Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री ही तिरंगा फहराते हैं, राष्ट्रपति नहीं। इसके पीछे 1947 का इतिहास और संविधान से जुड़ी दिलचस्प वजहें हैं।

15 August Independence Day: 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। हम सब बचपन से यह नजारा टीवी पर देखते आ रहे हैं। लेकिन, क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि 15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री ही झंडा क्यों फहराते हैं? देश के प्रथम नागरिक यानी हमारे राष्ट्रपति यह काम क्यों नहीं करते? आइए जानते हैं इस दिलचस्प सवाल का जवाब...

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम ही क्यों फहराते हैं लाल किले से तिरंगा?

1. 1947 में राष्ट्रपति का पद ही नहीं था

यह इसकी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक वजह है। जब 15 अगस्त 1947 को हमें अंग्रेजों से आजादी मिली, तब हमारे देश का अपना संविधान (Constitution) लागू नहीं हुआ था। उस समय देश में राष्ट्रपति का कोई पद था ही नहीं। चूंकि प्रधानमंत्री ही सरकार के मुखिया थे, इसलिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया था। उसी दिन से यह परंपरा बन गई। 1950 में जब हमारा संविधान लागू हुआ, तब जाकर देश को अपना पहला राष्ट्रपति मिला।

2. जनता की ताकत का असली प्रतीक

लोकतंत्र (Democracy) में सबसे बड़ी ताकत जनता की होती है। 15 अगस्त उस दिन की याद है जब भारत ने ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल की थी। इसलिए लाल किले से प्रधानमंत्री का तिरंगा फहराना स्वतंत्र भारत की अपनी चुनी हुई सरकार के सत्ता संभालने का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री जनता द्वारा चुनी गई सरकार का नेतृत्व करते हैं। लोकसभा में बहुमत रखने वाले दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद देश की सरकार चलाती है। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री की भूमिका सबसे आगे दिखाई देती है।

3. देश का रिपोर्ट कार्ड और फ्यूचर प्लान

झंडा फहराने के बाद प्रधानमंत्री लाल किले से जो भाषण देते हैं, वह भी बहुत खास होता है। इस भाषण में प्रधानमंत्री अपनी सरकार के काम-काज का हिसाब देते हैं, देश के सामने खड़ी चुनौतियों पर बात करते हैं और बताते हैं कि आने वाले सालों में देश किस दिशा में जाएगा। चूंकि देश चलाने और नीतियां बनाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की होती है, इसलिए लाल किले से देश को संबोधित करने का काम उन्हीं के हिस्से आता है।

फिर राष्ट्रपति का रोल क्या होता है?

राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति का पद देश की संवैधानिक व्यवस्था में बहुत अहम है। राष्ट्रपति संविधान के तहत कई महत्वपूर्ण काम करते हैं, लेकिन रोजमर्रा की सरकार प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के जरिए चलती है। इसी अंतर की वजह से 15 अगस्त और 26 जनवरी के समारोहों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भूमिका अलग-अलग दिखाई देती है।

26 जनवरी को राष्ट्रपति ही क्यों फहराते हैं तिरंगा?

अब बात आती है गणतंत्र दिवस की। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। इसी दिन भारत ने एक गणराज्य के रूप में अपना संवैधानिक सफर शुरू किया। इसलिए गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय समारोह भारत के संवैधानिक प्रमुख यानी राष्ट्रपति से जुड़ा है। 26 जनवरी को राष्ट्रपति राष्ट्रीय समारोह में प्रमुख भूमिका निभाते हैं और कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा बनते हैं। इसके बाद भव्य परेड होती है, जिसमें देश की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता और उपलब्धियों की झलक देखने को मिलती है।