल जुलाई में करेगी। कंपनी का दावा है कि वैक्सीन बनाने के फाइनल स्टेज में है और जुलाई में करीब 30 हजार लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा। दुनियाभर में कोरोना वायरस के 77 लाख से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। वहीं, 4.28 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। 

<p>कंपनी ने बताया कि इस दौरान कुछ लोगों को रियल शॉट दिया जाएगा। जबकि कुछ को डमी शॉट दिया जाएगा। इसके बाद यह देखा जाएगा कि कौन से लोग ज्यादा संक्रमित हैं। </p>

कंपनी ने बताया कि इस दौरान कुछ लोगों को रियल शॉट दिया जाएगा। जबकि कुछ को डमी शॉट दिया जाएगा। इसके बाद यह देखा जाएगा कि कौन से लोग ज्यादा संक्रमित हैं। 

<p>अमेरिका की मॉडर्ना थेराप्युटिक्स बायोटेक्नोलॉजी कंपनी कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है। कंपनी का मकसद है कि ऐसी वैक्सीन बनाई जाए, जो लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगी। इससे कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर को लड़ने की क्षमता मिलेगी और व्यक्ति कोरोना को हरा सकेगा। </p>

अमेरिका की मॉडर्ना थेराप्युटिक्स बायोटेक्नोलॉजी कंपनी कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है। कंपनी का मकसद है कि ऐसी वैक्सीन बनाई जाए, जो लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगी। इससे कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर को लड़ने की क्षमता मिलेगी और व्यक्ति कोरोना को हरा सकेगा। 

<p>इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने फंडिंग भी दी है। यह वैक्सीन मैसेंजर आरएनए पर आधारित है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कामयाब होंगे।</p>

इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने फंडिंग भी दी है। यह वैक्सीन मैसेंजर आरएनए पर आधारित है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कामयाब होंगे।

<p>बायोटेक का कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को रोकना है। इसके बाद महामारी को रोकना दूसरी प्राथमिकता होगी। इससे लोगों को अस्पताल से दूर रखा जा सके। <br />
 </p>

बायोटेक का कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को रोकना है। इसके बाद महामारी को रोकना दूसरी प्राथमिकता होगी। इससे लोगों को अस्पताल से दूर रखा जा सके। 
 

<p>कंपनी ने आखिरी चरण के लिए वैक्सीन की 100 माइक्रोग्राम डोज तैयार की है। इसके अलावा कंपनी हर साल लगभग 50 करोड़ की डोज डिलीवर करने की तैयारी में है।<br />
 </p>

कंपनी ने आखिरी चरण के लिए वैक्सीन की 100 माइक्रोग्राम डोज तैयार की है। इसके अलावा कंपनी हर साल लगभग 50 करोड़ की डोज डिलीवर करने की तैयारी में है।
 

<p>अमेरिका के अलावा चीन की कंपनी भी वैक्सीन बनाने की राह में तेजी आगे बढ़ चुकी है। चीन की बायोटेक कंपनी सिनोवेक ब्राजील के लोगों पर फाइनल ट्रायल करेगी। ब्राजील कोरोना वायरस से दूसरा सबसे प्रभावित देश है। </p>

अमेरिका के अलावा चीन की कंपनी भी वैक्सीन बनाने की राह में तेजी आगे बढ़ चुकी है। चीन की बायोटेक कंपनी सिनोवेक ब्राजील के लोगों पर फाइनल ट्रायल करेगी। ब्राजील कोरोना वायरस से दूसरा सबसे प्रभावित देश है। 

<p>यहां की सरकार ने कहा है कि सिनोवेक ब्राजील के 9 हजार लोगों पर टेस्टिंग होगी। ये टेस्टिंग अगले महीने से सुरू हो जाएगी। <br />
 </p>

यहां की सरकार ने कहा है कि सिनोवेक ब्राजील के 9 हजार लोगों पर टेस्टिंग होगी। ये टेस्टिंग अगले महीने से सुरू हो जाएगी। 
 

<p>दुनियाभर में इस समय एक दर्जन वैक्सीन निर्णायक ट्रायल तक पहुंच गई हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी कई वैक्सीन को सहयोग करने की बात कही है। इनमें ऑक्सफोर्ड द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन भी शामिल है। <br />
 </p>

दुनियाभर में इस समय एक दर्जन वैक्सीन निर्णायक ट्रायल तक पहुंच गई हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी कई वैक्सीन को सहयोग करने की बात कही है। इनमें ऑक्सफोर्ड द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन भी शामिल है। 
 

loader