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झारखंड सरकार का कारनामा: अंकिता की बहन को सरकारी जॉब का वादा करके पकड़ा दी प्राइवेट चपरासी की नौकरी

दुमका की बेटी जिंदा जलाने के बाद हुई मौत के बाद अब झारखंड सरकार ने उसके परिवार के साथ धोखा किया है। हेमंत सरकार ने पीड़िता की बहन को सरकार नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन अब प्राइवेट कंपनी में चपरासी का नियुक्ति पत्र पकड़ा दिया।

 

 

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First Published Sep 15, 2022, 2:23 PM IST

 रांची (झारखंड). दुमका की बेटी अंकिता के परिवार के साथ सरकार ने धोखा किया है। अंकिता की बड़ी बहन को सरकारी नौकरी देने का वादा कर एक प्राइवेट कंपनी में चपरासी की नौकरी की नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया है। मामला गुरुवार को उजागर हुआ जब अंकिता की बड़ी बहन नियुक्ति पत्र जिले के डीसी को लौटने उनके कार्यालय पहुंची। अंकिता की बड़ी बहन इशिका ने बताया की नियुक्ति पत्र वह डीसी को लौटने आई है। दुमका के विधायक बसंत सोरेन ने उसे पिछले दिनों नियुक्ति पत्र सौंपा था। बात सरकारी नौकरी की हुई थी लेकिन उसे प्राइवेट जॉब का नियुक्ति पत्र सौंपा गया। सरकार द्वारा दिए गए धोखे से उसका परिवार सदमे में है। 

चपरासी की दी नौकरी
इशिका ने बताया की सरकारी नौकरी का वादा कर सरकार ने उसे टी एंड एम सर्विस कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लेटर पैड पर चपरासी का नियुक्ति पत्र सौंपा है। वह इस जॉब से संतुष्ट नहीं है इसलिए नियुक्ति पत्र लौटने आई है। सरकार ने सरकारी नौकरी का वादा कर उन्हे धोखा दिया। 11 सितंबर को स्थानीय विधायक सीएम हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन अंकिता के घर पहुंचे थे। उसे नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा था। नियुक्ति पत्र पाकर परिवार के लोग काफी खुश थे। लेकिन उन्हें जब पता चला की नियुक्ति पत्र एक प्राइवेट कंपनी में जॉब के लिए है तो परिजनों के होश उड़ गए। जिसके बाद नियुक्ति पत्र लौटने अंकिता की बड़ी बहन अन्य परिजनों के साथ डीसी ऑफिस पहुंच गई। अंकिता की बड़ी बहन से बताया की विधायक द्वारा दिए गए नियुक्ति पत्र से वह संतुष्ट नहीं है। 

पेट्रोल से जला अंकिता की हुई थी हत्या
जानकारी हो की 23 अगस्त को पड़ोसी ने अंकिता को पेट्रोल छिड़क जला दिया था। एक तरफा प्यार में मुस्लिम युवक शाहरूख ने उसे आग के हवाले कर दिया था। इलाज के दौरान रिम्स में अंकिता की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने शाहरूख और उसके साथी नईम को जेल भेज दिया था। अंकिता की मौत के बाद राज्य में खूब बवाल हुआ था। लोगों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। 11 सितंबर को तामझाम के साथ विधायक बसंत सोरेन अंकिता के घर पहुंचे थे और अंकिता की बड़ी बहन इशिका को नियुक्ति पत्र सौंपा था।

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