15 अक्टूबर को जारी की गई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खान-पान की गलत आदतों के चलते दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के बच्चे कुपोषण के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। 

हेल्थ डेस्क। 15 अक्टूबर को जारी की गई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खान-पान की गलत आदतों के चलते दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के बच्चे कुपोषण के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इनमें फिलीपीन्स, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश सबसे आगे हैं। रिपोर्ट में बतलाया गया है कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में लाखों बच्चे नूडल्स और फास्ट फूड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इनसे उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। खान-पान की इन गलत आदतों के चलते उनका वजन जरूरत से कम रहता है और कुपोषण के कारण वे कई तरह की बीमारियों के भी शिकार हो रहे हैं। 

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलीपीन्स, इंडोनेशिया और मलेशिया में अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास हो रहा है। इससे वहां कामकाजी माता-पिताओं की संख्या काफी बढ़ रही है और जीवन-स्तर भी ऊपर उठ रहा है। ऐसे में, कई कामकाजी माता-पिताओं के पास इतना वक्त नहीं है कि वे अपने बच्चों के खान-पान का ख्याल रख सकें। समय की कमी के चलते वे इंस्टेंट फूड बच्चों को देते हैं, जिनमें पोषक तत्वों की कमी होती है।

40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित
संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार फिलीपीन्स, इंडोनेशिया और मलेशिया में पांच साल से कम उम्र के औसतन 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं, जबकि दुनिया के स्तर पर कुपोषित बच्चों का औसत तीन में से एक का है।

क्या कहा इंडोनेशिया के सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने
इंडोनेशिया के सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हसबुल्ला थबरानी ने कहा कि माता-पिता को लगता है कि उनके बच्चों का पेट भरना सबसे जरूरी है। वे इसके बारे में नहीं सोचते कि उनके भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन्स भी हों। यूनिसेफ की एशिया की पोषण विशेषज्ञ मुएनी मुटुंगा ने कहा कि इस समस्या की वजह यह है कि लोग किफायती और आसानी से उपलब्ध भोजन को अपना रहे हैं और परंपरागत हेल्दी फूड खाना छोड़ते चले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नूडल्स बनाना आसान है। नूडल्स सस्ते भी होते हैं। लेकिन इनमें आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व नहीं के बराबर होते हैं। इनमें प्रोटीन भी नहीं होता, वहीं वसा और नमक ज्यादा होता है, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।