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बेटी पैदा होने पर घर से निकाला, खुद को न्याय दिलाने के लिए बन गईं जज, पढ़िए सफलता की काहानी

साल 2008 में झारखंड की अवनिका की शादी जयपुर में हुई थी। लेकिन शादी के बाद उनके ससुराल वाले उनको दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। आए-दिन पति मारपीट तक करने लगा। लेकिन वह सब चुपचाप सहन करती रहीं और किसी से कुछ नहीं कहा।

success story of woman judge after being victim of domestic violence in jharkhand
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Ranchi, First Published Nov 28, 2019, 6:00 PM IST
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रांची (झारखंड). कहते हैं जिनके हौसलो बुलंद होते हैं कामयाबी उनके कदम चूमती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है झारखंड की एक महिला ने जिनकी जिंदगी में काफी परेशानियां आईं। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सफलता का परचम लहराते हुए जज बन गईं। आज पढ़िए इस महिला की सफलता की काहानी...

पति भी करने लगा था हद पार
दरअसल, साल 2008 में झारखंड की अवनिका की शादी जयपुर में हुई थी। लेकिन शादी के बाद उनके ससुराल वाले उनको दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। आए-दिन पति मारपीट तक करने लगा। लेकिन वह सब चुपचाप सहन करती रहीं और किसी से कुछ नहीं कहा।

बेटी होने के बाद घर से निकाला
ससुरालवालों ने हद जब पार कर दी तब अवनिका को एक बेटी हुई तो उनको घर से निकाल दिया। फिर इसके बाद वह अपने घर वृंदावन वापस आ गईं। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने साथ हुए अन्याय का बदला के लिए अदालत के चक्कर काटने लगीं।

इस तरह अवनिका बन गईं जज
आखिर में एक दिन अवनिका ने परेशान होकर सोचा मैं ऐसे कब तक भटकती रहूंगी। क्यों ना में खुद जज बना जाऊं। इस तरह उन्होंने साल 2013 में  पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी। 2014 में उनको सफलता मिल गई और उनका चयन हो गया। आज वह झारखंड हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं।

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