जानिए सबसे शक्तिशाली देश में कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति, भारत से कितनी अलग है चुनाव प्रक्रिया

First Published 8, Sep 2020, 12:04 PM

वॉशिंगटन. अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होना है। इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुईं हैं। दरअसल, विश्व शक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान माना जाता है और उसका हस्तक्षेप पूरी दुनिया में है ऐसे में सभी की टक-टकी लाजिमी है। भारत की तरह अमेरिका भी लोकतांत्रिक देश है। हालांकि, भारत की तुलना में अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया कठिन है, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अमेरिका में राष्ट्रपति कैसे चुना जाता है। आईए आसान भाषा में समझते हैं पूरी चुनाव प्रक्रिया....

<p><strong>राष्ट्रपति चुनाव कौन लड़ सकता है?</strong><br />
अमेरिकी संविधान के आर्टिकल 2 के सेक्शन 1 में राष्ट्रपति चुनाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। राष्ट्र्रपति उम्मीदवार बनने के लिए मुख्य रूप से किसी भी शख्स को इन तीन शर्तों को पूरा करना होता है। 1- उम्मीदवार का जन्म अमेरिका में हुआ हो। 2- उसकी उम्र 35 साल या उससे अधिक हो। 3- वह पिछले 14 साल से अमेरिका में रह रहा हो।</p>

राष्ट्रपति चुनाव कौन लड़ सकता है?
अमेरिकी संविधान के आर्टिकल 2 के सेक्शन 1 में राष्ट्रपति चुनाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। राष्ट्र्रपति उम्मीदवार बनने के लिए मुख्य रूप से किसी भी शख्स को इन तीन शर्तों को पूरा करना होता है। 1- उम्मीदवार का जन्म अमेरिका में हुआ हो। 2- उसकी उम्र 35 साल या उससे अधिक हो। 3- वह पिछले 14 साल से अमेरिका में रह रहा हो।

<p><strong>कोई कितने साल तक राष्ट्रपति रह सकता ?</strong><br />
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। वह 2 कार्यकाल तक राष्ट्रपति रह सकता है। 22 वें संविधान संसोधन के मुताबिक, यहां एक व्यक्ति तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता। हालांकि, युद्ध की स्थिति में अमेरिकी संसद ऐसा मौका दे सकती है।&nbsp;</p>

कोई कितने साल तक राष्ट्रपति रह सकता ?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। वह 2 कार्यकाल तक राष्ट्रपति रह सकता है। 22 वें संविधान संसोधन के मुताबिक, यहां एक व्यक्ति तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं चुना जा सकता। हालांकि, युद्ध की स्थिति में अमेरिकी संसद ऐसा मौका दे सकती है। 

<p><strong>कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार?</strong><br />
अन्य किसी लोकतांत्रिक देश की तरह अमेरिका में भी कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है। लेकिन अमेरिका में द्विदलीय व्यवस्था है। यहां सिर्फ रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी है। इन्हीं के मध्य चुनाव होता है। दोनों पार्टियां अपना अपना उम्मीदवार बनाती हैं। हालांकि, उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया दूसरे देशों की तुलना में काफी लंबी होती है।&nbsp;</p>

कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार?
अन्य किसी लोकतांत्रिक देश की तरह अमेरिका में भी कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है। लेकिन अमेरिका में द्विदलीय व्यवस्था है। यहां सिर्फ रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी है। इन्हीं के मध्य चुनाव होता है। दोनों पार्टियां अपना अपना उम्मीदवार बनाती हैं। हालांकि, उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया दूसरे देशों की तुलना में काफी लंबी होती है। 

<p>यहां पार्टी के उम्मीदवार के चयन के लिए दो तरह के चुनाव होते हैं। पहला प्राइमरी और दूसरा कॉकसस। प्राइमरी चुनाव राज्य सरकारों के अंतर्गत कराए जाते हैं। अगर चुनाव खुले तौर पर होते हैं तो इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा आम जनता भी मतदान कर सकती है। वहीं, बंद रूप से अगर मतदान होता है तो सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता ही वोटिंग करते हैं।&nbsp;</p>

यहां पार्टी के उम्मीदवार के चयन के लिए दो तरह के चुनाव होते हैं। पहला प्राइमरी और दूसरा कॉकसस। प्राइमरी चुनाव राज्य सरकारों के अंतर्गत कराए जाते हैं। अगर चुनाव खुले तौर पर होते हैं तो इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा आम जनता भी मतदान कर सकती है। वहीं, बंद रूप से अगर मतदान होता है तो सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता ही वोटिंग करते हैं। 

<p><strong>क्या है कॉकसस?</strong><br />
अगर कॉकसस की बात करें तो यह पार्टी की तरफ से ही कराए जाते हैं। इसमें पार्टी के समर्थकों का एक कार्यक्रम बुलाया जाता है। इसमें राष्ट्रपति उम्मीदवार अलग अलग मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं। जिस उम्मीदवार के पक्ष में ज्यादा लोग हाथ खड़ा करते हैं, वही उम्मीदवार चुना जाता है। हालांकि, अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में प्राइमरी के तहत ही उम्मीदवार चुना जाता है। हालांकि, प्राइमरी या कॉकसस में आम लोगों को भाग लेने के लिए पहले पार्टी का कार्यकर्ता बनने के लिए रजिस्टर करना पड़ता है।</p>

क्या है कॉकसस?
अगर कॉकसस की बात करें तो यह पार्टी की तरफ से ही कराए जाते हैं। इसमें पार्टी के समर्थकों का एक कार्यक्रम बुलाया जाता है। इसमें राष्ट्रपति उम्मीदवार अलग अलग मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं। जिस उम्मीदवार के पक्ष में ज्यादा लोग हाथ खड़ा करते हैं, वही उम्मीदवार चुना जाता है। हालांकि, अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में प्राइमरी के तहत ही उम्मीदवार चुना जाता है। हालांकि, प्राइमरी या कॉकसस में आम लोगों को भाग लेने के लिए पहले पार्टी का कार्यकर्ता बनने के लिए रजिस्टर करना पड़ता है।

<p><strong>उम्मीदवार बनने के लिए भी चाहिए निश्चित समर्थन</strong><br />
प्राइमरी और कॉकसस चुनाव में उम्मीदवार को समर्थन की निश्चित संख्या की जरूरत होती है। तभी वह उम्मीदवार घोषित किया जाता है। मान लिया जाए कि एक पार्टी में 10 लोग राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की रेस में शामिल हैं, तो इनमें से जिसे सबसे ज्यादा समर्थन मिलेगा, वह उम्मीदवार बनेगा।&nbsp;</p>

उम्मीदवार बनने के लिए भी चाहिए निश्चित समर्थन
प्राइमरी और कॉकसस चुनाव में उम्मीदवार को समर्थन की निश्चित संख्या की जरूरत होती है। तभी वह उम्मीदवार घोषित किया जाता है। मान लिया जाए कि एक पार्टी में 10 लोग राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की रेस में शामिल हैं, तो इनमें से जिसे सबसे ज्यादा समर्थन मिलेगा, वह उम्मीदवार बनेगा। 

<p><strong>उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ऐलान</strong><br />
प्राइमरी इलेक्शन के बाद दोनों पार्टियां नेशनल कन्वेंशन बुलाती हैं। ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन का अगस्त और डेमोक्रेट्स का कन्वेंशन जुलाई में होता है। यहां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का आधिकारिक ऐलान होता है। इसके बाद वही उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ऐलान करता है।&nbsp;</p>

उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ऐलान
प्राइमरी इलेक्शन के बाद दोनों पार्टियां नेशनल कन्वेंशन बुलाती हैं। ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन का अगस्त और डेमोक्रेट्स का कन्वेंशन जुलाई में होता है। यहां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का आधिकारिक ऐलान होता है। इसके बाद वही उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ऐलान करता है। 

<p><strong>अब शुरू होती है चुनाव प्रक्रिया</strong><br />
कन्वेंशन के बाद चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत होती है। अमेरिका में जनता सीधे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए वोट नहीं करती। यह पहले स्थानीय तौर पर इलेक्टर का चुनाव करती है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का प्रतिनिधि होता है। इसके समूह को इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं। इसमें 538 सदस्य होते हैं। ये अलग अलग राज्यों से आते हैं। जनता इन्हें चुनती है, यही राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 से अधिक इलेक्टर्स की जरूरत होती है। जिसे ज्यादा समर्थन मिलता है, वही उम्मीदवार 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेता है।&nbsp;</p>

अब शुरू होती है चुनाव प्रक्रिया
कन्वेंशन के बाद चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत होती है। अमेरिका में जनता सीधे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए वोट नहीं करती। यह पहले स्थानीय तौर पर इलेक्टर का चुनाव करती है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का प्रतिनिधि होता है। इसके समूह को इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं। इसमें 538 सदस्य होते हैं। ये अलग अलग राज्यों से आते हैं। जनता इन्हें चुनती है, यही राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 से अधिक इलेक्टर्स की जरूरत होती है। जिसे ज्यादा समर्थन मिलता है, वही उम्मीदवार 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेता है। 

<p><strong>टीवी डिबेट होती है अहम</strong><br />
अमेरिकी चुनाव में टीवी डिबेट काफी अहम मानी जाती है। यह मतदान से पहले होती है। यह दो प्रकार की होती है पहली प्राइमरी और दूसरी प्रेसिडेंशियल। प्राइमरी पार्टी के उम्मीदवारों के बीच होती है। वहीं, &nbsp;प्रेसिडेंशियल डिबेट दोनों पार्टियों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच में होती है। यह अमेरिकी मीडिया द्वारा आयोजित की जाती हैं। हर डिबेट में अलग अलग मुद्दे पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार अपनी बात रखते हैं, इसी के आधार पर जनता अपना मूड बनाती है।&nbsp;<br />
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टीवी डिबेट होती है अहम
अमेरिकी चुनाव में टीवी डिबेट काफी अहम मानी जाती है। यह मतदान से पहले होती है। यह दो प्रकार की होती है पहली प्राइमरी और दूसरी प्रेसिडेंशियल। प्राइमरी पार्टी के उम्मीदवारों के बीच होती है। वहीं,  प्रेसिडेंशियल डिबेट दोनों पार्टियों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच में होती है। यह अमेरिकी मीडिया द्वारा आयोजित की जाती हैं। हर डिबेट में अलग अलग मुद्दे पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार अपनी बात रखते हैं, इसी के आधार पर जनता अपना मूड बनाती है। 
 

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