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झारखंड में बढ़ा सियासी सस्पेंस: अब तक नहीं जारी हुई नोटिफिकेशन, सीएम हेमंत सोरेन दे सकते हैं इस्तीफा

झारखंड में सियासी संकट के बीच सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विधायकी से अयोग्य करने संबंधित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। झारखंड में राजनीतिक हलचल के बीच जेएमएम और महागठबंधन के सभी विधायकों को छत्तीसगढ़ भेज सकते हैं।

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First Published Aug 28, 2022, 9:07 AM IST

रांची. झारखंड में सियासी संकट के बीच सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। अभी तक राज्यपाल रमेश बैस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विधायकी से अयोग्य करने संबंधित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के द्वारा जल्द ही सीएम की सदस्यता खत्म करने को लेकर आदेश जारी किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गवर्नर ने अपना फैसला केन्द्रीय चुनाव आयोग को भेज दिया है। 

सीट खाली होने का नोटिफिकेशन
जानकारी के अनुसार, राज्यपाल के आदेश के आधार पर हेमंत सोरेन की विधायकी आयोग होने के कारण बरहेट विधानसभा की सीट खाली होने का नोटिफिकेशन चुनाव आयोग को जारी करना है लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई अधिसूचना जारी की जाएगी। इसकी जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को दी जाएगी।

विधायकों का बाहर भेजने का सस्पेंस 
झारखंड में राजनीतिक हलचल के बीच जेएमएम और महागठबंधन के सभी विधायकों को छत्तीसगढ़ या अन्य किसी राज्य में भेज सकते है। लेकिन हेमंत ने सभी विधायकों को राजनीतिक पिकनिक करवाई। सभी विधायक 4 घंटे तक खूंटी में मस्ती करते दिखे। इनके वीडियो और फोटो भी सोशल मीडिया में वायरल हुए। सभी विधायक सीएम हाउस से 3 लग्जरी बसों से रवाना हुए थे। हालांकि विधायक शाम को वापस रांची आ गए थे। 

कांग्रेस विधायक दल की बैठक
पिकनिक से लौटने के बाद रांची में देर रात कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के सियासी हलचल पर विचार विमर्श किया गया। बैठक के बाद राज्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा- हमारी राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची गई। देश भर में चुनी हुई सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है। अब यह एक आदर्श बन गया है। कांग्रेस इसके खिलाफ मजबूती से खड़ी है और सरकार में कोई संकट नहीं है।

क्या है मामला
दरअसल, लीज माइनिंग केस में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता पर संकट बढ़ गया है। ऑफिस ऑफ प्रोफिट का मतलब होता है लाभ का पद। इसका मतलब उस पद से होता है जिस पर रहते हुए कोई शख्स सरकार की ओर से किसी भी तरह की अन्य सुविधा नहीं ले सकता है। अगर कोई व्यक्ति इस पद का लाभ उठा रहा है तो वो सदन का सदस्य नहीं रह सकता है।

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