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कोरोना के चलते इस देश में आई भूखे मरने की नौबत, 76 लाख परिवार के पास नहीं है एक वक्त का खाना
मनीला. कोरोना वायरस और उसे फैलने से रोकने के लिए लगाई गए प्रतिबंधों के चलते कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर संकट का बादल है। कई गरीब देशों में लोगों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। ऐसा ही हाल फिलीपींस का है। यहां कोरोना के चलते तमाम लोगों की नौकरियां चली गईं। लोग सड़क पर रहने के लिए मजबूर हो हैं। यहां तक की देश में करीब एक तिहाई परिवार यानी 76 लाख परिवारों के पास पिछले तीन महीनों से एक वक्त तक का भोजन नहीं है। इनमें से करीब 22 लाख परिवार 'गंभीर भूख' का सामना कर रहे हैं। यह अब तक का सर्वाधिक है।

फिलीपींस में रहने वाले डेनियल ने कोरोना और लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरी और घर खो दिया। वे अपने बच्चों और पत्नी के साथ सड़क पर रहने के लिए मजबूर हैं।
डेनियल और उनके बच्चे सड़क पर एक ब्रिज के नीचे रहते हैं। वे जीवित रहने के लिए खाने की जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
कुछ संगठन देश में गरीबों और जरूरतमंदों को खाना उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि, उनके लिए भी यह काफी चुनौतीपूर्ण काम है, क्यों कि देश में लाखों परिवार भूखे रह रहे हैं।
फिलीपींस में संगठन राइज अगेंस्ट हंगर के डायरेक्टर जोमर फ्लेरस का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन के चलते देश में लाखों लोगों की नौकरी चली गई। उन्होंने इससे पहले कभी इस तरह की भुखमरी नहीं देखी।
फ्लेरस अपने 40 साथियों के साथ गरीबों को खाना खिलाने का काम कर रहे हैं। सोशल वेदर स्टेशन के मुताबिक, भूखे मरने वालों की संख्या महामारी के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है।
सितंबर में हुए एक सर्वे के मुताबिक, फिलीपींस में करीब एक तिहाई परिवार यानी 76 लाख परिवारों के पास पिछले 3 महीने से एक वक्त का खाना नहीं है।
इनमें से करीब 22 लाख परिवार 'गंभीर भूख' का सामना कर रहे हैं। यह अब तक का सर्वाधिक है।
फिलीपींस में अर्थव्यवस्था पर संकट 2012 से ही छाया हुआ है। लेकिन इस साल मई में लगे लॉकडाउन के बाद से स्थिति और बदतर हो गई।
सरकार ने पिछले महीनों में प्रतिबंध हटाए हैं, ताकि उद्योग धंधे फिर से शुरू हो सकें और अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
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