निजामुद्दीन के मरकज में शामिल हुए कुछ लोगों पर देश में कोरोना संक्रमण फैलाने का इल्जाम लग रहा है। इसकी आंच झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के बेटे तक भी पहुंची है। 

रांची, झारखंड. निजामुद्दीन के मरकज में शामिल हुए कुछ लोगों पर देश में कोरोना संक्रमण फैलाने का इल्जाम लग रहा है। इसकी आंच झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के बेटे तक भी पहुंची है। हालांकि मंत्री ने सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए अपने बेटे को 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन कर दिया है। उसे कोरोना संक्रमण है या नहीं, अभी इसकी रिपोर्ट आना बाकी है। इधर, मंत्री ने सफाई दी कि उनका बेटा मरकज में शामिल नहीं हुआ। यह किसी ने अफवाह फैलाई है।

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पहले जानें पूरा मामला....
निजामुद्दीन के मरकज में शामिल लोगों को ढूंढ़ने देशभर में अलर्ट जारी किया गया है। माना जा रहा है कि ये लोग बगैर किसी परमिशन के यहां जुटे और फिर लापता हो गए। झारखंड में भी पुलिस की विशेष शाखा ने निजामुद्दीन के तबलीगी जमात में शामिल लोगों को ढूंढ़ने अलर्ट जारी किया है। इस बीच मरकज में शामिल होने की सूचना पर बुधवार को मधुपूर विधायक और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के बेटे तनवीरुल हसन और शहर के नबी बक्स रोड निवासी मोहम्मद अब्बास को प्रशासन ने बुलाया था। मंत्री हसन बेटे के साथ थाने पहुंचे थे। देवघर से आई मेडिकल टीम के अनुमंडल अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. सुनील कुमार मरांडी ने हसन के बेटे और दूसरे शख्स के ब्लड सैम्पल लिए। उन्हें जांच के लिए रांची भेजा गया है। इसके बाद दोनों को 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन में भेजने के निर्देश दिए गए।


मंत्री के बेटे ने बताई 1993 की कहानी...
मंत्री के बेटे तनवीरुल हसन ने बताया कि वो 1993 में दिल्ली गया था। उसके बाद कभी नहीं गया। यह किसी ने अफवाह फैलाई है। पुलिस चाहे तो उनका रिकॉर्ड खंगाल सकती है। उनके घर और दुकान का CCTV पुलिस देख सकती है। वहीं, मंत्री ने भी कहा कि उनका बेटा दिल्ली या रांची नहीं गया। उसका निजामुद्दीन के तबलीगी जमात से कोई वास्ता नहीं है। ब्लड सैम्पल की जांच के बाद इसका खुलासा हो जाएगा। 

देवघर सिविल सर्जन डॉक्टर कुमार विजय ने बताया कि देवघर से 4 और मधुपुर से 2 लोगों को क्वारेंटाइन किया गया है।