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Research: ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने बनाया टूटी हड्डियों के लिए बायोडिग्रेडेबल बैंडेज, चल रही है ट्रायल की तैयारी

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक खास रिसर्च कर ऐसा बैंडेज बनाने में सफलता पाई है, जो टूटी हड्डियों को जोड़ने में कारगर साबित हुआ है। चूहों पर इस बैंडेज का सफल प्रयोग करने के बाद अब इंसानों पर इसका ट्रायल करने की तैयारी की जा रही है।

UK Scientists developed biodegradable bandage, forms stem cells into bone fractures MJA
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New Delhi, First Published Sep 23, 2020, 3:12 PM IST
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हेल्थ डेस्क। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक खास रिसर्च कर ऐसा बैंडेज बनाने में सफलता पाई है, जो टूटी हड्डियों को जोड़ने में कारगर साबित हुआ है। चूहों पर इस बैंडेज का सफल प्रयोग करने के बाद अब इंसानों पर इसका ट्रायल करने की तैयारी की जा रही है। यह एक बायोडिग्रेडेबल बैंडेज है। टूटी हड्डियों को रिपेयर करने के बाद यह शरीर में घुल जाता है। इसे किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस बैंडेज से टूटी हुई हड्डियां 8 हफ्ते में जुड़ जाती हैं। 

कैसे काम करता है यह बैंडेज
वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां फ्रैक्चर होता है, वहां चीरा लगा कर बैंडेज को लगा दिया जाता है। यह प्लास्टर की तरह काम करता है। इससे हड्डियां आसानी से जुड़ जाती हैं। किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बैंडेज बहुत ही बारीक और फ्लेक्सिबल है। यह बालों से सिर्फ 3 गुना मोटा है। यह कोई साधारण बैंडेज नहीं है। इसमें स्टेम सेल्स और बोन सेल्स हैं। यह बायोडिग्रेडबल है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बुजुर्ग मरीजों के लिए ज्यादा कारगर साबित होगा। 

संक्रमण का नहीं है खतरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बैंडेज शरीर के अंदरूनी हिस्से में लगाया जाता है, इसलिए इससे किसी तरह का संक्रमण होने का रिस्क कम होता है। इस बैंडेज को एक खास तरह के पॉलिमर से तैयार किया गया है। इसका नाम पॉलिकेप्रोलैक्टोन है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से इसे दांतों के इलाज में इस्तेमाल किए जाने की अनुमति मिल चुकी है। 

रिसर्च टीम ने बनाया एक और बैंडेज
रिसर्च टीम ने इसके अलावा एक और बैंडेज बनाया है। इसमें शरीर में पाया जाना वाला प्रोटीन शामिल किया गया है। यह मांसपेशियों और शरीर के दूसरे अंगों की टूट-फूट को ठीक करने का काम कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल मसल्स या टिश्यू इंजरी में किया जाएगा।    


 

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