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कोरोना पर होगा चमत्कार? ब्रिटेन में शुरू हुआ वैक्सीन का ट्रायल, वालंटियर बोले- जान बचाने के लिए रिस्क जरूरी
लंदन. दुनिया में कोरोना का कहर जारी है। मौत और संक्रमण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में दुनिया के सभी देश कोरोना का इलाज ढूंढने में जुटे हुए हैं। लंदन में वैक्सीन का मानवों पर ट्रायल शुरू हो गया है। ऐसे में एक इंजेक्शन जिसके बारे में ये पता ना हो कि वह शरीर पर कैसा असर डालेगा। क्या आप वैसा इंजेक्शन लगवाने को तैयार होंगे? किसी ना किसी को तो हिम्मत दिखानी ही पड़ेगी। इंसानियत के लिए अपने शरीर को खतरे में डालना होगा। कोरोना वायरस वैक्सीन के ट्रायल में जो वालंटियर्स हिस्सा ले रहे हैं, वो असली हीरो हैं।

कोरोना के खिलाफ इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने तैयार किया है और इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को 20 मिलियन पाउंड्स (189 करोड़ रुपये के करीब) खर्च करने की घोषणा की थी। जिसके बाद आज गुरुवार से इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है। 36 साल के जॉन ज्यूक्स उन लोगों में से हैं जो अपने शरीर पर वैक्सीन की टेस्टिंग होने दे रहे हैं।
'सब घबराएंगे तो वैक्सीन कैसे बनेगी?'
जॉन ने कहा, "मुझे नहीं लगता जो मैं कर रहा हूं वो कोई हीरो जैसा काम है। मैं उस स्थिति में हूं जहां मैं बहुत सारे लोगों की मदद कर सकता हूं और ऐसा मौका चूकना नहीं चाहिए। इस वायरस ने हमारी जिंदगी पर जैसा असर डाला है, उससे कोई बच नहीं सकता। अगर हर कोई वैक्सीन ढूंढने में मदद से कतराएगा तो शायद वैक्सीन मिल ही ना पाए।"
नर्स पार्टनर ने बताया, चल रहा ट्रायल
जॉन को अपनी पार्टनर से वैक्सीन के ट्रायल के बारे में पता चला था। उनकी पार्टनर नर्स हैं। इन वालंटियर्स को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें अपना वक्त अलग से देना होगा। सोमवार को जॉन के शरीर में इंजेक्शन लगाया जाएगा। इसके बाद भी वह नॉर्मल जिंदगी जीते रहेंगे।
इंजेक्शन लगने के बाद वह सीधे काम पर चले जाएंगे। जॉन को खतरे का अंदाजा है मगर वो डरते नहीं। उन्होंने कहा, "ट्रायल में रिस्क तो है मगर हर ऐसी चीज में खतरा तो होता ही है।" उनके मुताबिक, पूरी दुनिया के हालात नॉर्मल करने का यही बेस्ट चांस है।
ट्रायल सफल हुआ तो और होगी टेस्टिंग
ब्रिटेन में फर्स्ट राउंड के इस ट्रायल के बाद एक और स्टडी होगी। उसमें वैक्सीन का 5,000 वालंटियर्स पर टेस्ट किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह वैक्सीन इसी वायरस का एक कमजोर रूप है जो चिम्पांजियों में सर्दी-जुकाम पैदा करता है। इंसानी कोशिकाओं में यह वो प्रोटीन बनाते हैं जो कोरोना वायरस के बाहरी सतह पर 'कीलें' बनाते हैं।
अगर ट्रायल सफल रहा तो वालंटियर्स का इम्यून सिस्टम इन 'स्पाइक प्रोटीन्स' को पहचानने लगेगा। फिर ये प्रोटीन कोरोना वायरस से लड़ेंगे।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन 'ChAdOx1 nCoV-19' से आने वाले कुछ सप्ताह में चमत्कार हो सकता है। ब्रिटेन में 165 अस्पतालों में करीब 5 हजार मरीजों का एक महीने तक और इसी तरह से यूरोप और अमेरिका में सैकड़ों लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण होगा।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विभाग के प्रोफेसर पीटर हॉर्बी कहते हैं, 'यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल है।' प्रोफेसर हॉर्बी पहले इबोला की दवा के ट्रायल का नेतृत्व कर चुके हैं। उधर, ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर मैट हैनकॉक ने कहा है कि दो वैक्सीन इस वक्त सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि एक ऑक्सफर्ड और दूसरी इंपीरियल कॉलेज में तैयार की जा रही हैं।
जून में आ सकते हैं टेस्टिंग के परिणाम
प्रोफेसर हॉर्बी कहते हैं कि हमें अनुमान है कि जून में किसी समय कुछ परिणाम आ सकते हैं। यदि यह स्पष्ट होता है कि वैक्सीन से लाभ है तो उसका जवाब जल्दी मिल सकता है।' हालांकि हॉर्बी चेतावनी भी देते हैं कि कोविड-19 के मामले में कोई 'जादू' नहीं हो सकता है।
दरअसल, इंग्लैंड में 21 नए रिसर्च प्रॉजेक्ट शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए इंग्लैंड की सरकार ने 1.4 करोड़ पाउंड की राशि मुहैया कराई है। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में 10 लाख वैक्सीन की डोज बनाने की तैयारी चल रही है।
युवाओं पर वैक्सीन की टेस्टिंग
ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का सबसे पहले युवाओं पर परीक्षण किया जा रहा है। अगर यह सफल रहा तो उसे अन्य आयु वर्ग के लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया जाएगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आड्रियान हिल कहते हैं, हम किसी भी कीमत पर सितंबर तक दस लाख डोज तैयार करना चाहते हैं।
एक बार वैक्सीन की क्षमता का पता चल जाए तो उसे बढ़ाने पर बाद में भी काम हो सकता है। यह स्पष्ट है कि पूरी दुनिया को करोड़ों डोज की जरूरत पड़ने वाली है। तभी इस महामारी का अंत होगा और लॉकडाउन से मुक्ति मिलेगी। कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर उपाय हो सकता है। सोशल डिस्टेंशिंग (Social Distancing) से सिर्फ बचा जा सकता है।
वैक्सीन कितना असर दिखा सकती है। किसी वैक्सीन को तैयार करने का प्रोटोकॉल 12 से 18 महीने का होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन भी यही कहती है। लेकिन ब्रिटेन में यह प्रयोग सिर्फ 2 महीने में पूरा किया जाएगा।
ब्रिटेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर क्रिस विह्टी के मुताबिक, 'हमारे देश में दुनिया के जाने माने वैक्सीन वैज्ञानिक हैं, लेकिन हमें पूरे डेवलपमेंट प्रोसेस को ध्यान में रखना है। इसे कम किया जा सकता है। टास्क फोर्स इस पर काम भी कर रही है।
हम सिर्फ यही चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी Covid-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार हो जाए। पूरी दुनिया में 70 से ज्यादा कंपनियां और शोध टीमें कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने पर काम कर रही हैं।
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