Nag temples in India: 17 अगस्त, सोमवार को नागपंचमी है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है। हमारे देश में नागों के अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हैं। इनसे जुड़ी अनोखी पंरपराएं भी हैं।
Famous snake temples in India: जहां आम जिंदगी में सांप को देखकर डर लगता है, वहीं धार्मिक परंपरा में नाग को देवता, रक्षक और शक्ति के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है। नाग पंचमी के मौके पर यह परंपरा और ज्यादा दिखाई देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं - देश में ऐसे कई मंदिर हैं जहां असली सांपों की नहीं, बल्कि नाग देवता की प्रतिमाओं, नाग चिह्नों और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की पूजा होती है। कहीं पूरा मंदिर नाग देवता को समर्पित है, कहीं हजारों नाग प्रतिमाएं पेड़ों के बीच दिखाई देती हैं तो कहीं मंदिर साल में सिर्फ एक दिन खुलता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही अनोखे नाग मंदिरों की कहानी।
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1. केरल का मन्नारसाला मंदिर, जहां पेड़ों के बीच हैं हजारों नाग
केरल के अलप्पुझा जिले में स्थित मन्नारसाला श्री नागराजा मंदिर भारत के सबसे अनोखे नाग मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर का माहौल किसी नॉर्मल मंदिर से बिल्कुल अलग है। यहां रास्तों और पेड़ों के आसपास 30 हजार से ज्यादा नाग प्रतिमाएं हैं। मंदिर के मुख्य देवता नागराज हैं। उनके साथ सर्प यक्षी और नाग यक्षी की भी पूजा होती है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां महिला पुजारिन की परंपरा है। मंदिर की पूजा एक ब्राह्मण महिला पुजारिन की देखरेख में होती है। यहां नाग पूजा से जुड़ी मान्यताओं में संतान प्राप्ति और परिवार की खुशहाली शामिल है।
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2. उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर, साल में सिर्फ एक दिन खुलता है
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर महाकाल मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां स्थापित नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा के दर्शन सामान्य दिनों में नहीं होते। मंदिर नाग पंचमी के दिन दर्शन के लिए खोला जाता है। यानी पूरे साल श्रद्धालु उस विशेष दिन का इंतजार करते हैं जब मंदिर के कपाट खुलते हैं। यही वजह है कि नाग पंचमी पर उज्जैन में नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
3. प्रयागराज का नागवासुकी मंदिर, गंगा किनारे नागराज का धाम
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा किनारे स्थित नागवासुकी मंदिर नाग पूजा की परंपरा का एक मुख्य केंद्र है। मंदिर नागराज वासुकी को समर्पित है। धार्मिक मान्यता में वासुकी का नाम समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ा है, जहां उन्हें रस्सी के रूप में इस्तेमाल किए जाने का जिक्र मिलता है। प्रयागराज में नागवासुकी के साथ तक्षक नाग से जुड़े धार्मिक स्थल की भी परंपरा है। इस तरह संगम नगरी में नाग पूजा सिर्फ नाग पंचमी तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि यहां इसकी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है।
4. कर्नाटक का कुक्के सुब्रमण्य, जहां देवता और नाग की कथा जुड़ी है
कर्नाटक का कुक्के सुब्रमण्य मंदिर नाग पूजा के मामले में बेहद खास है। यहां भगवान सुब्रमण्य की पूजा नाग से जुड़े स्वरूप में की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नागराज वासुकी और अन्य नाग यहां आकर शरण में आए थे। इसी कारण यह स्थान नाग पूजा और नाग दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हुआ। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां नाग पूजा केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी धार्मिक परंपरा नागों की पौराणिक कथा से जुड़ती है।
5. कर्नाटक का घाटी सुब्रमण्य मंदिर, एक मूर्ति में 2 देवताओं का रहस्य
कर्नाटक में बेंगलुरु के पास स्थित घाटी सुब्रमण्य मंदिर भी नाग पूजा के लिए खास है। यहां एक ही पत्थर में भगवान सुब्रमण्य और भगवान नरसिंह से जुड़ा अनोखा स्वरूप बताया जाता है। दोनों देवताओं के मुख अलग-अलग दिशाओं में हैं और मंदिर में लगे शीशे (मिरर) के जरिए श्रद्धालु दोनों स्वरूपों को देखते हैं। यह नाग पूजा और सर्प दोष से जुड़ा प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
नाग पूजा की कहानी आखिर इतनी पुरानी क्यों है?
भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नागों का जिक्र कई स्तरों पर मिलता है। शेषनाग, वासुकी, तक्षक और नागराज जैसे नाम पुराणों और लोककथाओं में दिखाई देते हैं। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में नाग पूजा का रूप भी बदल गया। कहीं नाग को शिव से जोड़ा गया, कहीं विष्णु के शेषनाग से, कहीं सुब्रमण्य से और कहीं सीधे नागराज की पूजा की गई।
