सुपरबग दुनिया में तबाही मचा रहा है। हर साल इसकी वजह से 50 लाख लोग जान गंवा रहे हैं। वहीं स्टडी में बताया गया है कि भविष्य में हर साल यह एक करोड़ लोगों की मौत की वजह बनेगी। 

हेल्थ डेस्क. सुपरबग दुनिया के लिए चिंता विषय बनता जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद अब सुपरबग से दुनिया घबरा गई है। अमेरिका में तो यह सबसे घातक बीमारी के रूप में सामने आने लगा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बीमारी पर कोई दवा भी असर नहीं कर रहा है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन डिपार्टमेंट ( CDC) के मुताबिक हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली इस बीमारी पर दवा भी असर नहीं करता है। एशिया में सबसे ज्यादा इस बीमारी से पीड़ित भारत है। 

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आने वाले वक्त में यह बीमारी तहलका मचानेवाला है। मेडिकल जर्नल लांसेट की एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले वक्त में हर साल एक करोड़ लोग इसकी वजह से जान गंवा देंगे। शोधकर्ताओं ने इसे लेकर चिंता जताई है। कोरोना महामारी से ज्यादा खतरनाक इस बीमारी के बारे में आइए जानते हैं।

क्या है सुपरबग

सुपरबग वायरस, बैक्टीरिया और पैरासाइट का एक स्ट्रेन हैं। यह एंटीबायोटिक के दुरुपयोग के कारण पैदा होता है। सुपरबग किसी भी प्रकार की दवाइयों से मरता नहीं है, जिसकी वजह से ये लोगों की जान ले रहा है। अमेरिका में तो इसकी वजह से 50 हजार लोगों मौत के शिकार हो रहे हैं। सीडीसी (CDC) की मानें तो हर 10 मिनट में सुपरबग अमेरिका में एक व्यक्ति की जान ले रहा है। यह अमेरिका स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीमारी को मेडिकल क्षेत्र में एंटी माइक्रोबियल-रेसिस्टेंट के नाम से जाना जाता है।

कैसे बनता है सुपरबग

सुपरबग को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन इसके विकास को धीमा किया जा सकता है। वक्त के साथ वायरस, बैक्टीरिया और पैरासाइट जैसे रोगाणु उन दवाओं के अनुकूल हो जाते हैं जो उन्हें मारने के लिए बनाई जाती है। यह कुछ संक्रमणों के लिए पहले के मानक ट्रीटमेंट को कम असरदार या कभी-कभी बेअसर कर देते हैं। डॉक्टरों की मानें तो फ्लू जैसे वायरल संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक लेने पर सुपरबग बनने के ज्यादा आसार होते हैं। धीरे-धीरे यह दूसरों को भी संक्रमित कर देता है।

भविष्य में हर साल 1 करोड़ लोगों की जाएगी जान

ब्रिटेन में हुई एक स्टडी की मानें तो हर साल सुपरबग 1 करोड़ लोगों की मौत की वजह बनेगा। यह कोरोना से खतरनाक है। कोरोना ने तीन सालों में करीब 65 लाखों को अपना शिकार बनाया है। लेकिन सुपरबग अकेले हर साल 1 करोड़ लोगों की जान ले सकता है।भारत में फिलहाल सुपरबग से होने वाली मृत्यु दर 13 प्रतिशत है जोकि कोरोना से 13 गुना अधिक है। अमेरिका इसे लेकर इस कदर चिंतित है कि उसने इस पर एक टास्क फोर्स ‘US नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर कॉम्बेटिंग एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया’ को गठित किया है। वहां पर इस बीमारी के चलते करीब 5 बिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ता है जो भारत के कुल स्वास्थ्य बजट का आधा है। कोरोना के दौरान एंटीबॉयोटिक के इस्तेमाल की वजह से सुपर बग से होने वाली मृत्यु में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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