काम की खबर: फोन पर छींकने या खांसने पर बस 1 मिनट में पता चल जाएगा कि आपको कोरोना है या नहीं

First Published 19, May 2020, 3:55 PM

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दुनिया के तमाम देश इसकी वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। कई देशों में इसे लेकर तमाम तरह की रिसर्च भी चल रही हैं। इसी क्रम में अमेरिकी रिसर्च टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जल्द ही मोबाइल पर छींकने या खांसने से यह पता लग जाएगा कि आपको कोरोना है या नहीं है। अमेरिका की टीम एक सेंसर पर काम कर रही है। इसे फोन के साथ अटैच किया जा सकेगा।
 

<p>दुनिया में कोरोना संक्रमण के 3.2 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 49 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। कई देशों में टेस्टिंग कम होने से संक्रमण के मामले काफी कम आ रहे हैं। लेकिन अब अमेरिका की रिचर्स टीम ने दावा किया है कि उनके डिवाइस से सिर्फ 60 सेकंड में ही कोरोना वायरस का टेस्ट किया जा सकता है।</p>

दुनिया में कोरोना संक्रमण के 3.2 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 49 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। कई देशों में टेस्टिंग कम होने से संक्रमण के मामले काफी कम आ रहे हैं। लेकिन अब अमेरिका की रिचर्स टीम ने दावा किया है कि उनके डिवाइस से सिर्फ 60 सेकंड में ही कोरोना वायरस का टेस्ट किया जा सकता है।

<p>बताया जा रहा है कि यह सेंसर डिवाइस सिर्फ 3 महीने में मार्केट में आ जाएगी। यह सेंसर काफी सस्ता होगा। इसकी कीमत करीब 55 डॉलर यानी 4100 रुपए तक हो सकती है।&nbsp;</p>

बताया जा रहा है कि यह सेंसर डिवाइस सिर्फ 3 महीने में मार्केट में आ जाएगी। यह सेंसर काफी सस्ता होगा। इसकी कीमत करीब 55 डॉलर यानी 4100 रुपए तक हो सकती है। 

<p><strong>निभा सकता है अहम भूमिका</strong><br />
इस डिवाइस को बनाने वाली टीम के लीडर प्रोफेसर मसूद तबीब अजहर हैं। वे कहते हैं कि यह डिवाइस कोरोना वायरस को ट्र्रेक करने में अहम भूमिका निभाएगा। मसूद अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ यूटॉ में इंजीनियर हैं।</p>

निभा सकता है अहम भूमिका
इस डिवाइस को बनाने वाली टीम के लीडर प्रोफेसर मसूद तबीब अजहर हैं। वे कहते हैं कि यह डिवाइस कोरोना वायरस को ट्र्रेक करने में अहम भूमिका निभाएगा। मसूद अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ यूटॉ में इंजीनियर हैं।

<p>उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को जीका वायरस से मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। पतबीब ने बताया कि इसे 12 महीने पहले जीका वायरस डिटेक्ट करने के लिए बनाया गया था। लेकिन अब इसे कोरोना का पता लगाने के लिए प्रोग्राम किया जा रहा है।&nbsp;</p>

उन्होंने बताया कि इस डिवाइस को जीका वायरस से मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। पतबीब ने बताया कि इसे 12 महीने पहले जीका वायरस डिटेक्ट करने के लिए बनाया गया था। लेकिन अब इसे कोरोना का पता लगाने के लिए प्रोग्राम किया जा रहा है। 

<p><strong>सिर्फ 1 मिनट में मिलेगा रिजल्ट</strong><br />
डिवाइस का प्रोटोटाइप 1 इंच चौड़ा हैं। यह ब्लूटूथ के जरिए किसी स्मार्टफोन के साथ कनेक्ट हो सकता है। इस सेंसर के पास कोई व्यक्ति अगर सांस लेना, खांसता है या छींकता है तो डिवाइस यह आसानी से बता देगा कि वह संक्रमित है या नहीं। इसमें रिजल्ट सिर्फ 1 मिनट में सामने आ जाएंगे।&nbsp;</p>

सिर्फ 1 मिनट में मिलेगा रिजल्ट
डिवाइस का प्रोटोटाइप 1 इंच चौड़ा हैं। यह ब्लूटूथ के जरिए किसी स्मार्टफोन के साथ कनेक्ट हो सकता है। इस सेंसर के पास कोई व्यक्ति अगर सांस लेना, खांसता है या छींकता है तो डिवाइस यह आसानी से बता देगा कि वह संक्रमित है या नहीं। इसमें रिजल्ट सिर्फ 1 मिनट में सामने आ जाएंगे। 

<p>यूजर को सांस लेने या छींकने से पहले सेंसर को फोन के चार्जिंग पोर्ट में लगाना होगा। इसके बाद इसके लिए जरूरी ऐप को खोलना होगा। इसके बाद एक मिनट में रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा।&nbsp;</p>

यूजर को सांस लेने या छींकने से पहले सेंसर को फोन के चार्जिंग पोर्ट में लगाना होगा। इसके बाद इसके लिए जरूरी ऐप को खोलना होगा। इसके बाद एक मिनट में रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा। 

<p>प्रोफेसर ने बताया कि यह सेंसर कलर बदल कर या विजुअल तरीके से कोरोना की मौजूदगी का संकेत देगा। सेंसर से इलेक्ट्रिक करेंट के जरिए पिछले सैंपल को खत्म कर दोबारा जांच की जा सकेगी।&nbsp;</p>

प्रोफेसर ने बताया कि यह सेंसर कलर बदल कर या विजुअल तरीके से कोरोना की मौजूदगी का संकेत देगा। सेंसर से इलेक्ट्रिक करेंट के जरिए पिछले सैंपल को खत्म कर दोबारा जांच की जा सकेगी। 

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