Asianet News Hindi

सरपंच ने जीते जी कागजों में इस बुजुर्ग को मार दिया, अब बेचारी खुद को जिंदा साबित करने 'मरी' जा रही

यह महिला खुद को जिंदा साबित करने पिछले दो साल से थाने और प्रशासन के पास चक्कर काट रही है। लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है कि ये जिंदा है। सरकारी कामकाज में यह लापरवाही इस गरीब महिला के लिए मुसीबत बन गई है। पेंशन नहीं मिलने से बुजुर्ग को खाने के लाले पड़े हुए हैं। शर्मनाक बात यह है कि कोई भी अधिकारी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं है।
 

Jharkhand News, this woman is upset to prove herself alive for 2 years kpa
Author
Deoghar, First Published Sep 21, 2020, 11:54 AM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

देवघर, झारखंड. सरकारी काम के तौर-तरीके कैसे लोगों के लिए संकट बन जाते हैं, यह महिला इसी का उदाहरण है। यह महिला खुद को जिंदा साबित करने पिछले दो साल से थाने और प्रशासन के पास चक्कर काट रही है। लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है कि ये जिंदा है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि वो खुद को जिंदा कैसे साबित करे, क्योंकि कागजों में वो मर चुकी है। मामला मधुपुर का है। जब यह महिला थाने पहुंची, तो पुलिस भी हैरान रह गई। हालांकि पुलिस ने महिला को मदद करने का भरोसा दिलाया। अब यह मामला सीनियर अफसरों तक पहुंच गया है।


रिश्वत नहीं देने पर सरपंच ने निकाली खुन्नस

यह हैं अंझोवा देवी। वे बताती हैं कि साप्तर पंचायत की मुखिया शोभादेवी ने उनसे रिश्वत मांगी थी। लेकिन वो गरीब हैं, इसलिए सरपंच को पैसे कहां से लाकर देतीं? इसी बात से नाराज होकर उन्होंने लिखकर दे दिया कि वो मर चुकी हैं। इसका पता उसे तब चला, जब पेंशन बंद हो गई। आरोप है कि सरपंच ने 1000 रुपए मांगे थे। अंझोवा देवी ने बताया कि बड़ी मुश्किल से उसकी वृद्धावस्था पेंशन (old age pension) मंजूर हुई थी, लेकिन सरपंच ने उस पर भी पानी फेर दिया। महिला ने इसकी शिकायत एसडीओपी से लेकर अन्य अधिकारियों से की है।

अंझोवा देवी इसी मामले में जब मधुपुरा थाने पहुंचीं, तो पुलिसवाले उनकी बात सुनकर हैरान रह गए। यह मामला उछलने पर सरपंच ने सफाई दी कि एक नाम के दो लोग होने से यह गलती हुई। इस संबंध में उन्होंने सुधार करके 2 साल पहले ही अंचलाधिकारी को पत्र भेज दिया था। अब यह मामला वहीं फंसा है।

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios